महाशिवरात्रि से पहले सोशल मीडिया पर छाया ‘महाकाली-काल भैरव’ डांस, भक्तिभाव में डूबे लोग
सोशल मीडिया की दुनिया में हर दिन सैकड़ों वीडियो वायरल होते हैं, लेकिन इन दिनों एक ऐसी प्रस्तुति ने इंटरनेट पर अलग ही छाप छोड़ दी है, जिसे देखकर लोग भक्ति भाव से भर उठे हैं। 54 सेकंड की एक छोटी-सी वीडियो क्लिप में महाकाली और काल भैरव के दिव्य स्वरूपों को जीवंत करती नृत्य प्रस्तुति ने दर्शकों के बीच आध्यात्मिक लहर पैदा कर दी है।
वायरल वीडियो में कलाकारों ने मां काली और काल भैरव का रूप धारण कर शक्तिशाली भाव-भंगिमाओं और ऊर्जावान नृत्य के जरिए मंच पर अद्भुत वातावरण बना दिया। पारंपरिक वेशभूषा, प्रभावशाली मेकअप और तीव्र संगीत के साथ प्रस्तुत यह डांस लोगों को मंत्रमुग्ध कर रहा है। कई यूजर्स इसे ‘महाशिवरात्रि का असली आशीर्वाद’ बता रहे हैं।
हिंदू मान्यता के अनुसार महाकाली शक्ति और विनाश की देवी मानी जाती हैं, जबकि काल भैरव भगवान शिव का उग्र स्वरूप हैं। इन दोनों दिव्य शक्तियों का संगम जब मंच पर सजीव रूप में प्रस्तुत हुआ, तो दर्शकों ने इसे सिर्फ एक परफॉर्मेंस नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अनुभव बताया।
वीडियो में कलाकारों की आंखों के भाव, हाथों की मुद्राएं और शरीर की गतियां इतनी प्रभावशाली हैं कि देखने वालों को कुछ क्षण के लिए वास्तविकता और मंच के बीच का अंतर मिटता हुआ महसूस होता है। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने कमेंट में लिखा कि “ऐसा लगा मानो सच में देवी-देवता अवतरित हो गए हों।” वहीं कुछ लोगों ने इसे संस्कृति और परंपरा से जुड़ी कला का शानदार उदाहरण बताया।
इस वीडियो को हजारों बार शेयर किया जा चुका है और अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर इसे जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। विशेष रूप से महाशिवरात्रि के करीब आने के कारण इसकी लोकप्रियता और भी बढ़ गई है। महाशिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित प्रमुख पर्व है, जिसे देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया के दौर में इस तरह की सांस्कृतिक और धार्मिक प्रस्तुतियां लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करती हैं। तेज रफ्तार जिंदगी के बीच जब ऐसी आध्यात्मिक झलक सामने आती है, तो वह लोगों के मन में शांति और श्रद्धा का भाव जगाती है।
फिलहाल यह 54 सेकंड का वीडियो इंटरनेट पर भक्ति, कला और संस्कृति का संगम बनकर छाया हुआ है। इसे देखने वाले न सिर्फ कलाकारों की प्रतिभा की सराहना कर रहे हैं, बल्कि इसे महाशिवरात्रि से पहले मिला एक आध्यात्मिक उपहार भी बता रहे हैं।

