Samachar Nama
×

लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर संगोष्ठी, संरक्षण और सतत विकास पर जोर

लखनऊ, 22 मई (आईएएनएस)। अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर शुक्रवार को लखनऊ स्थित नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान के सारस प्रेक्षागृह में आयोजित संगोष्ठी में जैव विविधता संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन पर व्यापक चर्चा हुई। कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘वैश्विक प्रभाव के लिए स्थानीय स्तर पर कार्य करना’ रहा, जिसमें विशेषज्ञों ने चेताया कि जैव विविधता क्षरण भविष्य की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।
लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर संगोष्ठी, संरक्षण और सतत विकास पर जोर

लखनऊ, 22 मई (आईएएनएस)। अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर शुक्रवार को लखनऊ स्थित नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान के सारस प्रेक्षागृह में आयोजित संगोष्ठी में जैव विविधता संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन पर व्यापक चर्चा हुई। कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘वैश्विक प्रभाव के लिए स्थानीय स्तर पर कार्य करना’ रहा, जिसमें विशेषज्ञों ने चेताया कि जैव विविधता क्षरण भविष्य की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।

प्रदेश के वन, पर्यावरण, जन्तु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि जैव विविधता केवल एक वैज्ञानिक अवधारणा नहीं, बल्कि मानव जीवन की आधारशिला है।

उन्होंने कहा कि भोजन, औषधि, पशु उत्पाद, पर्यटन और आजीविका सहित जीवन की लगभग हर आवश्यकता जैव संसाधनों पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि यदि जैव विविधता समाप्त होती है तो मानव जीवन न केवल नीरस हो जाएगा, बल्कि अस्तित्व पर भी संकट खड़ा हो जाएगा।

डॉ. सक्सेना ने कहा कि विश्व के कुल क्षेत्रफल का केवल 2.5 प्रतिशत हिस्सा होने और लगभग 16 प्रतिशत वैश्विक आबादी का भार वहन करने के बावजूद भारत दुनिया की करीब 7.5 प्रतिशत प्रजातियों का प्रतिनिधित्व करता है, जो देश की सांस्कृतिक परंपरा और संरक्षण प्रयासों का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाते हुए आगे बढ़ रहा है। कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश की जैव विविधता प्रतीक पोस्टर का अनावरण किया गया तथा जैव विविधता विषयक प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया।

प्रदेश की प्रमुख सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा उत्तर प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड की अध्यक्ष वी. हेकाली झिमोमी ने कहा कि जैव विविधता संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापमान वृद्धि को नियंत्रित करना पूरी दुनिया के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुका है।

उन्होंने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की प्राप्ति में जैव विविधता का क्षरण सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों पर मानव का स्वामित्व नहीं, बल्कि ट्रस्टी के रूप में जिम्मेदारी है।

उन्होंने बताया कि बीते नौ वर्षों में प्रदेश में किए गए अभिनव प्रयासों से वन जैव विविधता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड के सचिव नीरज कुमार ने बताया कि प्रदेश में 2932 पादप और 2434 प्राणी प्रजातियां पाई जाती हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य में लगभग 60 हजार जैव विविधता प्रबंधन समितियां स्थानीय स्तर पर संरक्षण कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। संगोष्ठी के तकनीकी सत्रों में पशुपालन विविधता, फसल संरक्षण, औषधीय जैव विविधता, विरासत वृक्षों के संरक्षण, जलीय आनुवंशिक संसाधनों के प्रबंधन तथा जैव विविधता अधिनियम-2002 में संशोधनों जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से विचार रखे।

-- आईएएनएस

विकेटी/वीसी

Share this story

Tags