मध्य प्रदेश सरकार 9 मेडिकल कॉलेज को निजी हाथों को सौंपने की तैयारी में: माकपा
भोपाल, 17 सितंबर (आईएएनएस)। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। पार्टी का आरोप है कि राज्य सरकार नौ सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय को निजी हाथों में सौंपने जा रही है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने कहा कि बालाघाट में ढाई दर्जन से अधिक आदिवासी बच्चों की मृत्यु, शिवपुरी और उसके बाद रीवा अस्पताल में हुई दर्दनाक मौत ने सरकार की संवेदनहीनता और सरकारी स्वास्थ्य ढांचे को बेपर्दा कर दिया है। इसे सुधारने, चिकित्सकों के रिक्त पदों को भरने, अस्पतालों को सुविधा संपन्न बनाने और दवाओं की उचित व्यवस्था करने की बजाय सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को ही निजी हाथों में सौंप देना चाहती है।
माकपा नेता ने आरोप लगाया है कि चार हजार करोड़ रुपए खर्च करने के बाद तैयार प्रदेश के नौ मेडिकल कॉलेज निजी हाथों को सौंपने की कोशिश कर रही है। यह कॉलेज नीमच, सिंगरौली, श्योपुर, मंडला, राजगढ़, बुदनी, दमोह, और छतरपुर के मेडिकल कॉलेज शामिल है। इन कॉलेजों के निर्माण पर और अन्य संसाधन जुटाने पर चार हजार करोड़ का सरकारी खजाने से खर्च कर अब इसे निजी हाथों को देने जा रही है।
उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार की ओर से यह कोशिश पहली बार नहीं हो रही है, बल्कि इससे पहले भी मोहन यादव की सरकार बनते ही 11 जिला अस्पतालों को पीपीपी मोड पर चलाने की घोषणा की थी, लेकिन जनता के विरोध के चलते सरकार को अपने कदम पीछे खींचने पड़े थे।
इससे पहले शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने 2021 में वर्तमान मुख्यमंत्री के गृह नगर उज्जैन के मेडिकल कॉलेज को पीपीपी मोड पर चलाने की घोषणा की थी, लेकिन विरोध के कारण सरकार को तब भी निर्णय वापस लेना पड़ा था। अभी कुछ महीने पहले ही सरकार ने तीन जिलों के 19 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के निजीकरण का निर्णय लिया है, जिसका लगातार विरोध हो रहा है।
जसविंदर सिंह ने कहा कि कोविड के दौरान प्रदेश की जनता ने देखा है कि कैसे प्राइवेट नर्सिंग होम या तो बंद हो गए थे या लूट कर रहे थे। तब सरकारी अस्पतालों ने ही जनता को महामारी से बचाया था। अब भाजपा सरकार सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण कर जनता का जीवन ही दांव पर लगा रही है।
--आईएएनएस
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