स्वास्थ्य सेवाओं को ठेके पर देने में जुटी मध्य प्रदेश सरकार : उमंग सिंघार
भोपाल 17 जून (आईएएनएस) मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के मकसद से तीन जिलों के 18 स्वास्थ्य केद्रों को निजी हाथों में सौंपने के फैसले पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सवाल उठाया है।उनका आरोप है कि राज्य की मोहन यादव सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को ठेके पर देने में जुटी हुई है। दरअसल, राज्य सरकार ने ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए तीन जिलों के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रो का संचालन सार्वजनिक निजी भागीदारी मॉडल पर संचालित करने का फैसला किया है।
राज्य सरकार के फैसले पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार में सवाल उठाया है और सोशल मीडिया पर कहा है कि भाजपा सरकार अब मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को भी ठेके पर चढ़ाने में जुट गई है। उन्होंने कहा, प्रदेश सरकार ने रीवा, गुना और देवास के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) को आउटसोर्स मॉडल पर संचालित करने का निर्णय लिया है। निजी कंपनियां डॉक्टरों की नियुक्ति से लेकर मरीजों के इलाज तक का काम संभालेंगी और यह प्रयोग सफल रहा तो इसे 277 सीएचसी तक बढ़ाया जाएगा।
उमंग सिंघार ने कहा कि भाजपा सरकार आखिर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के बजाय उन्हें धीरे-धीरे निजी हाथों में क्यों सौंप रही है? नेता प्रतिपक्ष ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि पहले भर्ती नहीं करो, फिर अस्पतालों को कमजोर करो और अंत में निजीकरण को समाधान बताकर जनता के सामने परोस दो, यही भाजपा स्वास्थ्य मॉडल है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण, गरीब, आदिवासी और वंचित वर्ग सरकारी अस्पतालों पर निर्भर है। लेकिन भाजपा सरकार स्वास्थ्य सेवा को अधिकार नहीं, कारोबार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। आज 18 सीएचसी, कल 277 और फिर पूरा स्वास्थ्य तंत्र निजी हाथों में, क्या यही भाजपा का स्वास्थ्य विजन है? मुख्यमंत्री से स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण नहीं, सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की भर्ती, संसाधनों का विस्तार और जवाबदेही चाहिए। प्रदेश की जनता इलाज मांग रही है, ठेकेदारी नहीं।
--आईएएनएस
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