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कोच्चि: आईएनएस सागरध्वनि को ‘सागर मैत्री-5’ मिशन के लिए रवाना किया गया

कोच्चि, 17 जनवरी (आईएएनएस)। डीआरडीओ की नौसेना भौतिक एवं महासागरीय प्रयोगशाला (एनपीओएल) के अंतर्गत भारत का समुद्री अनुसंधान पोत आईएनएस सागरध्वनि को ‘सागर मैत्री’ पहल के पांचवें संस्करण (एसएम-5) के लिए शनिवार को कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान से रवाना किया गया।
कोच्चि: आईएनएस सागरध्वनि को ‘सागर मैत्री-5’ मिशन के लिए रवाना किया गया

कोच्चि, 17 जनवरी (आईएएनएस)। डीआरडीओ की नौसेना भौतिक एवं महासागरीय प्रयोगशाला (एनपीओएल) के अंतर्गत भारत का समुद्री अनुसंधान पोत आईएनएस सागरध्वनि को ‘सागर मैत्री’ पहल के पांचवें संस्करण (एसएम-5) के लिए शनिवार को कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान से रवाना किया गया।

इस अवसर पर आयोजित समारोह की अध्यक्षता रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष राधा मोहन सिंह ने की। समारोह में रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत तथा दक्षिणी नौसेना कमान के चीफ ऑफ स्टाफ रियर एडमिरल उपल कुंडू (वीएसएम) सहित भारतीय नौसेना और डीआरडीओ के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

‘सागर मैत्री’ भारतीय नौसेना और डीआरडीओ की एक प्रमुख संयुक्त पहल है, जो भारत सरकार की ‘सागर’ (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) की नीति के अनुरूप है। इस पहल का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) के देशों के बीच महासागरीय अनुसंधान के क्षेत्र में वैज्ञानिक सहयोग, क्षमता निर्माण और सामाजिक-आर्थिक सहभागिता को मजबूत करना है।

‘सागर मैत्री’ कार्यक्रम के तहत आईएनएस सागरध्वनि ऐतिहासिक आईएनएस किष्टना के मार्गों का अनुसरण करेगा, जिसने 1962 से 1965 के बीच अंतरराष्ट्रीय हिंद महासागर अभियान में भाग लिया था। इस पहल के माध्यम से भारत हिंद महासागर क्षेत्र के आठ देशों, ओमान, मालदीव, श्रीलंका, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया और म्यांमार के साथ दीर्घकालिक वैज्ञानिक सहयोग स्थापित करना चाहता है। यह मिशन मालदीव के साथ संयुक्त महासागरीय अनुसंधान की शुरुआत का प्रतीक है, जिससे इन देशों के वैज्ञानिकों के बीच शोध और पेशेवर आदान-प्रदान के अवसर मिलेंगे।

आईएनएस सागरध्वनि एक विशेष समुद्री ध्वनिक अनुसंधान पोत है, जिसे एनपीओएल ने डिजाइन किया है और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने निर्मित किया है। जुलाई 1994 में सेवा में शामिल किया गया यह पोत पिछले तीन दशकों से महासागरीय अध्ययन और समुद्री अनुसंधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और भारत की समुद्री वैज्ञानिक क्षमताओं को मजबूत करने में अहम योगदान दे रहा है।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी

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