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Singhस्थ Kumbh 2026: नासिक-त्र्यंबकेश्वर में कुंभ मेले का आगाज, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी ध्वजारोहण

Singhस्थ Kumbh 2026: नासिक-त्र्यंबकेश्वर में कुंभ मेले का आगाज, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी ध्वजारोहण

महाराष्ट्र के नासिक और त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ कुंभ मेले की औपचारिक शुरुआत आज से होने जा रही है। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू नासिक के रामकुंड में आयोजित ध्वजारोहण और ध्वज स्तंभ पूजन कार्यक्रम में शामिल होंगी। कार्यक्रम दोपहर 12:02 बजे निर्धारित है। राष्ट्रपति भवन के अनुसार, इस दौरान राष्ट्रपति समारोह को संबोधित भी करेंगी।

नासिक और त्र्यंबकेश्वर में हर 12 साल में आयोजित होने वाला यह धार्मिक आयोजन गोदावरी नदी के तट पर होता है। श्रद्धालु नासिक के रामकुंड और त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त तीर्थ में पवित्र स्नान करते हैं। इस बार भी देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।

कुंभ में करोड़ों श्रद्धालुओं के आने का अनुमान

आयोजन से जुड़े अनुमान के मुताबिक, मेले के दौरान नासिक में करीब 8 से 10 करोड़ और त्र्यंबकेश्वर में लगभग 4 करोड़ श्रद्धालु पहुंच सकते हैं। कुंभ के दौरान नासिक में स्नान के 44 और त्र्यंबकेश्वर में 53 शुभ मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं।

इस आयोजन की एक खास विशेषता यह है कि वैष्णव और शैव अखाड़ों के स्नान अलग-अलग तीर्थस्थलों पर होते हैं। नासिक और त्र्यंबकेश्वर को एक ही सिंहस्थ कुंभ के दो प्रमुख केंद्र माना जाता है।

महाध्वज परिक्रमा के बाद होगा मुख्य समारोह

मुख्य कार्यक्रम से पहले शुक्रवार को नासिक में महाध्वज ग्राम परिक्रमा निकाली गई। आज होने वाले समारोह में शंखनाद से जुड़े गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड का प्रमाणपत्र भी सौंपा जाएगा।

क्यों कहलाता है सिंहस्थ कुंभ?

नासिक के कुंभ मेले को सिंहस्थ कहा जाता है। इसकी वजह धार्मिक ज्योतिषीय गणना है, जिसमें बृहस्पति के सिंह राशि में प्रवेश को विशेष महत्व दिया जाता है। कुंभ की तिथियां ग्रहों की स्थिति, धार्मिक परंपराओं और अखाड़ों की सहमति के आधार पर तय होती हैं।

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश को लेकर देवताओं और असुरों के बीच संघर्ष हुआ था। कहा जाता है कि इस दौरान अमृत की बूंदें प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में गिरी थीं। इसी मान्यता के चलते इन चार स्थानों पर कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है।

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