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महात्मा गांधी की हत्या के बाद सांप्रदायिकता को कुचल दिया जाता, तो देश बर्बाद नहीं होता : अरशद मदनी

नई दिल्ली, 14 जनवरी (आईएएनएस)। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक पोस्ट में महात्मा गांधी की हत्या और आजादी के बाद की राजनीति पर गंभीर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी की हत्या के बाद अगर सांप्रदायिक ताकतों को सख्ती से कुचल दिया जाता, तो देश को तबाही से बचाया जा सकता था।
महात्मा गांधी की हत्या के बाद सांप्रदायिकता को कुचल दिया जाता, तो देश बर्बाद नहीं होता : अरशद मदनी

नई दिल्ली, 14 जनवरी (आईएएनएस)। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक पोस्ट में महात्मा गांधी की हत्या और आजादी के बाद की राजनीति पर गंभीर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी की हत्या के बाद अगर सांप्रदायिक ताकतों को सख्ती से कुचल दिया जाता, तो देश को तबाही से बचाया जा सकता था।

मदनी ने आरोप लगाया कि आजादी के बाद कांग्रेस ने सांप्रदायिकता के खिलाफ लचर और नरम नीति अपनाई। कांग्रेस के नेताओं ने धर्म के नाम पर नफरत फैलाने वाली राजनीति के विरोध में मजबूत कदम नहीं उठाए। सांप्रदायिक शक्तियों के साथ नरमी बरती गई और संविधान के अनुसार उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई से बचा गया। नतीजतन, ये ताकतें मजबूत होती गईं और फलने-फूलने का मौका मिला।

मौलाना मदनी ने याद दिलाया कि महात्मा गांधी की हत्या सांप्रदायिक ताकतों के हाथों हुई थी। विभाजन के बाद देश में मुस्लिम विरोधी दंगे भड़के, तो गांधीजी ने उन्हें रोकने के लिए उपवास किया। लेकिन, कुछ कांग्रेस नेताओं को भी यह पसंद नहीं आया और वे गांधीजी के खिलाफ हो गए। अंत में उनकी हत्या कर दी गई। मदनी ने इसे देश की धर्मनिरपेक्षता की हत्या बताया और अफसोस जताया कि उस समय कांग्रेस नेतृत्व ने जरूरी कदम नहीं उठाए।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने आजादी से पहले ही कांग्रेस से लिखित आश्वासन लिया था कि आजाद भारत का संविधान धर्मनिरपेक्ष होगा और सभी धार्मिक अल्पसंख्यकों को पूर्ण धार्मिक स्वतंत्रता मिलेगी। विभाजन के बाद कुछ कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मुसलमानों के लिए अलग देश बन चुका है, इसलिए संविधान सेक्युलर नहीं होना चाहिए। लेकिन जमीयत के दबाव में सेक्युलर संविधान बना। फिर भी सांप्रदायिकता की जड़ें मजबूत होती गईं।

मदनी ने कहा कि कांग्रेस ने केंद्र और राज्यों में सत्ता संभाले रहते हुए भी सांप्रदायिकता पर लगाम नहीं लगाई। जमीअत लगातार मांग करती रही कि इसे रोका जाए, लेकिन गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। अगर 77 साल पहले कड़ा रुख अपनाया जाता, तो कांग्रेस आज सत्ता से बाहर नहीं होती और देश बर्बादी के कगार पर नहीं पहुंचता।

उन्होंने युवा पीढ़ी से अपील की कि वे इतिहास से सीखें, क्योंकि आज संविधान और लोकतंत्र के मूल चरित्र को खतरा मंडरा रहा है। हमारे पूर्वजों ने संविधान की जो नींव रखी, अगर उसे ईमानदारी से लागू किया जाता तो आज यह स्थिति नहीं आती।

यह बयान मौलाना अरशद मदनी ने एक्स पर पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस की पुरानी नीतियों को देश और संविधान के लिए नुकसानदायक बताया है।

--आईएएनएस

एसएचके/एएस

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