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पश्चिम बंगाल: ममता बनर्जी के धरना देने की घोषणा पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की प्रतिक्रिया

कोलकाता, 2 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के विरोध में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 6 मार्च को कोलकाता में धरना देंगी। धरना देने की इस घोषणा के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य की प्रतिक्रिया सामने आई है।
पश्चिम बंगाल: ममता बनर्जी के धरना देने की घोषणा पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की प्रतिक्रिया

कोलकाता, 2 मार्च (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के विरोध में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 6 मार्च को कोलकाता में धरना देंगी। धरना देने की इस घोषणा के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य की प्रतिक्रिया सामने आई है।

उन्होंने कहा कि अगर टीएमसी प्रमुख धरना दे रही हैं, तो हम क्या कर सकते हैं? लोग उनकी स्थिति जानते हैं। लोग जानते हैं कि वो बांग्लादेशी रोहिंग्याओं, बांग्लादेश से आने वालों और मृत मतदाताओं के लिए धरना दे रही हैं।

टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भाजपा विधानसभा चुनाव नहीं जीत सकती, इसलिए चुनाव आयोग के माध्यम से मतदाता सूची में हेरफेर करने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने पहले ही एक करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाने का लक्ष्य तय कर लिया था। यह फैसला एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही कर लिया गया था। मनमाने ढंग से नाम हटाए जाने के खिलाफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी छह मार्च को कोलकाता में धरना देंगी।

अभिषेक बनर्जी ने बताया कि यह धरना मध्य कोलकाता के एस्प्लेनेड इलाके में होगा, जहां ममता बनर्जी ने वर्ष 2008 में 26 दिन का अनशन किया था। उन्होंने चुनाव आयोग से सवाल किया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान चिन्हित किए गए बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोगों की सूची सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है।

यह मुद्दा भाजपा द्वारा गढ़ा गया है। अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में नामों को हटाया जाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है। मतदाता सूची संशोधन के नाम पर आम लोगों के मतदान अधिकारों को सीमित किया जा रहा है।

अभिषेक बनर्जी ने सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव आयोग को इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी। एसआईआर प्रक्रिया के कारण बंगाल में कई लोगों की मौत हो चुकी है। तार्किक विसंगतियों के नाम पर चुनाव आयोग ने केवल भाजपा के निर्देशों का पालन किया है, जिसका उद्देश्य एक करोड़ से अधिक नाम हटाना है।

--आईएएनएस

एसडी/वीसी

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