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महाराष्ट्र के 21 जिलों में सूखे जैसे हालात, किसानों की स्थिति का सर्वे जारी: संजय निरुपम

महाराष्ट्र के 21 जिलों में सूखे जैसे हालात, किसानों की स्थिति का सर्वे जारी: संजय निरुपम
महाराष्ट्र के 21 जिलों में सूखे जैसे हालात, किसानों की स्थिति का सर्वे जारी: संजय निरुपम

मुंबई, 24 सितंबर (आईएएनएस)। शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने महाराष्ट्र में कम बारिश के कारण कई जिलों में बने सूखे जैसे हालात, राम मंदिर में नए नियम और आईआईटी बॉम्बे के छात्र मामले को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की स्थिति का सर्वे करा रही है और शनिवार तक सूखे को लेकर नोटिफिकेशन जारी होने की उम्मीद है। वहीं, राम मंदिर में नए नियमों को उन्होंने पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में जरूरी कदम बताया।

संजय निरुपम ने कहा कि महाराष्ट्र के 21 जिलों में कम बारिश की वजह से सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। राज्य सरकार ने स्थिति का विस्तृत सर्वे शुरू किया है। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री समेत सभी मंत्रियों को अपने-अपने जिलों में सर्वे के लिए भेजा गया है। सरकार किसानों के साथ खड़ी है और खेत-खलिहान तक जाकर स्थिति का जायजा लिया जा रहा है। मुख्यमंत्री की घोषणा के मुताबिक शनिवार तक सूखे को लेकर नोटिफिकेशन जारी हो जाएगा। इसके बाद किसानों की अपेक्षाओं के अनुरूप राहत कार्य शुरू किए जाएंगे।

राम मंदिर ट्रस्ट के नए सीईओ की ओर से बनाए गए नए नियमों पर संजय निरुपम ने कहा कि ये कदम जरूरी हैं। उन्होंने मंदिर में चंदे और चढ़ावे को लेकर सामने आए मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे मंदिर की छवि को नुकसान पहुंचा और श्रद्धालुओं को भी चोट पहुंची। उन्होंने कहा कि राम मंदिर में देशभर से श्रद्धालु भक्ति और श्रद्धा के साथ चढ़ावा देते हैं। ऐसे में उनकी अपेक्षा है कि चंदे और चढ़ावे में किसी तरह की बेईमानी न हो। नए सीईओ को मंदिर की बदनामी दूर करने के लिए ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे कर्मचारियों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखी जा सके और श्रद्धालुओं के चढ़ावे की पारदर्शिता सुनिश्चित हो।

आईआईटी बॉम्बे के छात्र के आत्महत्या मामले पर निरुपम ने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। अभी यह मान लेना उचित नहीं है कि छात्र ने नकल की थी। मामले में संस्थान की ओर से पहले नकल से जुड़ा एक नैरेटिव सामने आया, लेकिन बाद में कार्रवाई वापस ली गई और माफी भी मांगी गई। इसके बाद छात्रों में आक्रोश पैदा हुआ और पिछले करीब एक सप्ताह से धरना-प्रदर्शन चल रहा है। छात्रों को जाति के आधार पर समाज में बांटना उचित नहीं है। साथ ही, उन्होंने प्रोफेसर पर जाति विशेष के छात्रों को परेशान करने के आरोपों का भी जिक्र किया और कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

निरुपम ने आईआईटी बॉम्बे को देश का प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थान बताते हुए कहा कि वहां की घटनाओं के कारण पूरे संस्थान की छवि खराब नहीं होनी चाहिए। शिक्षकों की भावनाओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए, लेकिन छात्रों पर भी अनुचित दबाव नहीं होना चाहिए। मामले की जांच के दौरान ऐसा नहीं होना चाहिए कि नकल की प्रवृत्ति को किसी प्रकार का संरक्षण मिल जाए।

--आईएएनएस

पीएसके

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