मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड विवाद: मौलाना सैफ अब्बास बोले- धार्मिक ट्रस्टों में समान नियम लागू करे सरकार
लखनऊ, 8 जुलाई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्य को शामिल किए जाने को लेकर मचे घमासान पर शिया धर्मगुरु मौलाना सैफ अब्बास ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वक्फ से जुड़े मामलों को बेहतर ढंग से एक मुसलमान ही समझ सकता है। यदि सरकार सभी धार्मिक ट्रस्टों में समान नियम लागू करती है और हिंदू ट्रस्टों में भी मुस्लिम सदस्यों को शामिल करती है, तो इसे समानता और संविधान की भावना के अनुरूप कदम माना जा सकता है।
लखनऊ में आईएएनएस से बातचीत में मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्य को शामिल किए जाने का सभी मुस्लिम संगठनों और समुदायों ने विरोध किया है। यह विरोध किसी धर्म विशेष के व्यक्ति से नहीं है, बल्कि वक्फ संस्थाओं की प्रकृति और उनके धार्मिक स्वरूप को लेकर है। हमें हिंदू भाइयों से कोई परेशानी नहीं है, लेकिन वक्फ की संपत्तियां, उनके नियम और उनसे जुड़े धार्मिक मामलों को एक मुसलमान ही बेहतर तरीके से समझ सकता है।
सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए मौलाना सैफ अब्बास ने अयोध्या के मंदिर ट्रस्ट से जुड़े विभिन्न विवादों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समय-समय पर निर्माण कार्यों में कथित कमीशन मांगने, जमीन खरीद-फरोख्त में अनियमितताओं और दान राशि से जुड़े आरोप सामने आए हैं। धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता और ईमानदारी सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए, क्योंकि ये करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ी होती हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि गोरखनाथ पीठ में लंबे समय से एक मुस्लिम कर्मचारी कार्यरत होने की बातें सामने आती रही हैं और यदि कोई व्यक्ति ईमानदारी और निष्ठा से अपना दायित्व निभाता है तो उसकी कार्यशैली को महत्व दिया जाना चाहिए, न कि केवल उसके धर्म को। सरकार को ऐसे लोगों को आगे लाना चाहिए जो धार्मिक संस्थानों में पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ काम करें। किसी भी धर्मस्थल या धार्मिक ट्रस्ट में भ्रष्टाचार की खबरें पूरे देश की प्रतिष्ठा को प्रभावित करती हैं और श्रद्धालुओं की आस्था को भी आघात पहुंचाती हैं।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में समानता का सिद्धांत लागू करना चाहती है तो केवल वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्य नियुक्त करने के बजाय सभी धार्मिक ट्रस्टों में समान व्यवस्था लागू करनी चाहिए। यदि हिंदू धार्मिक ट्रस्टों में भी मुस्लिम प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए और मुस्लिम धार्मिक ट्रस्टों में हिंदू सदस्यों की नियुक्ति की जाए, तभी इसे समानता और संविधान की भावना के अनुरूप कदम माना जा सकता है।
मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि केवल एकतरफा व्यवस्था लागू करना न्यायसंगत नहीं होगा। अगर हिंदू ट्रस्टों में मुसलमानों को भी स्थान दिया जाए और मुस्लिम ट्रस्टों में हिंदुओं को भी समान रूप से शामिल किया जाए, तो यह बराबरी होगी और संविधान के अनुरूप होगा। लेकिन यदि केवल मुस्लिम संस्थाओं में गैर-मुस्लिम सदस्य नियुक्त किए जाएं और दूसरी ओर ऐसा न हो, तो यह समानता नहीं बल्कि अन्याय होगा।
--आईएएनएस
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