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महाराष्ट्र सरकार से मिली इनामी राशि से असंतुष्ट कबड्डी के गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ी, खेल मंत्री सुनेत्रा पवार को सौंपा ज्ञापन

महाराष्ट्र सरकार से मिली इनामी राशि से असंतुष्ट कबड्डी के गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ी, खेल मंत्री सुनेत्रा पवार को सौंपा ज्ञापन
महाराष्ट्र सरकार से मिली इनामी राशि से असंतुष्ट कबड्डी के गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ी, खेल मंत्री सुनेत्रा पवार को सौंपा ज्ञापन

मुंबई, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीतकर लौटी भारतीय पुरुष और महिला कबड्डी टीम के खिलाड़ी महाराष्ट्र सरकार द्वारा दी गई इनामी राशि से नाखुश हैं। मंगलवार को असलम इनामदार और सोनाली शिंगेट की अगुवाई में खिलाड़ियों ने उपमुख्यमंत्री और खेल मंत्री सुनेत्रा पवार को ज्ञापन सौंपा।

असलम इनामदार ने पत्रकारों संग बातचीत करते हुए कहा, "हमने खेल मंत्री सुनेत्रा पवार से मुलाकात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। हमने उनसे अनुरोध किया कि एशियाई खेलों के लिए पहले लागू की गई पुरस्कार नीति और वर्तमान नीति में कुछ अंतर हैं, जिन पर विचार किया जाना चाहिए। अगर दूसरे राज्यों की नीतियों को देखें, तो वहां विभिन्न खेलों के लिए अलग-अलग पुरस्कार निर्धारित किए गए हैं। स्वर्ण पदक जीतने पर 3 करोड़ रुपये, रजत पदक पर 2 करोड़ रुपये और कांस्य पदक पर 1 करोड़ रुपये दिए जाते हैं। पिछले एशियाई खेलों में जब मैंने हिस्सा लिया था, तब टीम स्पर्धा में मुझे 75 लाख रुपये मिले थे, जबकि व्यक्तिगत स्पर्धा में 1 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि निर्धारित थी।लेकिन अब नीति में बदलाव हो गया है। 17 सितंबर को जारी नए सरकारी प्रस्ताव (जीआर) के अनुसार, 10 से अधिक खिलाड़ियों वाली टीम स्पर्धा के लिए 5 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है, जिसे सभी खिलाड़ियों के बीच बांटा जाएगा। इस हिसाब से हमारी टीम स्पर्धा के लिए प्रत्येक खिलाड़ी के हिस्से में लगभग 42 लाख रुपये आ रहे हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "हमने यही बात खेल मंत्री सुनेत्रा पवार को बताई। उन्होंने हमारी बात को बहुत अच्छे से सुना और हमको भरोसा दिलाया कि इसको लेकर जल्द ही सकारात्मक नतीजे मिलेंगे। जाहिर तौर पर हम सकारात्मक हैं, क्योंकि हम उनके पास एक उम्मीद के साथ आए हैं। हम अपने हक की लड़ाई लड़ेंगे, लेकिन हमें भरोसा है कि हमें सकारात्मक नतीजा ही मिलेगा।"

असलम ने कहा, "मैं यह कहना चाहूंगा कि ज्यादातर खिलाड़ी मध्यमवर्गीय परिवारों से आते हैं। जब कोई खिलाड़ी खेल में अपना करियर बनाता है और भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करता है, तो उसे उम्मीद होती है कि इससे वह आर्थिक रूप से मजबूत बनेगा और उसे एक अच्छी नौकरी भी मिलेगी। इसी उम्मीद के साथ हर खिलाड़ी मेहनत करता है और संघर्ष करता है। मुझे लगता है कि अगर सभी राज्यों की खेल नीतियां मजबूत हों या फिर सभी राज्यों में एक समान खेल नीति लागू की जाए, तो माता-पिता भी अपने बच्चों को खेलों में आगे बढ़ने के लिए अधिक प्रोत्साहित करेंगे।"

वहीं, महिला कबड्डी खिलाड़ी सोनाली शिंगेट ने बताया, "हमने सुमित्रा मैम से मुलाकात की और उन्हें बताया कि मैंने पिछले साल विश्व कप में हिस्सा लिया था। पिछली सरकारी नीति (जीआर) के अनुसार, मुझे 2 करोड़ 25 लाख रुपये मिले थे। हालांकि, अब नई नीति के तहत मिलने वाली पुरस्कार राशि काफी कम हो गई है। यह खिलाड़ियों के लिए सकारात्मक नहीं, बल्कि नकारात्मक बदलाव है। इससे खिलाड़ी मानसिक रूप से परेशान हो सकते हैं और उनका मनोबल भी गिर सकता है। अगर खिलाड़ियों को पर्याप्त आर्थिक सहायता मिलेगी, तो वे अपने खेल पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। हम उम्मीद करेंगे कि हमें सकारात्मक जवाब मिले। अगर हमें यहां से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलती है, तो हम दोबारा उनसे मुलाकात करेंगे और मुख्यमंत्री से भी मिलेंगे।"

--आईएएनएस

एसएम/डीकेपी

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