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मद्रास हाईकोर्ट ने नगर प्रशासन विभाग में नियुक्ति और टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता पर दिया केस दर्ज करने का निर्देश

चेन्नई, 20 फरवरी (आईएएनएस)। नगर प्रशासन विभाग में नियुक्तियों और टेंडर प्रक्रियाओं में अनियमितताओं के मामले सामने आने के बाद मद्रास उच्च न्यायालय ने विजिलेंस और एंटी-करप्शन विभाग को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों के आधार पर केस दर्ज करने का निर्देश दिया है।
मद्रास हाईकोर्ट ने नगर प्रशासन विभाग में नियुक्ति और टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता पर दिया केस दर्ज करने का निर्देश

चेन्नई, 20 फरवरी (आईएएनएस)। नगर प्रशासन विभाग में नियुक्तियों और टेंडर प्रक्रियाओं में अनियमितताओं के मामले सामने आने के बाद मद्रास उच्च न्यायालय ने विजिलेंस और एंटी-करप्शन विभाग को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों के आधार पर केस दर्ज करने का निर्देश दिया है।

न्यायालय का मानना ​​है कि नगर प्रशासन विभाग में नियुक्तियों और टेंडर प्रक्रियाओं में अनियमितताओं के प्रथम दृष्टया प्रमाण मौजूद हैं।

प्रवर्तन निदेशालय ने तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पत्र लिखकर मंत्री के.एन. नेहरू द्वारा तमिलनाडु नगर प्रशासन विभाग में नियुक्तियों के लिए रिश्वत लेने और टेंडरों के आवंटन में अनियमितताओं के आरोपों के संबंध में केस दर्ज करने का निर्देश दिया था।

इस पत्र के आधार पर एआईएडीएमके सांसद इनबादुराई और आदिनारायणन ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर मामले दर्ज करने के निर्देश देने की मांग की थी। इन याचिकाओं की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश एम.एम. श्रीवास्तव और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की बेंच ने की। सुनवाई के दौरान, प्रवर्तन निदेशालय ने बताया कि एक अन्य मामले की जांच के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्य डीजीपी को भेज दिए गए हैं और इस आधार पर मामले दर्ज करने के निर्देश जारी किया जाए।

तमिलनाडु सरकार की ओर से यह बताया गया कि प्रवर्तन निदेशालय का पत्र सरकार को भेज दिया गया है और सतर्कता एवं भ्रष्टाचार-विरोधी विभाग को जांच करने के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं। विजिलेंस और एंटी करप्शन विभाग को उक्त साक्ष्यों के आधार पर केस दर्ज करने का निर्देश दिया है।

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने कहा कि ईडी ने पर्याप्त सबूत पेश कर दिए हैं, इसलिए प्रारंभिक जांच की कोई आवश्यकता नहीं है। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जारी पत्रों में पर्याप्त सबूत होने का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने मामले दर्ज करने, जांच करने और कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

--आईएएनएस

सत्यम दुबे/वीसी

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