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मध्य प्रदेश में बंधुआ मजदूरी रोकने के लिए चलेगा अभियान

भोपाल, 7 फरवरी (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में बंधुआ मजदूरी रोकने के लिए 9 फरवरी से विशेष अभियान शुरू किया जा रहा है। इस अभियान के तहत उन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी जो बंधुआ मजदूरी कराते हैं। आधिकारिक तौर पर दी गई जानकारी में बताया गया है कि श्रम विभाग ने 9 फरवरी को बंधक श्रम उन्मूलन दिवस पर राजधानी के कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेन्शन सेंटर (मिंटो हॉल) में कार्यशाला का आयोजन किया है।
मध्य प्रदेश में बंधुआ मजदूरी रोकने के लिए चलेगा अभियान

भोपाल, 7 फरवरी (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में बंधुआ मजदूरी रोकने के लिए 9 फरवरी से विशेष अभियान शुरू किया जा रहा है। इस अभियान के तहत उन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी जो बंधुआ मजदूरी कराते हैं। आधिकारिक तौर पर दी गई जानकारी में बताया गया है कि श्रम विभाग ने 9 फरवरी को बंधक श्रम उन्मूलन दिवस पर राजधानी के कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेन्शन सेंटर (मिंटो हॉल) में कार्यशाला का आयोजन किया है।

इस कार्यक्रम में श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल उपस्थित रहेंगे और कार्यशाला में राज्य स्तरीय एक्शन प्लान का विमोचन भी होगा। बताया गया है कि बंधक श्रम (बंधुआ मजदूरी) कराने वालों के विरुद्ध मध्य प्रदेश का श्रम विभाग 9 फरवरी को बंधक श्रम उन्मूलन दिवस से विशेष अभियान भी शुरू करने जा रहा है।

बता दें कि श्रम विभाग ने बाल एवं बंधक श्रम को रोकने और जागरूकता लाने के लिए एक विशेष वेदा पहल की शुरुआत की है। बताया गया है कि राजधानी में होने वाली कार्यशाला में बाल एवं कुमार श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत राज्य एक्शन प्लान के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा होगी। इसमें अधिनियम के अंतर्गत निरीक्षण, पहचान, बचाव एवं पुनर्वास की प्रक्रिया पर चर्चा की जाएगी।

बंधुआ श्रम (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के क्रियान्वयन के 50 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर अधिनियम की उपलब्धियों एवं वर्तमान चुनौतियों पर विचार किया जाएगा। इसके साथ ही नई चार श्रम संहिताओं के माध्यम से श्रमिकों, विशेषकर महिलाओं के अधिकारों, सुरक्षा एवं सामाजिक संरक्षण से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी।

राज्य एक्शन प्लान के माध्यम से विभागीय समन्वय, प्रवर्तन व्यवस्था एवं जनजागरूकता को सुदृढ़ करने की रणनीति प्रस्तुत की जाएगी। श्रम विभाग के अनुसार, कार्यशाला का उद्देश्य कानून, नीति और जमीनी क्रियान्वयन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है, ताकि राज्य में बाल एवं बंधुआ श्रम के उन्मूलन की दिशा में प्रभावी और ठोस परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।

--आईएएनएस

एसएनपी/डीकेपी

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