महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष के वोटिंग व्यवहार को भाजपा सांसदों ने नारी शक्ति के साथ बताया अन्याय
नई दिल्ली, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल पारित न होने पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्हें महिला विरोधी बताया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष महिला सशक्तिकरण के खिलाफ काम कर रहा है, ताकि महिलाओं को इसका फायदा न मिल सके।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, "जिसने भी बिल पढ़ा है, वो समझ सकता है कि इससे बेहतर प्रस्ताव नहीं हो सकता है। हमने जो परिसीमन का प्रस्ताव दिया था, उसमें हर राज्य को बराबर हिस्सा दिया गया था, सीटों का बराबर बंटवारा हुआ था, लेकिन विपक्ष इसके खिलाफ था। गृह मंत्री ने भी सब कुछ साफ-साफ समझाया था। विपक्ष एक के बाद एक बहाने बनाकर बिल को रोक रहा है। वो नहीं चाहते हैं कि आधी आबादी को उनका हक मिले। देश की महिलाओं ने संसद के इस सत्र को सुना होगा और वे आने वाले समय में विपक्ष को इसका जवाब देंगी।"
केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले ने कहा, "विपक्ष ने महिलाओं के खिलाफ वोटिंग की है। महिलाएं उनको माफ नहीं करेंगी। विपक्ष की भूमिका महिलाओं के खिलाफ है, और उन्होंने बहुत बड़ा अन्याय किया है, और महिलाएं उनको इसका जवाब देंगी।"
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, "इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण और क्या हो सकता है? अगर इसे 2023 के एक्ट के आधार पर लागू किया जाता है तो 2026 की जनगणना के हिसाब से तमिलनाडु में 39 में से 29 लोकसभा सीटें रह जाएंगी। इसी तरह केरलम में 20 में से 14 सीटें रह जाएंगी। मैंने कभी नहीं सोचा था कि कांग्रेस और एमके स्टालिन दक्षिण भारत के साथ इतना बड़ा अन्याय करेंगे।"
जेडीयू सांसद संजय कुमार झा ने कहा, "महिला आरक्षण विधेयक, जो पहले ही 2023 में पारित हो चुका था, अब फिर से दोहराया गया है। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने साफ तौर पर कहा कि मौजूदा 543 लोकसभा सीटों में से आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए 50 प्रतिशत सीटें और जोड़ी जाएंगी, और 2029 में चुनाव इसी व्यवस्था के तहत कराए जाएंगे।"
केंद्रीय मंत्री बनवारी लाल वर्मा ने कहा, "नारी सशक्तिकरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पेश किए गए 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' विधेयक के खिलाफ विपक्ष के विरोध को पूरे देश की महिलाओं ने देखा है।"
भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने कहा, "ये परिसीमन का विरोध नहीं था। इससे साफ है 2029 में जो ये 33 प्रतिशत महिलाएं इस लोकसभा में आतीं, उनको रोकने का काम किया गया है। ये केवल महिलाओं का अपमान नहीं है, बल्कि विपक्ष ने विश्वासघात किया है और उनका चेहरा बेनकाब हो गया है।"
--आईएएनएस
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