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मध्य प्रदेश में करोड़ों कमाने वाली मंडियों में सुविधाओं का टोटा : जीतू पटवारी

मध्य प्रदेश में करोड़ों कमाने वाली मंडियों में सुविधाओं का टोटा : जीतू पटवारी
मध्य प्रदेश में करोड़ों कमाने वाली मंडियों में सुविधाओं का टोटा : जीतू पटवारी

भोपाल, 21 अगस्त (आईएएनएस) मध्य प्रदेश की मंडियों में व्याप्त अव्यवस्थाओं को लेकर कांग्रेस ने बड़ा हमला बोला है । कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि जो मंडियां करोड़ों रुपए कमा रही हैं मगर उनमें किसानों के लिए सुविधाएं नहीं है। कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर प्रदेश की मंडियों में किसानों के लिए उपलब्ध सुविधाओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की 110 मंडियां ऐसी हैं, जिनकी वार्षिक आय तीन करोड़ रुपये से अधिक है, लेकिन इन मंडियों में किसानों के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश मंडी बोर्ड के अनुसार मंडियों का वर्गीकरण मंडी शुल्क और अनुज्ञप्ति शुल्क से होने वाली आय के आधार पर किया जाता है। यानी जिस मंडी की आय जितनी अधिक होती है, उसकी आर्थिक क्षमता भी उतनी ही अधिक मानी जाती है लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई देती है।

उन्होंने कहा कि राघौगढ़ मंडी में किसानों के लिए स्वच्छ पेयजल और कैंटीन तक उपलब्ध नहीं है। सीधी की नई सब्जी मंडी में सड़क, शौचालय और गोदाम जैसी आवश्यक सुविधाएं अधूरी हैं। वहीं सबलगढ़ मंडी में छाया, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव की खबरें सामने आ चुकी हैं।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पटवारी ने कहा कि मंडी शुल्क वसूलते समय किसान सरकार के लिए राजस्वदाता दिखाई देता है, लेकिन जब किसान को सुविधाएं देने की बारी आती है तो वही किसान सरकार की प्राथमिकता से गायब हो जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्वयं मंडियों की मूलभूत सुविधाओं और पुरानी संरचनाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए प्रस्ताव मांगे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की आय अर्जित करने वाली मंडियों में किसान आज भी पीने के पानी, छाया, शौचालय, सड़क, बैठने की जगह और अपनी उपज को सुरक्षित रखने जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए क्यों परेशान है?

जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि प्रदेश की सभी मंडियों की आय, व्यय और उपलब्ध सुविधाओं का मंडीवार सार्वजनिक ऑडिट कराया जाए। साथ ही, 3 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक आय वाली प्रदेश की 110 मंडियों के लिए समयबद्ध मूलभूत सुविधा सुधार योजना घोषित की जाए, ताकि किसानों को मंडी में अपनी उपज बेचने के दौरान सम्मानजनक और आवश्यक सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने कहा कि किसानों से शुल्क लेकर उन्हें बदहाल मंडियां देना किसान कल्याण नहीं, बल्कि किसान की कमाई पर सरकारी उपेक्षा का टैक्स है।

--आईएएनएस

एसएनपी पीएम

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