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'महाराष्ट्र दिवस' का विरोध, विदर्भ राज्य की मांग के साथ प्रर्शनकारियों ने नागपुर में किया हंगामा

नागपुर, 1 मई (आईएएनएस)। महाराष्ट्र में 'राज्य स्थापना दिवस' मनाया जा रहा है। इस बीच नागपुर में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन देखने को मिला है। अलग विदर्भ राज्य की मांग करते हुए कई युवा नागपुर में सड़क पर उतरे और जबरदस्त हंगामा किया। हालांकि, पुलिस ने स्थिति को संभालते हुए प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।
'महाराष्ट्र दिवस' का विरोध, विदर्भ राज्य की मांग के साथ प्रर्शनकारियों ने नागपुर में किया हंगामा

नागपुर, 1 मई (आईएएनएस)। महाराष्ट्र में 'राज्य स्थापना दिवस' मनाया जा रहा है। इस बीच नागपुर में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन देखने को मिला है। अलग विदर्भ राज्य की मांग करते हुए कई युवा नागपुर में सड़क पर उतरे और जबरदस्त हंगामा किया। हालांकि, पुलिस ने स्थिति को संभालते हुए प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

विदर्भ राज्य की मांग करने वाले प्रदर्शनकारियों ने शुक्रवार सुबह नागपुर के संविधान चौक पर हंगामा शुरू। काले झंडे लहराते हुए और काले गुब्बारे छोड़कर, उन्होंने 'महाराष्ट्र दिवस' के विरोध में प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारी अचानक अलग-अलग दिशाओं से संविधान चौक पर जमा हो गए और अपने साथ लाए काले झंडे लहराने लगे। इसी बीच, कुछ कार्यकर्ताओं ने हवा में काले गुब्बारे छोड़ दिए। इस अचानक हुए प्रदर्शन के कारण पुलिस को स्थिति संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। हालांकि, बाद में पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और वाहनों में बिठाकर वहां से ले गई।

महाराष्ट्र में अलग विदर्भ राज्य बनाने की मांग लंबे समय से उठ रही है। गौरतलब है कि एक लंबे आंदोलन के बाद आज के दिन ही 1960 में 'बॉम्बे राज्य' का विभाजन होकर नए महाराष्ट्र का गठन हुआ था। 'बॉम्बे राज्य' से महाराष्ट्र के अलावा गुजरात भी बना था। अलग गुजरात और महाराष्ट्र की मांग को लेकर भाषाई आधार पर दोनों तरफ के लोगों ने आंदोलन शुरू किए थे। कुछ मामलों में आंदोलन हिंसा तक भी पहुंच गया।

अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों की बढ़ती गति को देखते हुए तत्कालीन सरकार ने बॉम्बे पुनर्गठन अधिनियम तैयार करने का निर्णय लिया था। संसद में विधेयक प्रस्तुत होने के बाद यह कानून बन गया। 1 मई, 1960 को यह कानून लागू हुआ और गुजरात व महाराष्ट्र को बॉम्बे राज्य से अलग कर दिया गया। तब से, 1 मई को गुजरात और महाराष्ट्र स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। हालांकि, विदर्भ क्षेत्र खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है।

--आईएएनएस

डीसीएच/

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