लेबनानी सरकार ने हिज्बुल्लाह पर कसा शिकंजा? गैर-सरकारी हथियारों के निरस्त्रीकरण के पहले फेज का काम पूरा
नई दिल्ली, 8 जनवरी (आईएएनएस)। लेबनान में सरकार गैर-सरकारी हथियारों को अपने कंट्रोल में लेने के लिए अभियान चला रही है। लेबनानी सरकार ने इस मिशन के पहले चरण का काम पूरा होने की जानकारी दी। पिछले साल 2025 में अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल और लेबनान के बीच सीजफायर समझौते के बाद सेना के इस कदम को हिज्बुल्लाह को निरस्त्र करने से जोड़कर देखा जा रहा है।
दरअसल, दोनों देशों के बीच जो सीजफायर हुआ था, उसमें कहा गया था कि हिज्बुल्लाह को निरस्त्र करना होगा। ऐसे में लेबनानी सरकार ने हथियारों पर कंट्रोल का जो अभियान चलाया, उसे हिज्बुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई माना जा रहा है। इजरायल की तरफ से लेबनानी सरकार की इस कार्रवाई की जमकर सराहना भी की गई।
लेबनानी सेना ने देश के दक्षिण में सभी गैर-सरकारी हथियारों को अपने कंट्रोल में लाने के अपने प्लान के पहले चरण के पूरा होने की घोषणा की है। जिन इलाकों में सेना ने मिशन को अंजाम दिया है, उनमें लिटानी नदी और इजरायली बॉर्डर के बीच का क्षेत्र शामिल है।
गुरुवार को एक बयान में, सेना ने कहा कि उसने दक्षिण में हथियारों पर असरदार और ठोस तरीके से सरकारी मोनोपॉली बना ली है। हालांकि, सेना ने हिज्बुल्लाह का जिक्र नहीं किया। बयान में आगे कहा गया कि अब सैन्य नियंत्रण लिटानी नदी के दक्षिण के इलाके पर है। यह बॉर्डर से करीब 30 किलोमीटर (19 मील) दूर है। हालांकि, सेना ने यह भी साफ कर दिया है कि दजिन क्षेत्रों पर इजरायल का कब्जा है; उनमें सेना का या अभियान नहीं चलाया गया।
यह घोषणा अमेरिका और इजरायल की तरफ से बेरूत पर हिज्बुल्लाह को हथियार देने के बढ़ते दबाव के बीच हुई है। लेबनानी सेना ने सभी नॉन-स्टेट समूहों को हथियार देने के अपने कई फेज वाले प्लान के पहले हिस्से को पूरा करने के लिए 2025 के आखिर तक की डेडलाइन खुद तय की थी।
सेना ने कहा कि इलाके में बिना फटे हथियारों और सुरंगों को साफ करने के लिए और काम करने की जरूरत है। एक लेबनानी सुरक्षा सूत्र ने बताया कि सेना के बयान से यह साफ जाहिर होता है कि कोई भी समूह दक्षिणी लेबनान से हमले नहीं कर पाएगा।
वहीं लेबनानी सरकार की सराहना करते हुए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दफ्तर से जारी एक बयान में कहा गया, "अमेरिका की मध्यस्थता से इजरायल और लेबनान के बीच हुए सीजफायर समझौते में साफ कहा गया है कि हिज्बुल्लाह को पूरी तरह से निरस्त्र कर देना चाहिए। यह इजरायल की सुरक्षा और लेबनान के भविष्य के लिए जरूरी है। लेबनान सरकार और लेबनानी सैन्य बल की इस दिशा में की गई कोशिशें एक अच्छी शुरुआत हैं, लेकिन वे काफी नहीं हैं, जैसा कि हिज्बुल्लाह की ईरान के समर्थन से अपने आतंकवादी ढांचे को फिर से हथियारबंद करने और फिर से बनाने की कोशिशों से पता चलता है।"
--आईएएनएस
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