महाराष्ट्र सरकार ने नासिक के तीन प्रमुख धार्मिक ट्रस्टों के प्रशासनिक अधिकारों में किया अहम बदलाव
नासिक, 31 मई (आईएएनएस)। महाराष्ट्र सरकार ने नासिक जिले के तीन प्रमुख धार्मिक ट्रस्टों के प्रशासनिक अधिकारों और जिम्मेदारियों से संबंधित एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य के विधि एवं न्याय विभाग द्वारा 29 मई 2026 को जारी असाधारण राजपत्र के माध्यम से इन ट्रस्टों के प्रबंधन से जुड़े कुछ अधिकार धर्मादाय आयुक्त से संबंधित अधिकारियों को हस्तांतरित किए गए हैं।
सरकार द्वारा जारी अधिसूचनाओं के अनुसार, यह निर्णय महाराष्ट्र सार्वजनिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 8(2) के तहत प्राप्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए लिया गया है। इसके तहत धर्मादाय आयुक्त द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ प्रशासनिक और वैधानिक अधिकार अब नासिक के विभिन्न धर्मादाय अधिकारियों को सौंप दिए गए हैं।
राजपत्र में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, पंचवटी स्थित प्रसिद्ध श्री कालाराम मंदिर संस्थान के संबंध में महाराष्ट्र सार्वजनिक न्यास अधिनियम की धारा 50बी(ब) के अंतर्गत धर्मादाय आयुक्त के सभी अधिकारों और कर्तव्यों का निर्वहन अब संयुक्त धर्मादाय आयुक्त-2, नासिक द्वारा किया जाएगा। माना जा रहा है कि यह निर्णय मंदिर संस्थान के प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी और सुचारु बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।
इसी प्रकार, नासिक जिले के कलवन तालुका स्थित श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र श्री सप्तश्रृंगी निवासिनी देवी ट्रस्ट के मामले में धर्मादाय आयुक्त के अधिकार वरिष्ठ धर्मादाय सह आयुक्त, नासिक को सौंपे गए हैं। अब इस ट्रस्ट से संबंधित धारा 50बी(ब) के अंतर्गत आने वाले सभी प्रशासनिक और वैधानिक कार्य उक्त अधिकारी के माध्यम से संपादित किए जाएंगे।
वहीं, देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल त्र्यंबकेश्वर मंदिर का संचालन करने वाले श्री त्र्यंबकेश्वर संस्थान ट्रस्ट के संबंध में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अधिसूचना के अनुसार, इस ट्रस्ट से जुड़े धर्मादाय आयुक्त के अधिकार और कर्तव्यों का निर्वहन अब वरिष्ठ संयुक्त धर्मादाय आयुक्त, नासिक द्वारा किया जाएगा।
महाराष्ट्र सरकार का मानना है कि अधिकारों के इस विकेंद्रीकरण से ट्रस्टों के प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी और निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी। इससे धार्मिक संस्थानों के संचालन, वित्तीय प्रबंधन और अन्य प्रशासनिक मामलों में पारदर्शिता तथा जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद जताई गई है।
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