मध्य प्रदेश में मातृ मृत्यु दर में 38 अंकों की गिरावट, सीएम बोले-सरकार इस मामले में संवेदनशील
भोपाल, 22 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में मां और शिशु के लिए संचालित विभिन्न योजना के परिणाम स्वरूप मातृ मृत्यु दर में 38 अंकों की गिरावट आई है। इसे बड़ी उपलब्धि करार देते हुए राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि सरकार मां और शिशु के मामले में संवेदनशील है।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। हर मां और हर नवजात का सुरक्षित जीवन सुनिश्चित करना हमारी सरकार का संकल्प है। स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार, आधुनिक तकनीक के उपयोग और जमीनी स्तर तक सेवाओं की पहुंच के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। उन्होंने एसआरएस सर्वे में उल्लेखनीय प्रगति को रेखांकित करते हुए स्वास्थ्य अमले को बधाई दी है एवं सतत प्रयास करते रहने का आह्वान किया है।
उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए सतत प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर में आई ऐतिहासिक गिरावट स्वास्थ्य तंत्र की प्रतिबद्धता, जमीनी स्तर पर कार्यरत अमले की मेहनत और आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली का परिणाम है। दरअसल भारत सरकार के सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार देश में मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) 2018–20 के 97 से घटकर 2022–24 में 87 प्रति एक लाख जीवित जन्म पर आ गया है। मध्य प्रदेश ने इस दिशा में राष्ट्रीय औसत से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है।
प्रदेश का एमएमआर 2018–20 में 173 था, जो 2022–24 में घटकर 135 रह गया है। यह 38 अंकों यानी लगभग 22 प्रतिशत की गिरावट है, जो राष्ट्रीय औसत से दोगुनी से भी अधिक है। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, प्रशिक्षित डॉक्टरों एवं स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने और आपातकालीन प्रसूति सेवाओं के विस्तार से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए है।
राज्य सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लगातार प्रयास किया जा रहे हैं इसी क्रम में प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना को लगातार सुदृढ़ किया गया है। प्रसव केंद्रों, प्रसूति गहन देखभाल इकाइयों (ऑब्सटेट्रिक एचडीयू), एफआरयू और सीईमॉनसी सुविधाओं का विस्तार किया गया है।
ब्लड स्टोरेज यूनिट्स की स्थापना और रेफरल परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने से गर्भवती महिलाओं को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो रहा है। तकनीक आधारित स्वास्थ्य सेवाओं ने भी मातृ मृत्यु दर में कमी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
--आईएएनएस
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