Madras High Court: करिअर के साथ घर की जिम्मेदारी पर कोर्ट की अहम टिप्पणी, पति के Homemaker बनने पर दिया जोर
Madras High Court: मद्रास हाई कोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान महिलाओं के करिअर और घरेलू जिम्मेदारियों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि बदलते सामाजिक माहौल में महिलाओं के करिअर पर ध्यान देने के साथ परिवार की जिम्मेदारी साझा करने की जरूरत भी बढ़ रही है.
जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस एमडी सुमति की बेंच ने कहा कि कई महिलाएं शादी के बाद करिअर में रुकावट आने की आशंका के चलते विवाह को टालने का फैसला करती हैं. कोर्ट ने सुझाव दिया कि घरेलू जिम्मेदारियों को केवल पत्नी की जिम्मेदारी मानने के बजाय पति भी ‘होममेकर’ की भूमिका निभा सकते हैं.
घर संभालना सिर्फ पत्नी की जिम्मेदारी नहीं
कोर्ट ने टिप्पणी की कि अगर एक महिला परिवार और घर की जिम्मेदारी संभाल सकती है, तो पति भी यह भूमिका निभा सकता है. अदालत के मुताबिक, बदलते सामाजिक परिवेश में पति-पत्नी के बीच घरेलू और पेशेवर जिम्मेदारियों का बंटवारा सामान्य बात बन सकता है.
कोर्ट की यह टिप्पणी एक ऐसे वैवाहिक विवाद के दौरान सामने आई, जिसमें पत्नी ने परिवार की देखभाल के साथ अपने पति के करिअर को भी सहयोग दिया था.
पत्नी और बच्चों के लिए आर्थिक राहत
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने विवाह को समाप्त करने का आदेश दिया. अदालत ने पत्नी को 1.5 करोड़ रुपये और दोनों बच्चों को 50-50 लाख रुपये देने का निर्देश दिया.
इस मामले में अदालत ने वैवाहिक संबंधों के साथ-साथ परिवार के भीतर जिम्मेदारियों और आर्थिक योगदान के पहलुओं पर भी विचार किया.
बदल रही है पति-पत्नी की भूमिका
अदालत की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब परिवार और कामकाजी जीवन में पति-पत्नी की भूमिकाओं को लेकर सामाजिक बदलाव देखने को मिल रहे हैं. पारंपरिक रूप से घरेलू काम और बच्चों की देखभाल को महिलाओं से जोड़कर देखा जाता रहा है, लेकिन अब दोनों पार्टनर घरेलू और पेशेवर जिम्मेदारियों को साझा करने पर जोर दे रहे हैं.
कोर्ट की टिप्पणी का मूल संदेश यह था कि परिवार की जिम्मेदारी किसी एक पार्टनर तक सीमित नहीं होनी चाहिए और परिस्थितियों के अनुसार पति-पत्नी दोनों अपनी भूमिकाएं तय कर सकते हैं.

