मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में
भोपाल, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के जबलपुर उच्च न्यायालय द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग को 14 से बढ़कर 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के फैसले को खारिज किए जाने के बाद राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने का मन बना रही है। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नई दिल्ली में विधि विशेषज्ञों से चर्चा की । दरअसल राज्य की तत्कालीन कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने ओबीसी को दिए जाने वाले आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़कर 27 प्रतिशत कर दिया था।
यह मामला जबलपुर उच्च न्यायालय में गया, जहां हाल ही में न्यायालय ने इस फैसले को खारिज कर दिया। इस मामले पर सियासत भी खूब गरमाई। जबलपुर उच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद भाजपा और सरकार लगातार यही कहती रही है कि आगे कानूनी परामर्श लेकर कदम बढ़ाए जाएगा।
इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंगलवार को नई दिल्ली में भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता एवं प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के साथ ओबीसी आरक्षण को लेकर उच्च न्यायालय के निर्णय से जुड़े विधिक पहलुओं और आगामी कानूनी कार्यवाही की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की।
दरअसल मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 9 अक्टूबर 2026 को दिए गए अपने फैसले में सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में ओबीसी आरक्षण को 27 प्रतिशत करने के तत्कालीन कमलनाथ सरकार द्वारा 2019 के कानून को असंवैधानिक करार दिया और इसे वापस 14 प्रतिशत तक सीमित कर दिया था।
न्यायालय ने इंदिरा साहनी केस का भी जिक्र किया था साथ ही आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से ज्यादा होने की भी बात कही थी । सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करने और उस पर अंतरिम रोक लगाने की मांग करने पर विचार कर रही है।
उच्च न्यायालय जबलपुर का फैसला आने के बाद कांग्रेस में राज्य की मोहन यादव सरकार पर आरोप लगाया था कि सरकार ने ओबीसी को उसका हक दिलाने के लिए मजबूती से तर्क और तथ्य नहीं रखें, जबकि भाजपा की ओर से कहा गया कि जो अध्यादेश कांग्रेस लेकर आई थी वह बहुत ही कमजोर था और उसी के कारण ओबीसी को हक नहीं मिल पा रहा है।
--आईएएनएस
एसएनपी/पीएम

