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मध्य प्रदेश में राज्यसभा उम्मीदवार का नामांकन निरस्त होने पर कांग्रेस कार्यकर्ता निराशा में

भोपाल, 13 जून (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में लंबे समय से सत्ता से बाहर कांग्रेस लगातार संगठन को मजबूत करने के साथ जमीनी कार्यकर्ता को उत्साहित करने के प्रयास कर रही है मगर समय-समय पर लगने वाले झटके कांग्रेस को मजबूत नहीं होने दे रहे। राज्यसभा के चुनाव में पार्टी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन निरस्त होने और चुनाव आयोग तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दलील को खारिज किए जाने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में गहरी निराशा जाने का अंदेशा सताने लगा है।
मध्य प्रदेश में राज्यसभा उम्मीदवार का नामांकन निरस्त होने पर कांग्रेस कार्यकर्ता निराशा में

भोपाल, 13 जून (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में लंबे समय से सत्ता से बाहर कांग्रेस लगातार संगठन को मजबूत करने के साथ जमीनी कार्यकर्ता को उत्साहित करने के प्रयास कर रही है मगर समय-समय पर लगने वाले झटके कांग्रेस को मजबूत नहीं होने दे रहे। राज्यसभा के चुनाव में पार्टी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन निरस्त होने और चुनाव आयोग तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दलील को खारिज किए जाने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में गहरी निराशा जाने का अंदेशा सताने लगा है।

राज्य की सियासत पर गौर करें तो लगभग ढाई दशक के समय में एक ऐसा वक्त भी आया जब कांग्रेस को राज्य की सत्ता संभालने का मौका मिला मगर आपसी खींचतान के चलते यह सरकार पूरा कार्यकाल ही नहीं कर पाई । सत्ता गंवाने के बावजूद कांग्रेस के भीतरी हालात बहुत ज्यादा नहीं बदले हैं, हां पार्टी ने वर्ष 2023 की विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन जरूर कर दिया था।

हाल के घटनाक्रम ने तो कांग्रेस पर बड़ा प्रहर कर दिया है, राज्य की तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना था, विधायकों की संख्या बल के आधार पर भाजपा के दो और कांग्रेस के एक उम्मीदवार का निर्वाचित होना तय था। भाजपा ने संख्या बल के बाद आधार पर अपने दो उम्मीदवार तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल के नामांकन पत्र दाखिल कर दिए।अब बारी कांग्रेस की थी तो कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया।

इसके बाद कांग्रेस के अंदरखाने खींचतान शुरू हुई और भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार के तौर पर महेश केवट को मैदान में उतार दिया। यह स्थिति यहां कांग्रेस को चिंता में डाल देने वाली थी। फिर क्या था पार्टी ने विधायकों को कर्नाटक ले जाने की तैयारी की, वहीं दूसरी ओर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के संपर्क में कांग्रेस के कई विधायक आने लगे और इससे भाजपा को यह भरोसा होने लगा कि उसका तीसरा उम्मीदवार हर हाल में जीतेगा।

इसी बीच मीनाक्षी नटराजन के नामांकन में एक बड़ी चूक यह हुई कि तेलंगाना में दर्ज मामले का उल्लेख नहीं किया गया, परिणाम स्वरूप नामांकन पत्र निरस्त हो गया।पार्टी ने चुनाव आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन सफलता नहीं मिली । इस घटनाक्रम से भाजपा उत्साहित है और पार्टी ने तो प्रदेश दफ्तर में विजय उत्सव तक मनाया । वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में गहरी निराशा छाई हुई है, अंदरखाने से यह सवाल भी उठ रहा है क्या वाकई में यह चूक हुई है या पार्टी के भीतर ही षड्यंत्र रचा गया है, क्योंकि भाजपा यही प्रचारित कर रही है कि कांग्रेस को हार नजर आ रही थी और इसीलिए उसने नामांकन निरस्त कराने का षड्यंत्र रचा।

--आईएएनएस

एसएनपी/पीएम

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