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'लक्ष्य पहले ही मौके पर क्वालीफाई करना है': एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने के बाद एलए ओलंपिक पर लवलीना की निगाहें

'लक्ष्य पहले ही मौके पर क्वालीफाई करना है': एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने के बाद एलए ओलंपिक पर लवलीना की निगाहें
'लक्ष्य पहले ही मौके पर क्वालीफाई करना है': एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने के बाद एलए ओलंपिक पर लवलीना की निगाहें

नई दिल्ली, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीतने के बाद भारतीय बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन ने 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक पर अपना ध्यान केंद्रित कर लिया है। 2027 वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप क्वालिफिकेशन हासिल करने का पहला मौका देगी।

बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीएफआई) ने तय किया है कि एशियन गेम्स के मेडलिस्ट कजाकिस्तान में होने वाली वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2027 में मुख्य एंट्री होंगे। यह एलए 2028 ओलंपिक के लिए पहला आधिकारिक क्वालीफाइंग इवेंट है। लवलीना इसका पूरा फायदा उठाते हुए जल्द से जल्द ओलंपिक में अपनी जगह पक्की करना चाहती हैं।

लवलीना ने रविवार को 'आईएएनएस' से ​​कहा, "हम हमेशा पहले क्वालिफिकेशन (मौके) में ही क्वालीफाई करने की पूरी कोशिश करते हैं। यह एक एथलीट के लिए बहुत अच्छी बात है। जिस तरह हॉकी टीम ने किया है, उन्हें तैयारी के लिए लंबा समय मिलेगा। हमारा लक्ष्य पहले क्वालिफिकेशन में क्वालीफाई करना, अच्छा समय पाना और अच्छे नतीजे हासिल करना है।"

जल्द क्वालिफिकेशन हासिल करने से लवलीना और अन्य सफल बॉक्सरों को ओलंपिक की खास तैयारी के लिए ज्यादा समय मिल जाएगा। जो एथलीट पहले से ही खेलों की जरूरतों से वाकिफ हैं, उनके लिए अब प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि क्वालिफिकेशन की प्रक्रिया लंबी लड़ाई न बन जाए और एलए28 का टिकट पक्का होने के बाद तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

एशियन गेम्स में लवलीना की जीत ने इस विश्वास को और मजबूत किया है, लेकिन लवलीना इस मेडल को पेरिस की निराशा के जवाब के तौर पर नहीं देखतीं, जहां वह पोडियम तक नहीं पहुंच पाई थीं। इसके बजाय, वह अपनी उपलब्धि का आनंद लेना चाहती हैं और खुद को साबित करने के दबाव को अपनी कामयाबी पर हावी नहीं होने देना चाहतीं।

उन्होंने कहा, "मैंने ऐसा कुछ नहीं सोचा है। मैंने इस पल को जीता है। यह मेरा मेडल है। मुझे बस इसका आनंद लेना है। मुझे किसी को जवाब नहीं देना है। मुझे कुछ साबित नहीं करना है। मुझे कुछ नहीं करना है। मुझे बस अपने मेडल का आनंद लेना है। मुझे लगता है कि हर कोई कड़ी मेहनत करता है। हैवीवेट और लाइटवेट, दोनों तरह के बॉक्सर बराबर मेहनत करते हैं। हर कोई उतनी ही कड़ी मेहनत करता है। कभी मेडल मिलता है, कभी नहीं। लेकिन मेहनत कम नहीं होती। मैं जानती हूं, हम कैंप में रहते हैं। प्रत्येक एथलीट बहुत मेहनत करते हैं। हमारे एथलीट्स की सोच में कहीं न कहीं बदलाव आया है। हमारे अंदर चैंपियन वाली सोच है। इसीलिए हम अच्छा कर रहे हैं। हमें सरकार से सपोर्ट भी मिल रहा है। यही वजह है कि हमारा प्रदर्शन अच्छा है।"

लवलीना के लिए, चैंपियन वाली सोच की शुरुआत प्रक्रिया पर भरोसा करने और उससे भी ज्यादा, खुद पर भरोसा करने से होती है। उन्होंने कहा, "मैं यही कहना चाहूंगी कि खुद पर भरोसा करना ज्यादा जरूरी है। दुनिया कुछ भी कहेगी। आपको अपना भरोसा कभी नहीं तोड़ना चाहिए। अगर आपको लगता है कि आप कर सकते हैं, तो आप कर सकते हैं।"

एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद लवलीना ने कहा कि यह देश के लिए गर्व का पल है। उनके लिए सबसे खास क्षण वह था जब मेडल जीतने के बाद पोडियम पर खड़े होकर राष्ट्रगान बजता है। इसी एहसास के लिए एथलीट अपने करियर में आने वाली सभी मुश्किलों और चुनौतियों का सामना करते हैं।

लवलीना ने कहा, "यह बहुत अच्छा एहसास होता है। हमें अपने नेशनल फ्लैग के साथ दुनिया भर में घूमने की इजाजत नहीं होती, लेकिन जब नेशनल एंथम बजता है, तो हमारा झंडा ऊपर उठता है। वह बहुत खास पल होता है। वह एहसास हर एथलीट का सपना होता है। पोडियम तक पहुंचना और अपना राष्ट्रगान बजाना मेरा लक्ष्य है।"

--आईएएनएस

आरएसजी

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