महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण पर सियासत तेज, मंत्री उदय सामंत बोले-जारांगे को लोग दे रहे गलत जानकारी
मुंबई, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन और दशहरा रैली को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। महायुति सरकार के मंत्रियों और शिवसेना नेताओं ने मराठा नेता मनोज जारांगे पाटिल पर निशाना साधा और अपनी दशहरा रैली को सामाजिक न्याय और किसान हित से जोड़ा।
मंत्री उदय सामंत ने पत्रकारों से बात करते हुए मनोज जारांगे पाटिल के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "नहीं, मैं खुद इन आरोपों को लेकर उलझन में हूं क्योंकि कल शाम मनोज दादा जारांगे पाटिल ने मुझसे बात की थी। उन्होंने मुझसे उन आरोपों और जवाबी आरोपों के बारे में चर्चा की, जो उन्होंने अपनी रैली के दौरान लगाए थे। मैंने उन्हें यह भी स्पष्ट कर दिया था कि अगर उनके पास कोई सबूत है, तो मैं खुद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके एकनाथ शिंदे साहब का पक्ष साफ कर दूंगा। आज जब रैली हुई, तो एक बिल्कुल अलग ही मुद्दा सामने आ गया। उनके आसपास के लोग उन्हें गलत जानकारी दे रहे हैं, लेकिन इससे भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के बीच कोई तनाव पैदा नहीं होगा।"
वहीं, मंत्री प्रताप सरनाईक ने भी जारांगे पाटिल के बदले हुए रुख पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, "पहले मनोज जारांगे को एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता था जो आम मराठा समुदाय के लिए काम करते थे, और सच कहें तो, उनका रुख मराठा समुदाय के सभी कार्यकर्ताओं और सदस्यों को सही लगता था। लेकिन, अब वे जिस तरह के बयान दे रहे हैं, उससे ऐसा लगता है मानो वे महा विकास अघाड़ी के नेताओं की ओर से बोल रहे हों। उन्हें अपना राजनीतिक रुख स्पष्ट करना चाहिए।"
उधर, शिवसेना नेता दीपक केसरकर ने दशहरा रैली के महत्व पर बात की। उन्होंने कहा, "बालासाहेब ने हमें सिखाया था कि हमारे प्रयासों का 80 प्रतिशत हिस्सा समाज सेवा में और केवल 20 प्रतिशत राजनीति में लगना चाहिए, यानी समाज की हर संभव मदद करनी चाहिए। मुझे लगता है कि आज की सभा में एकनाथ उन किसानों के लिए राहत उपायों की घोषणा कर सकते हैं जो अभी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं क्योंकि वे हमेशा गरीबों के बारे में सोचते हैं और बालासाहेब की विचारधारा को आगे बढ़ाते हैं।"
शिवसेना सांसद ज्योति वाघमारे ने कहा, "हम यहां शिवसेना की दशहरा रैली मनाने आए हैं। एक तरफ, हम 'हिंदू हृदय सम्राट' बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी मना रहे हैं। दूसरी तरफ, हम शिवसेना के 60 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं। हालांकि, आज यहां दुख की छाया भी दिखाई दे रही है क्योंकि महाराष्ट्र के किसान बारिश की कमी और सूखे का सामना कर रहे हैं।"
--आईएएनएस
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