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'यह महिलाओं के लिए नए युग की शुरुआत', महिला आरक्षण बिल पर कंगना रनौत का बड़ा बयान

दिल्ली, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर मनोरंजन जगत की कई अभिनेत्रियों ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए समर्थन जताया। इस ऐतिहासिक बिल को महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने का बड़ा कदम माना जा रहा है।
'यह महिलाओं के लिए नए युग की शुरुआत', महिला आरक्षण बिल पर कंगना रनौत का बड़ा बयान

दिल्ली, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर मनोरंजन जगत की कई अभिनेत्रियों ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए समर्थन जताया। इस ऐतिहासिक बिल को महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने का बड़ा कदम माना जा रहा है।

अभिनेत्री कंगना रनौत ने आईएएनएस के साथ खास बातचीत में इस बिल को 'ऐतिहासिक' बताते हुए प्रधानमंत्री की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह कानून महिलाओं के लिए एक नए युग की शुरुआत है। कंगना ने कहा, "यह बिल महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाएगा और राजनीति व सत्ता के पदों पर उन्हें समान भागीदारी देगा। महिलाओं को अच्छे-अच्छे पदों पर जगह मिलेगी। हमारा सौभाग्य है कि हम इस इतिहास का हिस्सा बन रहे हैं।"

विपक्ष की आलोचना पर कंगना ने कहा कि यह काम पीएम मोदी की वजह से ही संभव हो पाया है। उन्होंने कहा, "विपक्ष ने तो हमेशा इस बिल को रोकने की कोशिश की है। इसलिए यह कोई हैरानी की बात नहीं है कि वे इसमें टांग अड़ाने की कोशिश न करेंगे।"

वहीं, अमीषा पटेल ने भी बिल का भरपूर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि महिलाएं ही आम लोगों की असली समस्याओं और घर-परिवार से जुड़ी परेशानियों को बेहतर तरीके से समझ सकती हैं। उन्होंने कहा, "देश की प्रगति के लिए महिलाओं की आवाज सुनना बहुत जरूरी है। जब भी किसी क्षेत्र में महिलाओं की प्रगति होती है और उन्हें ज्यादा समर्थन मिलता है, तो मुझे बहुत खुशी होती है। चाहे नौकरी हो या संसद, जब उनकी आवाज सुनी जाती है और उन्हें मौके दिए जाते हैं, तो यह अच्छा लगता है। 33 प्रतिशत आरक्षण होना चाहिए। महिलाओं का समर्थन करना बेहद जरूरी है। मैं इसका पूरा समर्थन करती हूं।"

फेमिना मिस इंडिया हरियाणा की विजेता देबास्मित ने भी बिल को महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और संसद को ज्यादा समावेशी बनाने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा, "हमारे वेदों में भी महिलाओं को समाज का अभिन्न अंग माना गया है। सरकार द्वारा लाया गया यह आरक्षण विधेयक बहुत महत्वपूर्ण कदम है। यह न सिर्फ महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देगा, बल्कि संसद को और ज्यादा समावेशी बनाएगा। हम एक विविधतापूर्ण देश हैं, इसलिए हर किसी की राय को समान महत्व देना जरूरी है।"

उन्होंने तीन दिवसीय चर्चा में समावेशिता पर जोर देते हुए कहा, "चाहे आदिवासी महिलाएं हों या गैर-आदिवासी, अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों से आने वाली महिलाओं की बात होनी चाहिए। यह हमारे देश के विकास की दिशा में एक बहुत सुंदर कदम है।"

--आईएएनएस

एनएस/डीएससी

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