कूनो में चीते के शावक की मौत पर एक्शन, 6 वनकर्मी निलंबित, 8 के खिलाफ एफआईआर
श्योपुर, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। कूनो नेशनल पार्क में मादा चीता निर्वा के 19 माह के नर शावक केएनजी22 की गोली लगने से मौत के मामले में वन विभाग और पुलिस की कार्रवाई जारी है। इस मामले में अब तक छह वनकर्मियों को निलंबित किया जा चुका है, जबकि आठ संदिग्धों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है।
मुरैना पुलिस ने दो आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी है। वहीं, एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक एसटीएफ ने तीन संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की है।
मामले की जांच के लिए केंद्र सरकार की एनटीसीए और डब्ल्यूसीसीबी की उच्चस्तरीय टीम भी पहुंची है। इसी बीच कूनो नेशनल पार्क के डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने शनिवार को सैटेलाइट कॉलर से वन्यजीवों की निगरानी की तकनीकी सीमाओं पर विस्तृत प्रेस बयान जारी किया। उनके इस स्पष्टीकरण पर वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने तीखा हमला बोलते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की है।
मामला 25 अक्टूबर का है, जब नर चीता केएनजी22 श्योपुर टेरिटोरियल वन मंडल के कंपार्टमेंट नंबर 748 में गंभीर रूप से घायल मिला था। उसे रेस्क्यू कर जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय ले जाया गया। सीटी स्कैन में उसके आंतरिक अंगों, मांसपेशियों, हड्डियों और तंत्रिका तंत्र को गंभीर नुकसान की पुष्टि हुई। आपातकालीन ऑपरेशन के दौरान उसके शरीर से बंदूक के पांच छर्रे निकाले गए। तमाम प्रयासों के बावजूद 27 अक्टूबर की सुबह उसकी मौत हो गई।
घटना की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने एनटीसीए और डब्ल्यूसीसीबी के वरिष्ठ अधिकारियों की तीन सदस्यीय टीम भेजी है। इसमें एनटीसीए के वन महानिरीक्षक, डब्ल्यूसीसीबी के अतिरिक्त निदेशक और क्षेत्रीय उपनिदेशक शामिल हैं। टीम को घटनास्थल और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच, सुरक्षा प्रोटोकॉल तथा निगरानी व्यवस्था की पड़ताल की जिम्मेदारी दी गई है। टीम ने मैदानी स्तर पर जांच शुरू कर दी है। वहीं, मध्य प्रदेश सरकार ने वन विभाग और पुलिस अधिकारियों को शामिल कर विशेष जांच दल (एसटीएफ) गठित किया है।
चीते की सुरक्षा और निगरानी में लापरवाही को लेकर ग्वालियर वन वृत्त के सीसीएफ ने श्योपुर और मुरैना वन मंडल के छह वनकर्मियों को निलंबित किया है। इनमें विजयपुर के रेंजर जाहर सिंह गौड़, पहाड़गढ़ के रेंजर आकाश तोमर और डिप्टी रेंजर कीर्ति शांडिल्य सहित अन्य मैदानी कर्मचारी शामिल बताए गए हैं।
वहीं, मामले में आठ संदिग्धों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। मुरैना पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर हथियार बरामद किए जाने की जानकारी दी है। इसके अलावा एसटीएफ द्वारा तीन संदिग्धों से पूछताछ किए जाने की खबर सामने आई है। बरामद हथियारों का चीते को लगे छर्रों से संबंध फॉरेंसिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
शनिवार की शाम को डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने प्रेस बयान में बताया कि कूनो में सैटेलाइट कॉलर लगे चीतों की लोकेशन सामान्यतः छह घंटे के अंतराल पर मिलती है। यदि एक लोकेशन नहीं मिलती तो दो सफल लोकेशन के बीच 12 घंटे या उससे अधिक का अंतर हो सकता है। घने जंगल, पेड़ों की छतरी, पहाड़ी क्षेत्र, गुफाएं और गहरी घाटियां सिग्नल को प्रभावित कर सकती हैं।
उन्होंने बताया कि करीब 15 चीतों की निगरानी के लिए सैटेलाइट ट्रैकिंग के साथ वीएचएफ रेडियो रिसीवर का भी उपयोग किया जाता है। चीते रोजाना औसतन 6 से 8 किलोमीटर और कई बार 12 से 15 किलोमीटर या उससे अधिक दूरी तय करते हैं। एक सैटेलाइट कॉलर की कीमत लगभग 4 से 5 लाख रुपए होती है। डायरेक्टर के मुताबिक, कॉलर किसी जानवर का लाइव प्रसारण नहीं करता, बल्कि निर्धारित अंतराल पर उसकी भौगोलिक लोकेशन भेजता है।
डायरेक्टर के प्रेस बयान पर वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे 'असफल अफसर का अंग्रेजी में सजावटी वक्तव्य' बताया। दुबे ने आरोप लगाया कि उत्तम शर्मा के कार्यकाल में कूनो में दो स्निफर डॉग की मौत हुई, कूनो लैंडस्केप में दर्जनों तेंदुओं के शिकार के मामले सामने आए और माधव की बाघिन का मामला भी रहा।
उन्होंने वर्ष 2021 में उत्तम शर्मा के पन्ना टाइगर रिजर्व में फील्ड डायरेक्टर रहते हुए रेडियो कॉलर लगे बाघ के शिकार का मामला भी उठाया। दुबे ने मांग की कि उत्तम शर्मा को पद से हटाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो कूनो के बाकी चीते भी खतरे में रह सकते हैं।
--आईएएनएस
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