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मदरसों में 'वंदे मातरम' की अनिवार्यता से बच्‍चों में राष्‍ट्रीयता की भावना जागृत होगी : विनोद बंसल

नई दिल्ली, 21 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा मदरसों में 'वंदे मातरम' गाना अनिवार्य किए जाने के फैसले को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने स्वागतयोग्य बताया है। उन्होंने कहा कि इससे बंगाल के बच्चों में राष्ट्रीयता का भाव जागृत होने के साथ ही संस्कृति के प्रति लगाव बढ़ेगा।
मदरसों में 'वंदे मातरम' की अनिवार्यता से बच्‍चों में राष्‍ट्रीयता की भावना जागृत होगी : विनोद बंसल

नई दिल्‍ली, 21 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा मदरसों में 'वंदे मातरम' गाना अनिवार्य किए जाने के फैसले को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने स्‍वागतयोग्‍य बताया है। उन्‍होंने कहा कि इससे बंगाल के बच्‍चों में राष्‍ट्रीयता का भाव जागृत होने के साथ ही संस्‍कृति के प्रति लगाव बढ़ेगा।

विनोद बंसल ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि यह बहुत खुशी की बात है, और इन चरणबद्ध उपायों को उठाने के लिए सुवेंदु सरकार तारीफ की हकदार है। पहले, इसे सरकारी स्कूलों के लिए अनिवार्य किया गया था, और अब मदरसों में भी सभी बच्चे अपने दिन की शुरुआत वंदे मातरम गाकर करेंगे।

उन्‍होंने कहा कि बच्‍चे इस नई राष्ट्रीय ऊर्जा के साथ शुरुआत करेंगे, जिसका सृजन उनके अपने ही पूर्वजों ने बंगाल की पवित्र धरती पर किया था। इससे राष्‍ट्रीयता का भाव जागृत होगा, बच्‍चों में संस्‍कार आने के साथ ही संस्‍कृति के प्रति उनका लगाव और प्‍यार बढ़ेगा। यह फैसला बहुत पहले हो जाना चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्‍य से पिछले 75 साल से जिस धरती पर वंदे मातरम का जन्‍म हुआ, वह उसी धरा पर बंधन में था। बंगाल का प्रत्‍येक छात्र एक नवीन ऊर्जा के साथ दिन की शुरुआत कर सकेगा।

विनोद बंसल ने गाय को राष्‍ट्रीय पशु घोषित करने के कुछ मुसलमानों के विरोध पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्‍होंने कहा कि जैसे-जैसे बकरीद नजदीक आ रही है, कुछ जिहादी तत्व लगातार हिंदू समुदाय की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। एक मौलाना कुछ कहता है, तो दूसरा कुछ और। अलग-अलग मौलानाओं के अलग-अलग बयान हैं।

उन्‍होंने कहा कि कोई कहता है कि गाय की कुर्बानी नहीं होनी चाहिए, जबकि दूसरा कहता है कि नहीं, हम कुर्बानी जरूर देंगे। हम इन लोगों को बहुत ही साफ और सीधे शब्दों में चेतावनी दे रहे हैं। हिंदू समुदाय की भावनाओं, इस देश की संस्कृति और राष्ट्रीय गौरव, तथा गौ माता के प्रति सम्मान और प्रेम को चुनौती देने की हिम्मत न करें। इसके परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैं।

--आईएएनएस

एएसएच/एबीएम

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