ड्रोन उड़ाने से पहले जान लें ये कड़े नियम, जरा सी लापरवाही आपको पहुंचा सकती है सलाखों के पीछे!
आज के समय में ड्रोन आम जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं। शादी समारोहों की वीडियोग्राफी से लेकर सोशल मीडिया रील्स, खेती, जमीन के सर्वे और रियल एस्टेट शूट तक, अलग-अलग कामों के लिए ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ड्रोन उड़ाने के लिए भी कई नियम बनाए गए हैं और इनका उल्लंघन करने पर कार्रवाई हो सकती है?
मान लीजिए पंजाब में किसी शादी समारोह के दौरान परिवार का कोई सदस्य करीब 50 हजार रुपये का कैमरा ड्रोन उड़ाकर शादी के खूबसूरत एरियल शॉट लेने की कोशिश करता है। सब कुछ ठीक चल रहा है, लेकिन उड़ते-उड़ते ड्रोन किसी एयरबेस या संवेदनशील इलाके के प्रतिबंधित क्षेत्र में पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में सिर्फ वीडियो बनाने की कोशिश करने वाला व्यक्ति ही नहीं, बल्कि ड्रोन की पूरी उड़ान जांच के दायरे में आ सकती है।
तेजी से बढ़ रहा है ड्रोन का इस्तेमाल
भारत में ड्रोन का इस्तेमाल पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से बढ़ा है। फरवरी 2026 तक देश में करीब 40,000 रजिस्टर्ड ड्रोन और लगभग इतने ही DGCA से प्रमाणित रिमोट पायलट होने की जानकारी सामने आई थी। इसके अलावा देश में करीब 244 अप्रूव्ड ड्रोन ट्रेनिंग स्कूल भी मौजूद हैं।
अब ड्रोन सिर्फ फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी तक सीमित नहीं हैं। किसान इनका इस्तेमाल खेतों में कीटनाशक और दूसरी कृषि सामग्री के छिड़काव के लिए कर रहे हैं। प्रॉपर्टी से जुड़े कारोबारी जमीन और इमारतों के एरियल वीडियो तैयार कर रहे हैं। वहीं कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स शानदार वीडियो और रील्स के लिए ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
समस्या यह है कि ड्रोन की संख्या और इस्तेमाल तो बढ़ रहा है, लेकिन इनके संचालन से जुड़े नियमों की जानकारी अभी भी बहुत से लोगों को नहीं है।
एयरस्पेस को तीन प्रमुख जोन में बांटा गया है
भारत में ड्रोन उड़ाने के लिए एयरस्पेस को अलग-अलग जोन में बांटा गया है। इसलिए किसी भी जगह ड्रोन उड़ाने से पहले यह पता करना जरूरी है कि वह क्षेत्र किस कैटेगरी में आता है।
ग्रीन जोन:
ग्रीन जोन में सामान्य परिस्थितियों में ड्रोन उड़ाने की अनुमति होती है। इसमें कई खुले और सामान्य क्षेत्र शामिल हो सकते हैं। हालांकि ड्रोन के वजन और कैटेगरी के अनुसार अलग-अलग नियम लागू होते हैं। नियमों के तहत निर्धारित सीमा के भीतर उड़ान के लिए अलग से अनुमति की जरूरत नहीं होती।
येलो जोन:
येलो जोन नियंत्रित एयरस्पेस होता है। एयरपोर्ट और कुछ अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास ऐसे क्षेत्र बनाए जा सकते हैं। यहां ड्रोन उड़ाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति लेना जरूरी हो सकता है।
रेड जोन:
रेड जोन सबसे ज्यादा प्रतिबंधित क्षेत्र होता है। इसमें सैन्य प्रतिष्ठान, अंतरराष्ट्रीय सीमा और हाई-सिक्योरिटी वाले कुछ महत्वपूर्ण स्थान शामिल हो सकते हैं। यहां बिना संबंधित सरकारी अनुमति के ड्रोन उड़ाने की इजाजत नहीं होती।
उड़ान से पहले Digital Sky मैप जरूर देखें
ड्रोन उड़ाने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी इलाके का जोन हमेशा एक जैसा नहीं रहता। चुनाव, बड़े खेल आयोजन, VVIP दौरे, राष्ट्रीय कार्यक्रम या किसी विशेष सुरक्षा स्थिति के दौरान किसी क्षेत्र में अस्थायी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
इसलिए जिस जगह ड्रोन उड़ाना है, वहां उड़ान भरने से ठीक पहले संबंधित एयरस्पेस जोन की जानकारी जांचना बेहद जरूरी है।
प्रतिबंधित इलाके में पहुंचा ड्रोन तो कैसे होती है निगरानी?
अगर कोई अनधिकृत ड्रोन प्रतिबंधित एयरस्पेस में प्रवेश करता है, तो सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी होता है कि ड्रोन वास्तव में कहां है और उसे कौन ऑपरेट कर रहा है।
काउंटर-ड्रोन तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी संदिग्ध ड्रोन को लेकर सिर्फ उसे देख लेना पर्याप्त नहीं होता। सुरक्षा एजेंसियों को उसकी लोकेशन, उड़ान की दिशा, ऊंचाई और संभावित ऑपरेटर जैसी जानकारी जुटानी होती है।
इसके लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी सेंसिंग, ड्रोन आइडेंटिफिकेशन और अन्य निगरानी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि हर ड्रोन में ऐसी पहचान प्रणाली समान रूप से उपलब्ध या लागू हो, यह जरूरी नहीं है।
सबसे चुनौतीपूर्ण सवाल ड्रोन की मंशा को समझना होता है। हो सकता है कोई व्यक्ति गलती से प्रतिबंधित क्षेत्र में ड्रोन ले गया हो, जबकि किसी दूसरे मामले में ड्रोन जानबूझकर किसी संवेदनशील स्थान की ओर भेजा गया हो। दोनों परिस्थितियों में जोखिम का आकलन अलग तरीके से किया जाता है।
इसी वजह से आधुनिक काउंटर-ड्रोन सिस्टम में ड्रोन को पहले डिटेक्ट किया जाता है, फिर ट्रैक और आइडेंटिफाई किया जाता है और उसके व्यवहार का आकलन करने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाती है।
नियम तोड़े तो हो सकती है कार्रवाई
ड्रोन उड़ाने के नियमों का उल्लंघन करना महंगा पड़ सकता है। मामले की प्रकृति और उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर जुर्माना, ड्रोन जब्त होने जैसी कार्रवाई हो सकती है। गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई के साथ जेल की सजा तक का प्रावधान हो सकता है।
इसलिए सिर्फ यह सोचकर ड्रोन न उड़ाएं कि आप खुले इलाके में हैं और कोई समस्या नहीं होगी। ड्रोन की कैटेगरी, वजन, उड़ान की ऊंचाई, स्थान और इस्तेमाल के उद्देश्य के आधार पर नियम बदल सकते हैं।
ड्रोन उड़ाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप ड्रोन उड़ाने की तैयारी कर रहे हैं तो सबसे पहले उसके वजन और कैटेगरी की जानकारी लें। लागू नियमों के अनुसार जरूरी होने पर ड्रोन का रजिस्ट्रेशन और UIN जैसी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करें।
कमर्शियल इस्तेमाल या संबंधित कैटेगरी में उड़ान भरने के लिए आवश्यक रिमोट पायलट ट्रेनिंग और प्रमाणन की जरूरत हो सकती है। हर उड़ान से पहले एयरस्पेस की स्थिति जांचना भी जरूरी है।
खास तौर पर चुनाव, त्योहार, बड़े कार्यक्रम या VVIP मूवमेंट के दौरान पुराने अनुभव के आधार पर यह न मानें कि कोई इलाका पहले की तरह ही ग्रीन जोन में है।
ड्रोन खरीदने पर कितना खर्च आता है?
ड्रोन की कीमत उसकी कैटेगरी और कैमरा फीचर्स के हिसाब से काफी अलग-अलग होती है। शुरुआती स्तर के कैमरा ड्रोन अपेक्षाकृत कम कीमत में मिल जाते हैं, जबकि वेडिंग शूट और प्रोफेशनल वीडियोग्राफी के लिए इस्तेमाल होने वाले मॉडल काफी महंगे हो सकते हैं।
DJI Mini सीरीज जैसे हल्के ड्रोन शुरुआती यूजर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के बीच लोकप्रिय हैं। वहीं ज्यादा कैमरा क्षमता, बेहतर स्टेबिलिटी और लंबे फ्लाइट टाइम वाले मॉडल प्रोफेशनल फोटोग्राफर्स और वीडियोग्राफर्स इस्तेमाल करते हैं।
ध्यान रखें कि ड्रोन की खरीद कीमत ही पूरा खर्च नहीं है। जरूरत के अनुसार रजिस्ट्रेशन, ट्रेनिंग, इंश्योरेंस और दूसरे अनुपालन खर्च भी अलग से हो सकते हैं।
इसलिए अगली बार शादी, खेत, रील या प्रॉपर्टी शूट के लिए ड्रोन उड़ाने से पहले सिर्फ बैटरी चार्ज और कैमरा सेटिंग ही न देखें—सबसे पहले यह जांचें कि उस जगह ड्रोन उड़ाने की अनुमति है या नहीं।
आज के समय में ड्रोन आम जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं। शादी समारोहों की वीडियोग्राफी से लेकर सोशल मीडिया रील्स, खेती, जमीन के सर्वे और रियल एस्टेट शूट तक, अलग-अलग कामों के लिए ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ड्रोन उड़ाने के लिए भी कई नियम बनाए गए हैं और इनका उल्लंघन करने पर कार्रवाई हो सकती है?
मान लीजिए पंजाब में किसी शादी समारोह के दौरान परिवार का कोई सदस्य करीब 50 हजार रुपये का कैमरा ड्रोन उड़ाकर शादी के खूबसूरत एरियल शॉट लेने की कोशिश करता है। सब कुछ ठीक चल रहा है, लेकिन उड़ते-उड़ते ड्रोन किसी एयरबेस या संवेदनशील इलाके के प्रतिबंधित क्षेत्र में पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में सिर्फ वीडियो बनाने की कोशिश करने वाला व्यक्ति ही नहीं, बल्कि ड्रोन की पूरी उड़ान जांच के दायरे में आ सकती है।
तेजी से बढ़ रहा है ड्रोन का इस्तेमाल
भारत में ड्रोन का इस्तेमाल पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से बढ़ा है। फरवरी 2026 तक देश में करीब 40,000 रजिस्टर्ड ड्रोन और लगभग इतने ही DGCA से प्रमाणित रिमोट पायलट होने की जानकारी सामने आई थी। इसके अलावा देश में करीब 244 अप्रूव्ड ड्रोन ट्रेनिंग स्कूल भी मौजूद हैं।
अब ड्रोन सिर्फ फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी तक सीमित नहीं हैं। किसान इनका इस्तेमाल खेतों में कीटनाशक और दूसरी कृषि सामग्री के छिड़काव के लिए कर रहे हैं। प्रॉपर्टी से जुड़े कारोबारी जमीन और इमारतों के एरियल वीडियो तैयार कर रहे हैं। वहीं कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स शानदार वीडियो और रील्स के लिए ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
समस्या यह है कि ड्रोन की संख्या और इस्तेमाल तो बढ़ रहा है, लेकिन इनके संचालन से जुड़े नियमों की जानकारी अभी भी बहुत से लोगों को नहीं है।
एयरस्पेस को तीन प्रमुख जोन में बांटा गया है
भारत में ड्रोन उड़ाने के लिए एयरस्पेस को अलग-अलग जोन में बांटा गया है। इसलिए किसी भी जगह ड्रोन उड़ाने से पहले यह पता करना जरूरी है कि वह क्षेत्र किस कैटेगरी में आता है।
ग्रीन जोन:
ग्रीन जोन में सामान्य परिस्थितियों में ड्रोन उड़ाने की अनुमति होती है। इसमें कई खुले और सामान्य क्षेत्र शामिल हो सकते हैं। हालांकि ड्रोन के वजन और कैटेगरी के अनुसार अलग-अलग नियम लागू होते हैं। नियमों के तहत निर्धारित सीमा के भीतर उड़ान के लिए अलग से अनुमति की जरूरत नहीं होती।
येलो जोन:
येलो जोन नियंत्रित एयरस्पेस होता है। एयरपोर्ट और कुछ अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास ऐसे क्षेत्र बनाए जा सकते हैं। यहां ड्रोन उड़ाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति लेना जरूरी हो सकता है।
रेड जोन:
रेड जोन सबसे ज्यादा प्रतिबंधित क्षेत्र होता है। इसमें सैन्य प्रतिष्ठान, अंतरराष्ट्रीय सीमा और हाई-सिक्योरिटी वाले कुछ महत्वपूर्ण स्थान शामिल हो सकते हैं। यहां बिना संबंधित सरकारी अनुमति के ड्रोन उड़ाने की इजाजत नहीं होती।
उड़ान से पहले Digital Sky मैप जरूर देखें
ड्रोन उड़ाने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी इलाके का जोन हमेशा एक जैसा नहीं रहता। चुनाव, बड़े खेल आयोजन, VVIP दौरे, राष्ट्रीय कार्यक्रम या किसी विशेष सुरक्षा स्थिति के दौरान किसी क्षेत्र में अस्थायी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
इसलिए जिस जगह ड्रोन उड़ाना है, वहां उड़ान भरने से ठीक पहले संबंधित एयरस्पेस जोन की जानकारी जांचना बेहद जरूरी है।
प्रतिबंधित इलाके में पहुंचा ड्रोन तो कैसे होती है निगरानी?
अगर कोई अनधिकृत ड्रोन प्रतिबंधित एयरस्पेस में प्रवेश करता है, तो सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी होता है कि ड्रोन वास्तव में कहां है और उसे कौन ऑपरेट कर रहा है।
काउंटर-ड्रोन तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी संदिग्ध ड्रोन को लेकर सिर्फ उसे देख लेना पर्याप्त नहीं होता। सुरक्षा एजेंसियों को उसकी लोकेशन, उड़ान की दिशा, ऊंचाई और संभावित ऑपरेटर जैसी जानकारी जुटानी होती है।
इसके लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी सेंसिंग, ड्रोन आइडेंटिफिकेशन और अन्य निगरानी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि हर ड्रोन में ऐसी पहचान प्रणाली समान रूप से उपलब्ध या लागू हो, यह जरूरी नहीं है।
सबसे चुनौतीपूर्ण सवाल ड्रोन की मंशा को समझना होता है। हो सकता है कोई व्यक्ति गलती से प्रतिबंधित क्षेत्र में ड्रोन ले गया हो, जबकि किसी दूसरे मामले में ड्रोन जानबूझकर किसी संवेदनशील स्थान की ओर भेजा गया हो। दोनों परिस्थितियों में जोखिम का आकलन अलग तरीके से किया जाता है।
इसी वजह से आधुनिक काउंटर-ड्रोन सिस्टम में ड्रोन को पहले डिटेक्ट किया जाता है, फिर ट्रैक और आइडेंटिफाई किया जाता है और उसके व्यवहार का आकलन करने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाती है।
नियम तोड़े तो हो सकती है कार्रवाई
ड्रोन उड़ाने के नियमों का उल्लंघन करना महंगा पड़ सकता है। मामले की प्रकृति और उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर जुर्माना, ड्रोन जब्त होने जैसी कार्रवाई हो सकती है। गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई के साथ जेल की सजा तक का प्रावधान हो सकता है।
इसलिए सिर्फ यह सोचकर ड्रोन न उड़ाएं कि आप खुले इलाके में हैं और कोई समस्या नहीं होगी। ड्रोन की कैटेगरी, वजन, उड़ान की ऊंचाई, स्थान और इस्तेमाल के उद्देश्य के आधार पर नियम बदल सकते हैं।
ड्रोन उड़ाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप ड्रोन उड़ाने की तैयारी कर रहे हैं तो सबसे पहले उसके वजन और कैटेगरी की जानकारी लें। लागू नियमों के अनुसार जरूरी होने पर ड्रोन का रजिस्ट्रेशन और UIN जैसी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करें।
कमर्शियल इस्तेमाल या संबंधित कैटेगरी में उड़ान भरने के लिए आवश्यक रिमोट पायलट ट्रेनिंग और प्रमाणन की जरूरत हो सकती है। हर उड़ान से पहले एयरस्पेस की स्थिति जांचना भी जरूरी है।
खास तौर पर चुनाव, त्योहार, बड़े कार्यक्रम या VVIP मूवमेंट के दौरान पुराने अनुभव के आधार पर यह न मानें कि कोई इलाका पहले की तरह ही ग्रीन जोन में है।
ड्रोन खरीदने पर कितना खर्च आता है?
ड्रोन की कीमत उसकी कैटेगरी और कैमरा फीचर्स के हिसाब से काफी अलग-अलग होती है। शुरुआती स्तर के कैमरा ड्रोन अपेक्षाकृत कम कीमत में मिल जाते हैं, जबकि वेडिंग शूट और प्रोफेशनल वीडियोग्राफी के लिए इस्तेमाल होने वाले मॉडल काफी महंगे हो सकते हैं।
DJI Mini सीरीज जैसे हल्के ड्रोन शुरुआती यूजर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के बीच लोकप्रिय हैं। वहीं ज्यादा कैमरा क्षमता, बेहतर स्टेबिलिटी और लंबे फ्लाइट टाइम वाले मॉडल प्रोफेशनल फोटोग्राफर्स और वीडियोग्राफर्स इस्तेमाल करते हैं।
ध्यान रखें कि ड्रोन की खरीद कीमत ही पूरा खर्च नहीं है। जरूरत के अनुसार रजिस्ट्रेशन, ट्रेनिंग, इंश्योरेंस और दूसरे अनुपालन खर्च भी अलग से हो सकते हैं।
इसलिए अगली बार शादी, खेत, रील या प्रॉपर्टी शूट के लिए ड्रोन उड़ाने से पहले सिर्फ बैटरी चार्ज और कैमरा सेटिंग ही न देखें—सबसे पहले यह जांचें कि उस जगह ड्रोन उड़ाने की अनुमति है या नहीं।
आज के समय में ड्रोन आम जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं। शादी समारोहों की वीडियोग्राफी से लेकर सोशल मीडिया रील्स, खेती, जमीन के सर्वे और रियल एस्टेट शूट तक, अलग-अलग कामों के लिए ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ड्रोन उड़ाने के लिए भी कई नियम बनाए गए हैं और इनका उल्लंघन करने पर कार्रवाई हो सकती है?
मान लीजिए पंजाब में किसी शादी समारोह के दौरान परिवार का कोई सदस्य करीब 50 हजार रुपये का कैमरा ड्रोन उड़ाकर शादी के खूबसूरत एरियल शॉट लेने की कोशिश करता है। सब कुछ ठीक चल रहा है, लेकिन उड़ते-उड़ते ड्रोन किसी एयरबेस या संवेदनशील इलाके के प्रतिबंधित क्षेत्र में पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में सिर्फ वीडियो बनाने की कोशिश करने वाला व्यक्ति ही नहीं, बल्कि ड्रोन की पूरी उड़ान जांच के दायरे में आ सकती है।
तेजी से बढ़ रहा है ड्रोन का इस्तेमाल
भारत में ड्रोन का इस्तेमाल पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से बढ़ा है। फरवरी 2026 तक देश में करीब 40,000 रजिस्टर्ड ड्रोन और लगभग इतने ही DGCA से प्रमाणित रिमोट पायलट होने की जानकारी सामने आई थी। इसके अलावा देश में करीब 244 अप्रूव्ड ड्रोन ट्रेनिंग स्कूल भी मौजूद हैं।
अब ड्रोन सिर्फ फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी तक सीमित नहीं हैं। किसान इनका इस्तेमाल खेतों में कीटनाशक और दूसरी कृषि सामग्री के छिड़काव के लिए कर रहे हैं। प्रॉपर्टी से जुड़े कारोबारी जमीन और इमारतों के एरियल वीडियो तैयार कर रहे हैं। वहीं कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स शानदार वीडियो और रील्स के लिए ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
समस्या यह है कि ड्रोन की संख्या और इस्तेमाल तो बढ़ रहा है, लेकिन इनके संचालन से जुड़े नियमों की जानकारी अभी भी बहुत से लोगों को नहीं है।
एयरस्पेस को तीन प्रमुख जोन में बांटा गया है
भारत में ड्रोन उड़ाने के लिए एयरस्पेस को अलग-अलग जोन में बांटा गया है। इसलिए किसी भी जगह ड्रोन उड़ाने से पहले यह पता करना जरूरी है कि वह क्षेत्र किस कैटेगरी में आता है।
ग्रीन जोन:
ग्रीन जोन में सामान्य परिस्थितियों में ड्रोन उड़ाने की अनुमति होती है। इसमें कई खुले और सामान्य क्षेत्र शामिल हो सकते हैं। हालांकि ड्रोन के वजन और कैटेगरी के अनुसार अलग-अलग नियम लागू होते हैं। नियमों के तहत निर्धारित सीमा के भीतर उड़ान के लिए अलग से अनुमति की जरूरत नहीं होती।
येलो जोन:
येलो जोन नियंत्रित एयरस्पेस होता है। एयरपोर्ट और कुछ अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास ऐसे क्षेत्र बनाए जा सकते हैं। यहां ड्रोन उड़ाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति लेना जरूरी हो सकता है।
रेड जोन:
रेड जोन सबसे ज्यादा प्रतिबंधित क्षेत्र होता है। इसमें सैन्य प्रतिष्ठान, अंतरराष्ट्रीय सीमा और हाई-सिक्योरिटी वाले कुछ महत्वपूर्ण स्थान शामिल हो सकते हैं। यहां बिना संबंधित सरकारी अनुमति के ड्रोन उड़ाने की इजाजत नहीं होती।
उड़ान से पहले Digital Sky मैप जरूर देखें
ड्रोन उड़ाने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी इलाके का जोन हमेशा एक जैसा नहीं रहता। चुनाव, बड़े खेल आयोजन, VVIP दौरे, राष्ट्रीय कार्यक्रम या किसी विशेष सुरक्षा स्थिति के दौरान किसी क्षेत्र में अस्थायी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
इसलिए जिस जगह ड्रोन उड़ाना है, वहां उड़ान भरने से ठीक पहले संबंधित एयरस्पेस जोन की जानकारी जांचना बेहद जरूरी है।
प्रतिबंधित इलाके में पहुंचा ड्रोन तो कैसे होती है निगरानी?
अगर कोई अनधिकृत ड्रोन प्रतिबंधित एयरस्पेस में प्रवेश करता है, तो सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी होता है कि ड्रोन वास्तव में कहां है और उसे कौन ऑपरेट कर रहा है।
काउंटर-ड्रोन तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी संदिग्ध ड्रोन को लेकर सिर्फ उसे देख लेना पर्याप्त नहीं होता। सुरक्षा एजेंसियों को उसकी लोकेशन, उड़ान की दिशा, ऊंचाई और संभावित ऑपरेटर जैसी जानकारी जुटानी होती है।
इसके लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी सेंसिंग, ड्रोन आइडेंटिफिकेशन और अन्य निगरानी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि हर ड्रोन में ऐसी पहचान प्रणाली समान रूप से उपलब्ध या लागू हो, यह जरूरी नहीं है।
सबसे चुनौतीपूर्ण सवाल ड्रोन की मंशा को समझना होता है। हो सकता है कोई व्यक्ति गलती से प्रतिबंधित क्षेत्र में ड्रोन ले गया हो, जबकि किसी दूसरे मामले में ड्रोन जानबूझकर किसी संवेदनशील स्थान की ओर भेजा गया हो। दोनों परिस्थितियों में जोखिम का आकलन अलग तरीके से किया जाता है।
इसी वजह से आधुनिक काउंटर-ड्रोन सिस्टम में ड्रोन को पहले डिटेक्ट किया जाता है, फिर ट्रैक और आइडेंटिफाई किया जाता है और उसके व्यवहार का आकलन करने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाती है।
नियम तोड़े तो हो सकती है कार्रवाई
ड्रोन उड़ाने के नियमों का उल्लंघन करना महंगा पड़ सकता है। मामले की प्रकृति और उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर जुर्माना, ड्रोन जब्त होने जैसी कार्रवाई हो सकती है। गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई के साथ जेल की सजा तक का प्रावधान हो सकता है।
इसलिए सिर्फ यह सोचकर ड्रोन न उड़ाएं कि आप खुले इलाके में हैं और कोई समस्या नहीं होगी। ड्रोन की कैटेगरी, वजन, उड़ान की ऊंचाई, स्थान और इस्तेमाल के उद्देश्य के आधार पर नियम बदल सकते हैं।
ड्रोन उड़ाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप ड्रोन उड़ाने की तैयारी कर रहे हैं तो सबसे पहले उसके वजन और कैटेगरी की जानकारी लें। लागू नियमों के अनुसार जरूरी होने पर ड्रोन का रजिस्ट्रेशन और UIN जैसी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करें।
कमर्शियल इस्तेमाल या संबंधित कैटेगरी में उड़ान भरने के लिए आवश्यक रिमोट पायलट ट्रेनिंग और प्रमाणन की जरूरत हो सकती है। हर उड़ान से पहले एयरस्पेस की स्थिति जांचना भी जरूरी है।
खास तौर पर चुनाव, त्योहार, बड़े कार्यक्रम या VVIP मूवमेंट के दौरान पुराने अनुभव के आधार पर यह न मानें कि कोई इलाका पहले की तरह ही ग्रीन जोन में है।
ड्रोन खरीदने पर कितना खर्च आता है?
ड्रोन की कीमत उसकी कैटेगरी और कैमरा फीचर्स के हिसाब से काफी अलग-अलग होती है। शुरुआती स्तर के कैमरा ड्रोन अपेक्षाकृत कम कीमत में मिल जाते हैं, जबकि वेडिंग शूट और प्रोफेशनल वीडियोग्राफी के लिए इस्तेमाल होने वाले मॉडल काफी महंगे हो सकते हैं।
DJI Mini सीरीज जैसे हल्के ड्रोन शुरुआती यूजर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के बीच लोकप्रिय हैं। वहीं ज्यादा कैमरा क्षमता, बेहतर स्टेबिलिटी और लंबे फ्लाइट टाइम वाले मॉडल प्रोफेशनल फोटोग्राफर्स और वीडियोग्राफर्स इस्तेमाल करते हैं।
ध्यान रखें कि ड्रोन की खरीद कीमत ही पूरा खर्च नहीं है। जरूरत के अनुसार रजिस्ट्रेशन, ट्रेनिंग, इंश्योरेंस और दूसरे अनुपालन खर्च भी अलग से हो सकते हैं।
इसलिए अगली बार शादी, खेत, रील या प्रॉपर्टी शूट के लिए ड्रोन उड़ाने से पहले सिर्फ बैटरी चार्ज और कैमरा सेटिंग ही न देखें—सबसे पहले यह जांचें कि उस जगह ड्रोन उड़ाने की अनुमति है या नहीं।
आज के समय में ड्रोन आम जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं। शादी समारोहों की वीडियोग्राफी से लेकर सोशल मीडिया रील्स, खेती, जमीन के सर्वे और रियल एस्टेट शूट तक, अलग-अलग कामों के लिए ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ड्रोन उड़ाने के लिए भी कई नियम बनाए गए हैं और इनका उल्लंघन करने पर कार्रवाई हो सकती है?
मान लीजिए पंजाब में किसी शादी समारोह के दौरान परिवार का कोई सदस्य करीब 50 हजार रुपये का कैमरा ड्रोन उड़ाकर शादी के खूबसूरत एरियल शॉट लेने की कोशिश करता है। सब कुछ ठीक चल रहा है, लेकिन उड़ते-उड़ते ड्रोन किसी एयरबेस या संवेदनशील इलाके के प्रतिबंधित क्षेत्र में पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में सिर्फ वीडियो बनाने की कोशिश करने वाला व्यक्ति ही नहीं, बल्कि ड्रोन की पूरी उड़ान जांच के दायरे में आ सकती है।
तेजी से बढ़ रहा है ड्रोन का इस्तेमाल
भारत में ड्रोन का इस्तेमाल पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से बढ़ा है। फरवरी 2026 तक देश में करीब 40,000 रजिस्टर्ड ड्रोन और लगभग इतने ही DGCA से प्रमाणित रिमोट पायलट होने की जानकारी सामने आई थी। इसके अलावा देश में करीब 244 अप्रूव्ड ड्रोन ट्रेनिंग स्कूल भी मौजूद हैं।
अब ड्रोन सिर्फ फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी तक सीमित नहीं हैं। किसान इनका इस्तेमाल खेतों में कीटनाशक और दूसरी कृषि सामग्री के छिड़काव के लिए कर रहे हैं। प्रॉपर्टी से जुड़े कारोबारी जमीन और इमारतों के एरियल वीडियो तैयार कर रहे हैं। वहीं कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स शानदार वीडियो और रील्स के लिए ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
समस्या यह है कि ड्रोन की संख्या और इस्तेमाल तो बढ़ रहा है, लेकिन इनके संचालन से जुड़े नियमों की जानकारी अभी भी बहुत से लोगों को नहीं है।
एयरस्पेस को तीन प्रमुख जोन में बांटा गया है
भारत में ड्रोन उड़ाने के लिए एयरस्पेस को अलग-अलग जोन में बांटा गया है। इसलिए किसी भी जगह ड्रोन उड़ाने से पहले यह पता करना जरूरी है कि वह क्षेत्र किस कैटेगरी में आता है।
ग्रीन जोन:
ग्रीन जोन में सामान्य परिस्थितियों में ड्रोन उड़ाने की अनुमति होती है। इसमें कई खुले और सामान्य क्षेत्र शामिल हो सकते हैं। हालांकि ड्रोन के वजन और कैटेगरी के अनुसार अलग-अलग नियम लागू होते हैं। नियमों के तहत निर्धारित सीमा के भीतर उड़ान के लिए अलग से अनुमति की जरूरत नहीं होती।
येलो जोन:
येलो जोन नियंत्रित एयरस्पेस होता है। एयरपोर्ट और कुछ अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास ऐसे क्षेत्र बनाए जा सकते हैं। यहां ड्रोन उड़ाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति लेना जरूरी हो सकता है।
रेड जोन:
रेड जोन सबसे ज्यादा प्रतिबंधित क्षेत्र होता है। इसमें सैन्य प्रतिष्ठान, अंतरराष्ट्रीय सीमा और हाई-सिक्योरिटी वाले कुछ महत्वपूर्ण स्थान शामिल हो सकते हैं। यहां बिना संबंधित सरकारी अनुमति के ड्रोन उड़ाने की इजाजत नहीं होती।
उड़ान से पहले Digital Sky मैप जरूर देखें
ड्रोन उड़ाने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी इलाके का जोन हमेशा एक जैसा नहीं रहता। चुनाव, बड़े खेल आयोजन, VVIP दौरे, राष्ट्रीय कार्यक्रम या किसी विशेष सुरक्षा स्थिति के दौरान किसी क्षेत्र में अस्थायी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
इसलिए जिस जगह ड्रोन उड़ाना है, वहां उड़ान भरने से ठीक पहले संबंधित एयरस्पेस जोन की जानकारी जांचना बेहद जरूरी है।
प्रतिबंधित इलाके में पहुंचा ड्रोन तो कैसे होती है निगरानी?
अगर कोई अनधिकृत ड्रोन प्रतिबंधित एयरस्पेस में प्रवेश करता है, तो सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी होता है कि ड्रोन वास्तव में कहां है और उसे कौन ऑपरेट कर रहा है।
काउंटर-ड्रोन तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी संदिग्ध ड्रोन को लेकर सिर्फ उसे देख लेना पर्याप्त नहीं होता। सुरक्षा एजेंसियों को उसकी लोकेशन, उड़ान की दिशा, ऊंचाई और संभावित ऑपरेटर जैसी जानकारी जुटानी होती है।
इसके लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी सेंसिंग, ड्रोन आइडेंटिफिकेशन और अन्य निगरानी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि हर ड्रोन में ऐसी पहचान प्रणाली समान रूप से उपलब्ध या लागू हो, यह जरूरी नहीं है।
सबसे चुनौतीपूर्ण सवाल ड्रोन की मंशा को समझना होता है। हो सकता है कोई व्यक्ति गलती से प्रतिबंधित क्षेत्र में ड्रोन ले गया हो, जबकि किसी दूसरे मामले में ड्रोन जानबूझकर किसी संवेदनशील स्थान की ओर भेजा गया हो। दोनों परिस्थितियों में जोखिम का आकलन अलग तरीके से किया जाता है।
इसी वजह से आधुनिक काउंटर-ड्रोन सिस्टम में ड्रोन को पहले डिटेक्ट किया जाता है, फिर ट्रैक और आइडेंटिफाई किया जाता है और उसके व्यवहार का आकलन करने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाती है।
नियम तोड़े तो हो सकती है कार्रवाई
ड्रोन उड़ाने के नियमों का उल्लंघन करना महंगा पड़ सकता है। मामले की प्रकृति और उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर जुर्माना, ड्रोन जब्त होने जैसी कार्रवाई हो सकती है। गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई के साथ जेल की सजा तक का प्रावधान हो सकता है।
इसलिए सिर्फ यह सोचकर ड्रोन न उड़ाएं कि आप खुले इलाके में हैं और कोई समस्या नहीं होगी। ड्रोन की कैटेगरी, वजन, उड़ान की ऊंचाई, स्थान और इस्तेमाल के उद्देश्य के आधार पर नियम बदल सकते हैं।
ड्रोन उड़ाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप ड्रोन उड़ाने की तैयारी कर रहे हैं तो सबसे पहले उसके वजन और कैटेगरी की जानकारी लें। लागू नियमों के अनुसार जरूरी होने पर ड्रोन का रजिस्ट्रेशन और UIN जैसी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करें।
कमर्शियल इस्तेमाल या संबंधित कैटेगरी में उड़ान भरने के लिए आवश्यक रिमोट पायलट ट्रेनिंग और प्रमाणन की जरूरत हो सकती है। हर उड़ान से पहले एयरस्पेस की स्थिति जांचना भी जरूरी है।
खास तौर पर चुनाव, त्योहार, बड़े कार्यक्रम या VVIP मूवमेंट के दौरान पुराने अनुभव के आधार पर यह न मानें कि कोई इलाका पहले की तरह ही ग्रीन जोन में है।
ड्रोन खरीदने पर कितना खर्च आता है?
ड्रोन की कीमत उसकी कैटेगरी और कैमरा फीचर्स के हिसाब से काफी अलग-अलग होती है। शुरुआती स्तर के कैमरा ड्रोन अपेक्षाकृत कम कीमत में मिल जाते हैं, जबकि वेडिंग शूट और प्रोफेशनल वीडियोग्राफी के लिए इस्तेमाल होने वाले मॉडल काफी महंगे हो सकते हैं।
DJI Mini सीरीज जैसे हल्के ड्रोन शुरुआती यूजर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के बीच लोकप्रिय हैं। वहीं ज्यादा कैमरा क्षमता, बेहतर स्टेबिलिटी और लंबे फ्लाइट टाइम वाले मॉडल प्रोफेशनल फोटोग्राफर्स और वीडियोग्राफर्स इस्तेमाल करते हैं।
ध्यान रखें कि ड्रोन की खरीद कीमत ही पूरा खर्च नहीं है। जरूरत के अनुसार रजिस्ट्रेशन, ट्रेनिंग, इंश्योरेंस और दूसरे अनुपालन खर्च भी अलग से हो सकते हैं।
इसलिए अगली बार शादी, खेत, रील या प्रॉपर्टी शूट के लिए ड्रोन उड़ाने से पहले सिर्फ बैटरी चार्ज और कैमरा सेटिंग ही न देखें—सबसे पहले यह जांचें कि उस जगह ड्रोन उड़ाने की अनुमति है या नहीं।
आज के समय में ड्रोन आम जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं। शादी समारोहों की वीडियोग्राफी से लेकर सोशल मीडिया रील्स, खेती, जमीन के सर्वे और रियल एस्टेट शूट तक, अलग-अलग कामों के लिए ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ड्रोन उड़ाने के लिए भी कई नियम बनाए गए हैं और इनका उल्लंघन करने पर कार्रवाई हो सकती है?
मान लीजिए पंजाब में किसी शादी समारोह के दौरान परिवार का कोई सदस्य करीब 50 हजार रुपये का कैमरा ड्रोन उड़ाकर शादी के खूबसूरत एरियल शॉट लेने की कोशिश करता है। सब कुछ ठीक चल रहा है, लेकिन उड़ते-उड़ते ड्रोन किसी एयरबेस या संवेदनशील इलाके के प्रतिबंधित क्षेत्र में पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में सिर्फ वीडियो बनाने की कोशिश करने वाला व्यक्ति ही नहीं, बल्कि ड्रोन की पूरी उड़ान जांच के दायरे में आ सकती है।
तेजी से बढ़ रहा है ड्रोन का इस्तेमाल
भारत में ड्रोन का इस्तेमाल पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से बढ़ा है। फरवरी 2026 तक देश में करीब 40,000 रजिस्टर्ड ड्रोन और लगभग इतने ही DGCA से प्रमाणित रिमोट पायलट होने की जानकारी सामने आई थी। इसके अलावा देश में करीब 244 अप्रूव्ड ड्रोन ट्रेनिंग स्कूल भी मौजूद हैं।
अब ड्रोन सिर्फ फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी तक सीमित नहीं हैं। किसान इनका इस्तेमाल खेतों में कीटनाशक और दूसरी कृषि सामग्री के छिड़काव के लिए कर रहे हैं। प्रॉपर्टी से जुड़े कारोबारी जमीन और इमारतों के एरियल वीडियो तैयार कर रहे हैं। वहीं कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स शानदार वीडियो और रील्स के लिए ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
समस्या यह है कि ड्रोन की संख्या और इस्तेमाल तो बढ़ रहा है, लेकिन इनके संचालन से जुड़े नियमों की जानकारी अभी भी बहुत से लोगों को नहीं है।
एयरस्पेस को तीन प्रमुख जोन में बांटा गया है
भारत में ड्रोन उड़ाने के लिए एयरस्पेस को अलग-अलग जोन में बांटा गया है। इसलिए किसी भी जगह ड्रोन उड़ाने से पहले यह पता करना जरूरी है कि वह क्षेत्र किस कैटेगरी में आता है।
ग्रीन जोन:
ग्रीन जोन में सामान्य परिस्थितियों में ड्रोन उड़ाने की अनुमति होती है। इसमें कई खुले और सामान्य क्षेत्र शामिल हो सकते हैं। हालांकि ड्रोन के वजन और कैटेगरी के अनुसार अलग-अलग नियम लागू होते हैं। नियमों के तहत निर्धारित सीमा के भीतर उड़ान के लिए अलग से अनुमति की जरूरत नहीं होती।
येलो जोन:
येलो जोन नियंत्रित एयरस्पेस होता है। एयरपोर्ट और कुछ अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास ऐसे क्षेत्र बनाए जा सकते हैं। यहां ड्रोन उड़ाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति लेना जरूरी हो सकता है।
रेड जोन:
रेड जोन सबसे ज्यादा प्रतिबंधित क्षेत्र होता है। इसमें सैन्य प्रतिष्ठान, अंतरराष्ट्रीय सीमा और हाई-सिक्योरिटी वाले कुछ महत्वपूर्ण स्थान शामिल हो सकते हैं। यहां बिना संबंधित सरकारी अनुमति के ड्रोन उड़ाने की इजाजत नहीं होती।
उड़ान से पहले Digital Sky मैप जरूर देखें
ड्रोन उड़ाने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी इलाके का जोन हमेशा एक जैसा नहीं रहता। चुनाव, बड़े खेल आयोजन, VVIP दौरे, राष्ट्रीय कार्यक्रम या किसी विशेष सुरक्षा स्थिति के दौरान किसी क्षेत्र में अस्थायी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
इसलिए जिस जगह ड्रोन उड़ाना है, वहां उड़ान भरने से ठीक पहले संबंधित एयरस्पेस जोन की जानकारी जांचना बेहद जरूरी है।
प्रतिबंधित इलाके में पहुंचा ड्रोन तो कैसे होती है निगरानी?
अगर कोई अनधिकृत ड्रोन प्रतिबंधित एयरस्पेस में प्रवेश करता है, तो सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी होता है कि ड्रोन वास्तव में कहां है और उसे कौन ऑपरेट कर रहा है।
काउंटर-ड्रोन तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी संदिग्ध ड्रोन को लेकर सिर्फ उसे देख लेना पर्याप्त नहीं होता। सुरक्षा एजेंसियों को उसकी लोकेशन, उड़ान की दिशा, ऊंचाई और संभावित ऑपरेटर जैसी जानकारी जुटानी होती है।
इसके लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी सेंसिंग, ड्रोन आइडेंटिफिकेशन और अन्य निगरानी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि हर ड्रोन में ऐसी पहचान प्रणाली समान रूप से उपलब्ध या लागू हो, यह जरूरी नहीं है।
सबसे चुनौतीपूर्ण सवाल ड्रोन की मंशा को समझना होता है। हो सकता है कोई व्यक्ति गलती से प्रतिबंधित क्षेत्र में ड्रोन ले गया हो, जबकि किसी दूसरे मामले में ड्रोन जानबूझकर किसी संवेदनशील स्थान की ओर भेजा गया हो। दोनों परिस्थितियों में जोखिम का आकलन अलग तरीके से किया जाता है।
इसी वजह से आधुनिक काउंटर-ड्रोन सिस्टम में ड्रोन को पहले डिटेक्ट किया जाता है, फिर ट्रैक और आइडेंटिफाई किया जाता है और उसके व्यवहार का आकलन करने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाती है।
नियम तोड़े तो हो सकती है कार्रवाई
ड्रोन उड़ाने के नियमों का उल्लंघन करना महंगा पड़ सकता है। मामले की प्रकृति और उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर जुर्माना, ड्रोन जब्त होने जैसी कार्रवाई हो सकती है। गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई के साथ जेल की सजा तक का प्रावधान हो सकता है।
इसलिए सिर्फ यह सोचकर ड्रोन न उड़ाएं कि आप खुले इलाके में हैं और कोई समस्या नहीं होगी। ड्रोन की कैटेगरी, वजन, उड़ान की ऊंचाई, स्थान और इस्तेमाल के उद्देश्य के आधार पर नियम बदल सकते हैं।
ड्रोन उड़ाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप ड्रोन उड़ाने की तैयारी कर रहे हैं तो सबसे पहले उसके वजन और कैटेगरी की जानकारी लें। लागू नियमों के अनुसार जरूरी होने पर ड्रोन का रजिस्ट्रेशन और UIN जैसी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करें।
कमर्शियल इस्तेमाल या संबंधित कैटेगरी में उड़ान भरने के लिए आवश्यक रिमोट पायलट ट्रेनिंग और प्रमाणन की जरूरत हो सकती है। हर उड़ान से पहले एयरस्पेस की स्थिति जांचना भी जरूरी है।
खास तौर पर चुनाव, त्योहार, बड़े कार्यक्रम या VVIP मूवमेंट के दौरान पुराने अनुभव के आधार पर यह न मानें कि कोई इलाका पहले की तरह ही ग्रीन जोन में है।
ड्रोन खरीदने पर कितना खर्च आता है?
ड्रोन की कीमत उसकी कैटेगरी और कैमरा फीचर्स के हिसाब से काफी अलग-अलग होती है। शुरुआती स्तर के कैमरा ड्रोन अपेक्षाकृत कम कीमत में मिल जाते हैं, जबकि वेडिंग शूट और प्रोफेशनल वीडियोग्राफी के लिए इस्तेमाल होने वाले मॉडल काफी महंगे हो सकते हैं।
DJI Mini सीरीज जैसे हल्के ड्रोन शुरुआती यूजर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के बीच लोकप्रिय हैं। वहीं ज्यादा कैमरा क्षमता, बेहतर स्टेबिलिटी और लंबे फ्लाइट टाइम वाले मॉडल प्रोफेशनल फोटोग्राफर्स और वीडियोग्राफर्स इस्तेमाल करते हैं।
ध्यान रखें कि ड्रोन की खरीद कीमत ही पूरा खर्च नहीं है। जरूरत के अनुसार रजिस्ट्रेशन, ट्रेनिंग, इंश्योरेंस और दूसरे अनुपालन खर्च भी अलग से हो सकते हैं।
इसलिए अगली बार शादी, खेत, रील या प्रॉपर्टी शूट के लिए ड्रोन उड़ाने से पहले सिर्फ बैटरी चार्ज और कैमरा सेटिंग ही न देखें—सबसे पहले यह जांचें कि उस जगह ड्रोन उड़ाने की अनुमति है या नहीं।
आज के समय में ड्रोन आम जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं। शादी समारोहों की वीडियोग्राफी से लेकर सोशल मीडिया रील्स, खेती, जमीन के सर्वे और रियल एस्टेट शूट तक, अलग-अलग कामों के लिए ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ड्रोन उड़ाने के लिए भी कई नियम बनाए गए हैं और इनका उल्लंघन करने पर कार्रवाई हो सकती है?
मान लीजिए पंजाब में किसी शादी समारोह के दौरान परिवार का कोई सदस्य करीब 50 हजार रुपये का कैमरा ड्रोन उड़ाकर शादी के खूबसूरत एरियल शॉट लेने की कोशिश करता है। सब कुछ ठीक चल रहा है, लेकिन उड़ते-उड़ते ड्रोन किसी एयरबेस या संवेदनशील इलाके के प्रतिबंधित क्षेत्र में पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में सिर्फ वीडियो बनाने की कोशिश करने वाला व्यक्ति ही नहीं, बल्कि ड्रोन की पूरी उड़ान जांच के दायरे में आ सकती है।
तेजी से बढ़ रहा है ड्रोन का इस्तेमाल
भारत में ड्रोन का इस्तेमाल पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से बढ़ा है। फरवरी 2026 तक देश में करीब 40,000 रजिस्टर्ड ड्रोन और लगभग इतने ही DGCA से प्रमाणित रिमोट पायलट होने की जानकारी सामने आई थी। इसके अलावा देश में करीब 244 अप्रूव्ड ड्रोन ट्रेनिंग स्कूल भी मौजूद हैं।
अब ड्रोन सिर्फ फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी तक सीमित नहीं हैं। किसान इनका इस्तेमाल खेतों में कीटनाशक और दूसरी कृषि सामग्री के छिड़काव के लिए कर रहे हैं। प्रॉपर्टी से जुड़े कारोबारी जमीन और इमारतों के एरियल वीडियो तैयार कर रहे हैं। वहीं कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स शानदार वीडियो और रील्स के लिए ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
समस्या यह है कि ड्रोन की संख्या और इस्तेमाल तो बढ़ रहा है, लेकिन इनके संचालन से जुड़े नियमों की जानकारी अभी भी बहुत से लोगों को नहीं है।
एयरस्पेस को तीन प्रमुख जोन में बांटा गया है
भारत में ड्रोन उड़ाने के लिए एयरस्पेस को अलग-अलग जोन में बांटा गया है। इसलिए किसी भी जगह ड्रोन उड़ाने से पहले यह पता करना जरूरी है कि वह क्षेत्र किस कैटेगरी में आता है।
ग्रीन जोन:
ग्रीन जोन में सामान्य परिस्थितियों में ड्रोन उड़ाने की अनुमति होती है। इसमें कई खुले और सामान्य क्षेत्र शामिल हो सकते हैं। हालांकि ड्रोन के वजन और कैटेगरी के अनुसार अलग-अलग नियम लागू होते हैं। नियमों के तहत निर्धारित सीमा के भीतर उड़ान के लिए अलग से अनुमति की जरूरत नहीं होती।
येलो जोन:
येलो जोन नियंत्रित एयरस्पेस होता है। एयरपोर्ट और कुछ अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास ऐसे क्षेत्र बनाए जा सकते हैं। यहां ड्रोन उड़ाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति लेना जरूरी हो सकता है।
रेड जोन:
रेड जोन सबसे ज्यादा प्रतिबंधित क्षेत्र होता है। इसमें सैन्य प्रतिष्ठान, अंतरराष्ट्रीय सीमा और हाई-सिक्योरिटी वाले कुछ महत्वपूर्ण स्थान शामिल हो सकते हैं। यहां बिना संबंधित सरकारी अनुमति के ड्रोन उड़ाने की इजाजत नहीं होती।
उड़ान से पहले Digital Sky मैप जरूर देखें
ड्रोन उड़ाने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी इलाके का जोन हमेशा एक जैसा नहीं रहता। चुनाव, बड़े खेल आयोजन, VVIP दौरे, राष्ट्रीय कार्यक्रम या किसी विशेष सुरक्षा स्थिति के दौरान किसी क्षेत्र में अस्थायी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
इसलिए जिस जगह ड्रोन उड़ाना है, वहां उड़ान भरने से ठीक पहले संबंधित एयरस्पेस जोन की जानकारी जांचना बेहद जरूरी है।
प्रतिबंधित इलाके में पहुंचा ड्रोन तो कैसे होती है निगरानी?
अगर कोई अनधिकृत ड्रोन प्रतिबंधित एयरस्पेस में प्रवेश करता है, तो सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी होता है कि ड्रोन वास्तव में कहां है और उसे कौन ऑपरेट कर रहा है।
काउंटर-ड्रोन तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी संदिग्ध ड्रोन को लेकर सिर्फ उसे देख लेना पर्याप्त नहीं होता। सुरक्षा एजेंसियों को उसकी लोकेशन, उड़ान की दिशा, ऊंचाई और संभावित ऑपरेटर जैसी जानकारी जुटानी होती है।
इसके लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी सेंसिंग, ड्रोन आइडेंटिफिकेशन और अन्य निगरानी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि हर ड्रोन में ऐसी पहचान प्रणाली समान रूप से उपलब्ध या लागू हो, यह जरूरी नहीं है।
सबसे चुनौतीपूर्ण सवाल ड्रोन की मंशा को समझना होता है। हो सकता है कोई व्यक्ति गलती से प्रतिबंधित क्षेत्र में ड्रोन ले गया हो, जबकि किसी दूसरे मामले में ड्रोन जानबूझकर किसी संवेदनशील स्थान की ओर भेजा गया हो। दोनों परिस्थितियों में जोखिम का आकलन अलग तरीके से किया जाता है।
इसी वजह से आधुनिक काउंटर-ड्रोन सिस्टम में ड्रोन को पहले डिटेक्ट किया जाता है, फिर ट्रैक और आइडेंटिफाई किया जाता है और उसके व्यवहार का आकलन करने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाती है।
नियम तोड़े तो हो सकती है कार्रवाई
ड्रोन उड़ाने के नियमों का उल्लंघन करना महंगा पड़ सकता है। मामले की प्रकृति और उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर जुर्माना, ड्रोन जब्त होने जैसी कार्रवाई हो सकती है। गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई के साथ जेल की सजा तक का प्रावधान हो सकता है।
इसलिए सिर्फ यह सोचकर ड्रोन न उड़ाएं कि आप खुले इलाके में हैं और कोई समस्या नहीं होगी। ड्रोन की कैटेगरी, वजन, उड़ान की ऊंचाई, स्थान और इस्तेमाल के उद्देश्य के आधार पर नियम बदल सकते हैं।
ड्रोन उड़ाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप ड्रोन उड़ाने की तैयारी कर रहे हैं तो सबसे पहले उसके वजन और कैटेगरी की जानकारी लें। लागू नियमों के अनुसार जरूरी होने पर ड्रोन का रजिस्ट्रेशन और UIN जैसी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करें।
कमर्शियल इस्तेमाल या संबंधित कैटेगरी में उड़ान भरने के लिए आवश्यक रिमोट पायलट ट्रेनिंग और प्रमाणन की जरूरत हो सकती है। हर उड़ान से पहले एयरस्पेस की स्थिति जांचना भी जरूरी है।
खास तौर पर चुनाव, त्योहार, बड़े कार्यक्रम या VVIP मूवमेंट के दौरान पुराने अनुभव के आधार पर यह न मानें कि कोई इलाका पहले की तरह ही ग्रीन जोन में है।
ड्रोन खरीदने पर कितना खर्च आता है?
ड्रोन की कीमत उसकी कैटेगरी और कैमरा फीचर्स के हिसाब से काफी अलग-अलग होती है। शुरुआती स्तर के कैमरा ड्रोन अपेक्षाकृत कम कीमत में मिल जाते हैं, जबकि वेडिंग शूट और प्रोफेशनल वीडियोग्राफी के लिए इस्तेमाल होने वाले मॉडल काफी महंगे हो सकते हैं।
DJI Mini सीरीज जैसे हल्के ड्रोन शुरुआती यूजर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के बीच लोकप्रिय हैं। वहीं ज्यादा कैमरा क्षमता, बेहतर स्टेबिलिटी और लंबे फ्लाइट टाइम वाले मॉडल प्रोफेशनल फोटोग्राफर्स और वीडियोग्राफर्स इस्तेमाल करते हैं।
ध्यान रखें कि ड्रोन की खरीद कीमत ही पूरा खर्च नहीं है। जरूरत के अनुसार रजिस्ट्रेशन, ट्रेनिंग, इंश्योरेंस और दूसरे अनुपालन खर्च भी अलग से हो सकते हैं।
इसलिए अगली बार शादी, खेत, रील या प्रॉपर्टी शूट के लिए ड्रोन उड़ाने से पहले सिर्फ बैटरी चार्ज और कैमरा सेटिंग ही न देखें—सबसे पहले यह जांचें कि उस जगह ड्रोन उड़ाने की अनुमति है या नहीं।
आज के समय में ड्रोन आम जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं। शादी समारोहों की वीडियोग्राफी से लेकर सोशल मीडिया रील्स, खेती, जमीन के सर्वे और रियल एस्टेट शूट तक, अलग-अलग कामों के लिए ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ड्रोन उड़ाने के लिए भी कई नियम बनाए गए हैं और इनका उल्लंघन करने पर कार्रवाई हो सकती है?
मान लीजिए पंजाब में किसी शादी समारोह के दौरान परिवार का कोई सदस्य करीब 50 हजार रुपये का कैमरा ड्रोन उड़ाकर शादी के खूबसूरत एरियल शॉट लेने की कोशिश करता है। सब कुछ ठीक चल रहा है, लेकिन उड़ते-उड़ते ड्रोन किसी एयरबेस या संवेदनशील इलाके के प्रतिबंधित क्षेत्र में पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में सिर्फ वीडियो बनाने की कोशिश करने वाला व्यक्ति ही नहीं, बल्कि ड्रोन की पूरी उड़ान जांच के दायरे में आ सकती है।
तेजी से बढ़ रहा है ड्रोन का इस्तेमाल
भारत में ड्रोन का इस्तेमाल पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से बढ़ा है। फरवरी 2026 तक देश में करीब 40,000 रजिस्टर्ड ड्रोन और लगभग इतने ही DGCA से प्रमाणित रिमोट पायलट होने की जानकारी सामने आई थी। इसके अलावा देश में करीब 244 अप्रूव्ड ड्रोन ट्रेनिंग स्कूल भी मौजूद हैं।
अब ड्रोन सिर्फ फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी तक सीमित नहीं हैं। किसान इनका इस्तेमाल खेतों में कीटनाशक और दूसरी कृषि सामग्री के छिड़काव के लिए कर रहे हैं। प्रॉपर्टी से जुड़े कारोबारी जमीन और इमारतों के एरियल वीडियो तैयार कर रहे हैं। वहीं कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स शानदार वीडियो और रील्स के लिए ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
समस्या यह है कि ड्रोन की संख्या और इस्तेमाल तो बढ़ रहा है, लेकिन इनके संचालन से जुड़े नियमों की जानकारी अभी भी बहुत से लोगों को नहीं है।
एयरस्पेस को तीन प्रमुख जोन में बांटा गया है
भारत में ड्रोन उड़ाने के लिए एयरस्पेस को अलग-अलग जोन में बांटा गया है। इसलिए किसी भी जगह ड्रोन उड़ाने से पहले यह पता करना जरूरी है कि वह क्षेत्र किस कैटेगरी में आता है।
ग्रीन जोन:
ग्रीन जोन में सामान्य परिस्थितियों में ड्रोन उड़ाने की अनुमति होती है। इसमें कई खुले और सामान्य क्षेत्र शामिल हो सकते हैं। हालांकि ड्रोन के वजन और कैटेगरी के अनुसार अलग-अलग नियम लागू होते हैं। नियमों के तहत निर्धारित सीमा के भीतर उड़ान के लिए अलग से अनुमति की जरूरत नहीं होती।
येलो जोन:
येलो जोन नियंत्रित एयरस्पेस होता है। एयरपोर्ट और कुछ अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास ऐसे क्षेत्र बनाए जा सकते हैं। यहां ड्रोन उड़ाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति लेना जरूरी हो सकता है।
रेड जोन:
रेड जोन सबसे ज्यादा प्रतिबंधित क्षेत्र होता है। इसमें सैन्य प्रतिष्ठान, अंतरराष्ट्रीय सीमा और हाई-सिक्योरिटी वाले कुछ महत्वपूर्ण स्थान शामिल हो सकते हैं। यहां बिना संबंधित सरकारी अनुमति के ड्रोन उड़ाने की इजाजत नहीं होती।
उड़ान से पहले Digital Sky मैप जरूर देखें
ड्रोन उड़ाने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी इलाके का जोन हमेशा एक जैसा नहीं रहता। चुनाव, बड़े खेल आयोजन, VVIP दौरे, राष्ट्रीय कार्यक्रम या किसी विशेष सुरक्षा स्थिति के दौरान किसी क्षेत्र में अस्थायी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
इसलिए जिस जगह ड्रोन उड़ाना है, वहां उड़ान भरने से ठीक पहले संबंधित एयरस्पेस जोन की जानकारी जांचना बेहद जरूरी है।
प्रतिबंधित इलाके में पहुंचा ड्रोन तो कैसे होती है निगरानी?
अगर कोई अनधिकृत ड्रोन प्रतिबंधित एयरस्पेस में प्रवेश करता है, तो सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी होता है कि ड्रोन वास्तव में कहां है और उसे कौन ऑपरेट कर रहा है।
काउंटर-ड्रोन तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी संदिग्ध ड्रोन को लेकर सिर्फ उसे देख लेना पर्याप्त नहीं होता। सुरक्षा एजेंसियों को उसकी लोकेशन, उड़ान की दिशा, ऊंचाई और संभावित ऑपरेटर जैसी जानकारी जुटानी होती है।
इसके लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी सेंसिंग, ड्रोन आइडेंटिफिकेशन और अन्य निगरानी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि हर ड्रोन में ऐसी पहचान प्रणाली समान रूप से उपलब्ध या लागू हो, यह जरूरी नहीं है।
सबसे चुनौतीपूर्ण सवाल ड्रोन की मंशा को समझना होता है। हो सकता है कोई व्यक्ति गलती से प्रतिबंधित क्षेत्र में ड्रोन ले गया हो, जबकि किसी दूसरे मामले में ड्रोन जानबूझकर किसी संवेदनशील स्थान की ओर भेजा गया हो। दोनों परिस्थितियों में जोखिम का आकलन अलग तरीके से किया जाता है।
इसी वजह से आधुनिक काउंटर-ड्रोन सिस्टम में ड्रोन को पहले डिटेक्ट किया जाता है, फिर ट्रैक और आइडेंटिफाई किया जाता है और उसके व्यवहार का आकलन करने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाती है।
नियम तोड़े तो हो सकती है कार्रवाई
ड्रोन उड़ाने के नियमों का उल्लंघन करना महंगा पड़ सकता है। मामले की प्रकृति और उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर जुर्माना, ड्रोन जब्त होने जैसी कार्रवाई हो सकती है। गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई के साथ जेल की सजा तक का प्रावधान हो सकता है।
इसलिए सिर्फ यह सोचकर ड्रोन न उड़ाएं कि आप खुले इलाके में हैं और कोई समस्या नहीं होगी। ड्रोन की कैटेगरी, वजन, उड़ान की ऊंचाई, स्थान और इस्तेमाल के उद्देश्य के आधार पर नियम बदल सकते हैं।
ड्रोन उड़ाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप ड्रोन उड़ाने की तैयारी कर रहे हैं तो सबसे पहले उसके वजन और कैटेगरी की जानकारी लें। लागू नियमों के अनुसार जरूरी होने पर ड्रोन का रजिस्ट्रेशन और UIN जैसी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करें।
कमर्शियल इस्तेमाल या संबंधित कैटेगरी में उड़ान भरने के लिए आवश्यक रिमोट पायलट ट्रेनिंग और प्रमाणन की जरूरत हो सकती है। हर उड़ान से पहले एयरस्पेस की स्थिति जांचना भी जरूरी है।
खास तौर पर चुनाव, त्योहार, बड़े कार्यक्रम या VVIP मूवमेंट के दौरान पुराने अनुभव के आधार पर यह न मानें कि कोई इलाका पहले की तरह ही ग्रीन जोन में है।
ड्रोन खरीदने पर कितना खर्च आता है?
ड्रोन की कीमत उसकी कैटेगरी और कैमरा फीचर्स के हिसाब से काफी अलग-अलग होती है। शुरुआती स्तर के कैमरा ड्रोन अपेक्षाकृत कम कीमत में मिल जाते हैं, जबकि वेडिंग शूट और प्रोफेशनल वीडियोग्राफी के लिए इस्तेमाल होने वाले मॉडल काफी महंगे हो सकते हैं।
DJI Mini सीरीज जैसे हल्के ड्रोन शुरुआती यूजर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के बीच लोकप्रिय हैं। वहीं ज्यादा कैमरा क्षमता, बेहतर स्टेबिलिटी और लंबे फ्लाइट टाइम वाले मॉडल प्रोफेशनल फोटोग्राफर्स और वीडियोग्राफर्स इस्तेमाल करते हैं।
ध्यान रखें कि ड्रोन की खरीद कीमत ही पूरा खर्च नहीं है। जरूरत के अनुसार रजिस्ट्रेशन, ट्रेनिंग, इंश्योरेंस और दूसरे अनुपालन खर्च भी अलग से हो सकते हैं।
इसलिए अगली बार शादी, खेत, रील या प्रॉपर्टी शूट के लिए ड्रोन उड़ाने से पहले सिर्फ बैटरी चार्ज और कैमरा सेटिंग ही न देखें—सबसे पहले यह जांचें कि उस जगह ड्रोन उड़ाने की अनुमति है या नहीं।
आज के समय में ड्रोन आम जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं। शादी समारोहों की वीडियोग्राफी से लेकर सोशल मीडिया रील्स, खेती, जमीन के सर्वे और रियल एस्टेट शूट तक, अलग-अलग कामों के लिए ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ड्रोन उड़ाने के लिए भी कई नियम बनाए गए हैं और इनका उल्लंघन करने पर कार्रवाई हो सकती है?
मान लीजिए पंजाब में किसी शादी समारोह के दौरान परिवार का कोई सदस्य करीब 50 हजार रुपये का कैमरा ड्रोन उड़ाकर शादी के खूबसूरत एरियल शॉट लेने की कोशिश करता है। सब कुछ ठीक चल रहा है, लेकिन उड़ते-उड़ते ड्रोन किसी एयरबेस या संवेदनशील इलाके के प्रतिबंधित क्षेत्र में पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में सिर्फ वीडियो बनाने की कोशिश करने वाला व्यक्ति ही नहीं, बल्कि ड्रोन की पूरी उड़ान जांच के दायरे में आ सकती है।
तेजी से बढ़ रहा है ड्रोन का इस्तेमाल
भारत में ड्रोन का इस्तेमाल पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से बढ़ा है। फरवरी 2026 तक देश में करीब 40,000 रजिस्टर्ड ड्रोन और लगभग इतने ही DGCA से प्रमाणित रिमोट पायलट होने की जानकारी सामने आई थी। इसके अलावा देश में करीब 244 अप्रूव्ड ड्रोन ट्रेनिंग स्कूल भी मौजूद हैं।
अब ड्रोन सिर्फ फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी तक सीमित नहीं हैं। किसान इनका इस्तेमाल खेतों में कीटनाशक और दूसरी कृषि सामग्री के छिड़काव के लिए कर रहे हैं। प्रॉपर्टी से जुड़े कारोबारी जमीन और इमारतों के एरियल वीडियो तैयार कर रहे हैं। वहीं कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स शानदार वीडियो और रील्स के लिए ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
समस्या यह है कि ड्रोन की संख्या और इस्तेमाल तो बढ़ रहा है, लेकिन इनके संचालन से जुड़े नियमों की जानकारी अभी भी बहुत से लोगों को नहीं है।
एयरस्पेस को तीन प्रमुख जोन में बांटा गया है
भारत में ड्रोन उड़ाने के लिए एयरस्पेस को अलग-अलग जोन में बांटा गया है। इसलिए किसी भी जगह ड्रोन उड़ाने से पहले यह पता करना जरूरी है कि वह क्षेत्र किस कैटेगरी में आता है।
ग्रीन जोन:
ग्रीन जोन में सामान्य परिस्थितियों में ड्रोन उड़ाने की अनुमति होती है। इसमें कई खुले और सामान्य क्षेत्र शामिल हो सकते हैं। हालांकि ड्रोन के वजन और कैटेगरी के अनुसार अलग-अलग नियम लागू होते हैं। नियमों के तहत निर्धारित सीमा के भीतर उड़ान के लिए अलग से अनुमति की जरूरत नहीं होती।
येलो जोन:
येलो जोन नियंत्रित एयरस्पेस होता है। एयरपोर्ट और कुछ अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास ऐसे क्षेत्र बनाए जा सकते हैं। यहां ड्रोन उड़ाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति लेना जरूरी हो सकता है।
रेड जोन:
रेड जोन सबसे ज्यादा प्रतिबंधित क्षेत्र होता है। इसमें सैन्य प्रतिष्ठान, अंतरराष्ट्रीय सीमा और हाई-सिक्योरिटी वाले कुछ महत्वपूर्ण स्थान शामिल हो सकते हैं। यहां बिना संबंधित सरकारी अनुमति के ड्रोन उड़ाने की इजाजत नहीं होती।
उड़ान से पहले Digital Sky मैप जरूर देखें
ड्रोन उड़ाने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी इलाके का जोन हमेशा एक जैसा नहीं रहता। चुनाव, बड़े खेल आयोजन, VVIP दौरे, राष्ट्रीय कार्यक्रम या किसी विशेष सुरक्षा स्थिति के दौरान किसी क्षेत्र में अस्थायी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
इसलिए जिस जगह ड्रोन उड़ाना है, वहां उड़ान भरने से ठीक पहले संबंधित एयरस्पेस जोन की जानकारी जांचना बेहद जरूरी है।
प्रतिबंधित इलाके में पहुंचा ड्रोन तो कैसे होती है निगरानी?
अगर कोई अनधिकृत ड्रोन प्रतिबंधित एयरस्पेस में प्रवेश करता है, तो सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी होता है कि ड्रोन वास्तव में कहां है और उसे कौन ऑपरेट कर रहा है।
काउंटर-ड्रोन तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी संदिग्ध ड्रोन को लेकर सिर्फ उसे देख लेना पर्याप्त नहीं होता। सुरक्षा एजेंसियों को उसकी लोकेशन, उड़ान की दिशा, ऊंचाई और संभावित ऑपरेटर जैसी जानकारी जुटानी होती है।
इसके लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी सेंसिंग, ड्रोन आइडेंटिफिकेशन और अन्य निगरानी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि हर ड्रोन में ऐसी पहचान प्रणाली समान रूप से उपलब्ध या लागू हो, यह जरूरी नहीं है।
सबसे चुनौतीपूर्ण सवाल ड्रोन की मंशा को समझना होता है। हो सकता है कोई व्यक्ति गलती से प्रतिबंधित क्षेत्र में ड्रोन ले गया हो, जबकि किसी दूसरे मामले में ड्रोन जानबूझकर किसी संवेदनशील स्थान की ओर भेजा गया हो। दोनों परिस्थितियों में जोखिम का आकलन अलग तरीके से किया जाता है।
इसी वजह से आधुनिक काउंटर-ड्रोन सिस्टम में ड्रोन को पहले डिटेक्ट किया जाता है, फिर ट्रैक और आइडेंटिफाई किया जाता है और उसके व्यवहार का आकलन करने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाती है।
नियम तोड़े तो हो सकती है कार्रवाई
ड्रोन उड़ाने के नियमों का उल्लंघन करना महंगा पड़ सकता है। मामले की प्रकृति और उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर जुर्माना, ड्रोन जब्त होने जैसी कार्रवाई हो सकती है। गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई के साथ जेल की सजा तक का प्रावधान हो सकता है।
इसलिए सिर्फ यह सोचकर ड्रोन न उड़ाएं कि आप खुले इलाके में हैं और कोई समस्या नहीं होगी। ड्रोन की कैटेगरी, वजन, उड़ान की ऊंचाई, स्थान और इस्तेमाल के उद्देश्य के आधार पर नियम बदल सकते हैं।
ड्रोन उड़ाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप ड्रोन उड़ाने की तैयारी कर रहे हैं तो सबसे पहले उसके वजन और कैटेगरी की जानकारी लें। लागू नियमों के अनुसार जरूरी होने पर ड्रोन का रजिस्ट्रेशन और UIN जैसी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करें।
कमर्शियल इस्तेमाल या संबंधित कैटेगरी में उड़ान भरने के लिए आवश्यक रिमोट पायलट ट्रेनिंग और प्रमाणन की जरूरत हो सकती है। हर उड़ान से पहले एयरस्पेस की स्थिति जांचना भी जरूरी है।
खास तौर पर चुनाव, त्योहार, बड़े कार्यक्रम या VVIP मूवमेंट के दौरान पुराने अनुभव के आधार पर यह न मानें कि कोई इलाका पहले की तरह ही ग्रीन जोन में है।
ड्रोन खरीदने पर कितना खर्च आता है?
ड्रोन की कीमत उसकी कैटेगरी और कैमरा फीचर्स के हिसाब से काफी अलग-अलग होती है। शुरुआती स्तर के कैमरा ड्रोन अपेक्षाकृत कम कीमत में मिल जाते हैं, जबकि वेडिंग शूट और प्रोफेशनल वीडियोग्राफी के लिए इस्तेमाल होने वाले मॉडल काफी महंगे हो सकते हैं।
DJI Mini सीरीज जैसे हल्के ड्रोन शुरुआती यूजर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के बीच लोकप्रिय हैं। वहीं ज्यादा कैमरा क्षमता, बेहतर स्टेबिलिटी और लंबे फ्लाइट टाइम वाले मॉडल प्रोफेशनल फोटोग्राफर्स और वीडियोग्राफर्स इस्तेमाल करते हैं।
ध्यान रखें कि ड्रोन की खरीद कीमत ही पूरा खर्च नहीं है। जरूरत के अनुसार रजिस्ट्रेशन, ट्रेनिंग, इंश्योरेंस और दूसरे अनुपालन खर्च भी अलग से हो सकते हैं।
इसलिए अगली बार शादी, खेत, रील या प्रॉपर्टी शूट के लिए ड्रोन उड़ाने से पहले सिर्फ बैटरी चार्ज और कैमरा सेटिंग ही न देखें—सबसे पहले यह जांचें कि उस जगह ड्रोन उड़ाने की अनुमति है या नहीं।
आज के समय में ड्रोन आम जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं। शादी समारोहों की वीडियोग्राफी से लेकर सोशल मीडिया रील्स, खेती, जमीन के सर्वे और रियल एस्टेट शूट तक, अलग-अलग कामों के लिए ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ड्रोन उड़ाने के लिए भी कई नियम बनाए गए हैं और इनका उल्लंघन करने पर कार्रवाई हो सकती है?
मान लीजिए पंजाब में किसी शादी समारोह के दौरान परिवार का कोई सदस्य करीब 50 हजार रुपये का कैमरा ड्रोन उड़ाकर शादी के खूबसूरत एरियल शॉट लेने की कोशिश करता है। सब कुछ ठीक चल रहा है, लेकिन उड़ते-उड़ते ड्रोन किसी एयरबेस या संवेदनशील इलाके के प्रतिबंधित क्षेत्र में पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में सिर्फ वीडियो बनाने की कोशिश करने वाला व्यक्ति ही नहीं, बल्कि ड्रोन की पूरी उड़ान जांच के दायरे में आ सकती है।
तेजी से बढ़ रहा है ड्रोन का इस्तेमाल
भारत में ड्रोन का इस्तेमाल पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से बढ़ा है। फरवरी 2026 तक देश में करीब 40,000 रजिस्टर्ड ड्रोन और लगभग इतने ही DGCA से प्रमाणित रिमोट पायलट होने की जानकारी सामने आई थी। इसके अलावा देश में करीब 244 अप्रूव्ड ड्रोन ट्रेनिंग स्कूल भी मौजूद हैं।
अब ड्रोन सिर्फ फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी तक सीमित नहीं हैं। किसान इनका इस्तेमाल खेतों में कीटनाशक और दूसरी कृषि सामग्री के छिड़काव के लिए कर रहे हैं। प्रॉपर्टी से जुड़े कारोबारी जमीन और इमारतों के एरियल वीडियो तैयार कर रहे हैं। वहीं कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स शानदार वीडियो और रील्स के लिए ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
समस्या यह है कि ड्रोन की संख्या और इस्तेमाल तो बढ़ रहा है, लेकिन इनके संचालन से जुड़े नियमों की जानकारी अभी भी बहुत से लोगों को नहीं है।
एयरस्पेस को तीन प्रमुख जोन में बांटा गया है
भारत में ड्रोन उड़ाने के लिए एयरस्पेस को अलग-अलग जोन में बांटा गया है। इसलिए किसी भी जगह ड्रोन उड़ाने से पहले यह पता करना जरूरी है कि वह क्षेत्र किस कैटेगरी में आता है।
ग्रीन जोन:
ग्रीन जोन में सामान्य परिस्थितियों में ड्रोन उड़ाने की अनुमति होती है। इसमें कई खुले और सामान्य क्षेत्र शामिल हो सकते हैं। हालांकि ड्रोन के वजन और कैटेगरी के अनुसार अलग-अलग नियम लागू होते हैं। नियमों के तहत निर्धारित सीमा के भीतर उड़ान के लिए अलग से अनुमति की जरूरत नहीं होती।
येलो जोन:
येलो जोन नियंत्रित एयरस्पेस होता है। एयरपोर्ट और कुछ अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास ऐसे क्षेत्र बनाए जा सकते हैं। यहां ड्रोन उड़ाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति लेना जरूरी हो सकता है।
रेड जोन:
रेड जोन सबसे ज्यादा प्रतिबंधित क्षेत्र होता है। इसमें सैन्य प्रतिष्ठान, अंतरराष्ट्रीय सीमा और हाई-सिक्योरिटी वाले कुछ महत्वपूर्ण स्थान शामिल हो सकते हैं। यहां बिना संबंधित सरकारी अनुमति के ड्रोन उड़ाने की इजाजत नहीं होती।
उड़ान से पहले Digital Sky मैप जरूर देखें
ड्रोन उड़ाने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी इलाके का जोन हमेशा एक जैसा नहीं रहता। चुनाव, बड़े खेल आयोजन, VVIP दौरे, राष्ट्रीय कार्यक्रम या किसी विशेष सुरक्षा स्थिति के दौरान किसी क्षेत्र में अस्थायी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
इसलिए जिस जगह ड्रोन उड़ाना है, वहां उड़ान भरने से ठीक पहले संबंधित एयरस्पेस जोन की जानकारी जांचना बेहद जरूरी है।
प्रतिबंधित इलाके में पहुंचा ड्रोन तो कैसे होती है निगरानी?
अगर कोई अनधिकृत ड्रोन प्रतिबंधित एयरस्पेस में प्रवेश करता है, तो सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी होता है कि ड्रोन वास्तव में कहां है और उसे कौन ऑपरेट कर रहा है।
काउंटर-ड्रोन तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी संदिग्ध ड्रोन को लेकर सिर्फ उसे देख लेना पर्याप्त नहीं होता। सुरक्षा एजेंसियों को उसकी लोकेशन, उड़ान की दिशा, ऊंचाई और संभावित ऑपरेटर जैसी जानकारी जुटानी होती है।
इसके लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी सेंसिंग, ड्रोन आइडेंटिफिकेशन और अन्य निगरानी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि हर ड्रोन में ऐसी पहचान प्रणाली समान रूप से उपलब्ध या लागू हो, यह जरूरी नहीं है।
सबसे चुनौतीपूर्ण सवाल ड्रोन की मंशा को समझना होता है। हो सकता है कोई व्यक्ति गलती से प्रतिबंधित क्षेत्र में ड्रोन ले गया हो, जबकि किसी दूसरे मामले में ड्रोन जानबूझकर किसी संवेदनशील स्थान की ओर भेजा गया हो। दोनों परिस्थितियों में जोखिम का आकलन अलग तरीके से किया जाता है।
इसी वजह से आधुनिक काउंटर-ड्रोन सिस्टम में ड्रोन को पहले डिटेक्ट किया जाता है, फिर ट्रैक और आइडेंटिफाई किया जाता है और उसके व्यवहार का आकलन करने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाती है।
नियम तोड़े तो हो सकती है कार्रवाई
ड्रोन उड़ाने के नियमों का उल्लंघन करना महंगा पड़ सकता है। मामले की प्रकृति और उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर जुर्माना, ड्रोन जब्त होने जैसी कार्रवाई हो सकती है। गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई के साथ जेल की सजा तक का प्रावधान हो सकता है।
इसलिए सिर्फ यह सोचकर ड्रोन न उड़ाएं कि आप खुले इलाके में हैं और कोई समस्या नहीं होगी। ड्रोन की कैटेगरी, वजन, उड़ान की ऊंचाई, स्थान और इस्तेमाल के उद्देश्य के आधार पर नियम बदल सकते हैं।
ड्रोन उड़ाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप ड्रोन उड़ाने की तैयारी कर रहे हैं तो सबसे पहले उसके वजन और कैटेगरी की जानकारी लें। लागू नियमों के अनुसार जरूरी होने पर ड्रोन का रजिस्ट्रेशन और UIN जैसी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करें।
कमर्शियल इस्तेमाल या संबंधित कैटेगरी में उड़ान भरने के लिए आवश्यक रिमोट पायलट ट्रेनिंग और प्रमाणन की जरूरत हो सकती है। हर उड़ान से पहले एयरस्पेस की स्थिति जांचना भी जरूरी है।
खास तौर पर चुनाव, त्योहार, बड़े कार्यक्रम या VVIP मूवमेंट के दौरान पुराने अनुभव के आधार पर यह न मानें कि कोई इलाका पहले की तरह ही ग्रीन जोन में है।
ड्रोन खरीदने पर कितना खर्च आता है?
ड्रोन की कीमत उसकी कैटेगरी और कैमरा फीचर्स के हिसाब से काफी अलग-अलग होती है। शुरुआती स्तर के कैमरा ड्रोन अपेक्षाकृत कम कीमत में मिल जाते हैं, जबकि वेडिंग शूट और प्रोफेशनल वीडियोग्राफी के लिए इस्तेमाल होने वाले मॉडल काफी महंगे हो सकते हैं।
DJI Mini सीरीज जैसे हल्के ड्रोन शुरुआती यूजर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के बीच लोकप्रिय हैं। वहीं ज्यादा कैमरा क्षमता, बेहतर स्टेबिलिटी और लंबे फ्लाइट टाइम वाले मॉडल प्रोफेशनल फोटोग्राफर्स और वीडियोग्राफर्स इस्तेमाल करते हैं।
ध्यान रखें कि ड्रोन की खरीद कीमत ही पूरा खर्च नहीं है। जरूरत के अनुसार रजिस्ट्रेशन, ट्रेनिंग, इंश्योरेंस और दूसरे अनुपालन खर्च भी अलग से हो सकते हैं।
इसलिए अगली बार शादी, खेत, रील या प्रॉपर्टी शूट के लिए ड्रोन उड़ाने से पहले सिर्फ बैटरी चार्ज और कैमरा सेटिंग ही न देखें—सबसे पहले यह जांचें कि उस जगह ड्रोन उड़ाने की अनुमति है या नहीं।
आज के समय में ड्रोन आम जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं। शादी समारोहों की वीडियोग्राफी से लेकर सोशल मीडिया रील्स, खेती, जमीन के सर्वे और रियल एस्टेट शूट तक, अलग-अलग कामों के लिए ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ड्रोन उड़ाने के लिए भी कई नियम बनाए गए हैं और इनका उल्लंघन करने पर कार्रवाई हो सकती है?
मान लीजिए पंजाब में किसी शादी समारोह के दौरान परिवार का कोई सदस्य करीब 50 हजार रुपये का कैमरा ड्रोन उड़ाकर शादी के खूबसूरत एरियल शॉट लेने की कोशिश करता है। सब कुछ ठीक चल रहा है, लेकिन उड़ते-उड़ते ड्रोन किसी एयरबेस या संवेदनशील इलाके के प्रतिबंधित क्षेत्र में पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में सिर्फ वीडियो बनाने की कोशिश करने वाला व्यक्ति ही नहीं, बल्कि ड्रोन की पूरी उड़ान जांच के दायरे में आ सकती है।
तेजी से बढ़ रहा है ड्रोन का इस्तेमाल
भारत में ड्रोन का इस्तेमाल पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से बढ़ा है। फरवरी 2026 तक देश में करीब 40,000 रजिस्टर्ड ड्रोन और लगभग इतने ही DGCA से प्रमाणित रिमोट पायलट होने की जानकारी सामने आई थी। इसके अलावा देश में करीब 244 अप्रूव्ड ड्रोन ट्रेनिंग स्कूल भी मौजूद हैं।
अब ड्रोन सिर्फ फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी तक सीमित नहीं हैं। किसान इनका इस्तेमाल खेतों में कीटनाशक और दूसरी कृषि सामग्री के छिड़काव के लिए कर रहे हैं। प्रॉपर्टी से जुड़े कारोबारी जमीन और इमारतों के एरियल वीडियो तैयार कर रहे हैं। वहीं कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स शानदार वीडियो और रील्स के लिए ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
समस्या यह है कि ड्रोन की संख्या और इस्तेमाल तो बढ़ रहा है, लेकिन इनके संचालन से जुड़े नियमों की जानकारी अभी भी बहुत से लोगों को नहीं है।
एयरस्पेस को तीन प्रमुख जोन में बांटा गया है
भारत में ड्रोन उड़ाने के लिए एयरस्पेस को अलग-अलग जोन में बांटा गया है। इसलिए किसी भी जगह ड्रोन उड़ाने से पहले यह पता करना जरूरी है कि वह क्षेत्र किस कैटेगरी में आता है।
ग्रीन जोन:
ग्रीन जोन में सामान्य परिस्थितियों में ड्रोन उड़ाने की अनुमति होती है। इसमें कई खुले और सामान्य क्षेत्र शामिल हो सकते हैं। हालांकि ड्रोन के वजन और कैटेगरी के अनुसार अलग-अलग नियम लागू होते हैं। नियमों के तहत निर्धारित सीमा के भीतर उड़ान के लिए अलग से अनुमति की जरूरत नहीं होती।
येलो जोन:
येलो जोन नियंत्रित एयरस्पेस होता है। एयरपोर्ट और कुछ अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास ऐसे क्षेत्र बनाए जा सकते हैं। यहां ड्रोन उड़ाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति लेना जरूरी हो सकता है।
रेड जोन:
रेड जोन सबसे ज्यादा प्रतिबंधित क्षेत्र होता है। इसमें सैन्य प्रतिष्ठान, अंतरराष्ट्रीय सीमा और हाई-सिक्योरिटी वाले कुछ महत्वपूर्ण स्थान शामिल हो सकते हैं। यहां बिना संबंधित सरकारी अनुमति के ड्रोन उड़ाने की इजाजत नहीं होती।
उड़ान से पहले Digital Sky मैप जरूर देखें
ड्रोन उड़ाने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी इलाके का जोन हमेशा एक जैसा नहीं रहता। चुनाव, बड़े खेल आयोजन, VVIP दौरे, राष्ट्रीय कार्यक्रम या किसी विशेष सुरक्षा स्थिति के दौरान किसी क्षेत्र में अस्थायी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
इसलिए जिस जगह ड्रोन उड़ाना है, वहां उड़ान भरने से ठीक पहले संबंधित एयरस्पेस जोन की जानकारी जांचना बेहद जरूरी है।
प्रतिबंधित इलाके में पहुंचा ड्रोन तो कैसे होती है निगरानी?
अगर कोई अनधिकृत ड्रोन प्रतिबंधित एयरस्पेस में प्रवेश करता है, तो सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी होता है कि ड्रोन वास्तव में कहां है और उसे कौन ऑपरेट कर रहा है।
काउंटर-ड्रोन तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी संदिग्ध ड्रोन को लेकर सिर्फ उसे देख लेना पर्याप्त नहीं होता। सुरक्षा एजेंसियों को उसकी लोकेशन, उड़ान की दिशा, ऊंचाई और संभावित ऑपरेटर जैसी जानकारी जुटानी होती है।
इसके लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी सेंसिंग, ड्रोन आइडेंटिफिकेशन और अन्य निगरानी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि हर ड्रोन में ऐसी पहचान प्रणाली समान रूप से उपलब्ध या लागू हो, यह जरूरी नहीं है।
सबसे चुनौतीपूर्ण सवाल ड्रोन की मंशा को समझना होता है। हो सकता है कोई व्यक्ति गलती से प्रतिबंधित क्षेत्र में ड्रोन ले गया हो, जबकि किसी दूसरे मामले में ड्रोन जानबूझकर किसी संवेदनशील स्थान की ओर भेजा गया हो। दोनों परिस्थितियों में जोखिम का आकलन अलग तरीके से किया जाता है।
इसी वजह से आधुनिक काउंटर-ड्रोन सिस्टम में ड्रोन को पहले डिटेक्ट किया जाता है, फिर ट्रैक और आइडेंटिफाई किया जाता है और उसके व्यवहार का आकलन करने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाती है।
नियम तोड़े तो हो सकती है कार्रवाई
ड्रोन उड़ाने के नियमों का उल्लंघन करना महंगा पड़ सकता है। मामले की प्रकृति और उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर जुर्माना, ड्रोन जब्त होने जैसी कार्रवाई हो सकती है। गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई के साथ जेल की सजा तक का प्रावधान हो सकता है।
इसलिए सिर्फ यह सोचकर ड्रोन न उड़ाएं कि आप खुले इलाके में हैं और कोई समस्या नहीं होगी। ड्रोन की कैटेगरी, वजन, उड़ान की ऊंचाई, स्थान और इस्तेमाल के उद्देश्य के आधार पर नियम बदल सकते हैं।
ड्रोन उड़ाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप ड्रोन उड़ाने की तैयारी कर रहे हैं तो सबसे पहले उसके वजन और कैटेगरी की जानकारी लें। लागू नियमों के अनुसार जरूरी होने पर ड्रोन का रजिस्ट्रेशन और UIN जैसी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करें।
कमर्शियल इस्तेमाल या संबंधित कैटेगरी में उड़ान भरने के लिए आवश्यक रिमोट पायलट ट्रेनिंग और प्रमाणन की जरूरत हो सकती है। हर उड़ान से पहले एयरस्पेस की स्थिति जांचना भी जरूरी है।
खास तौर पर चुनाव, त्योहार, बड़े कार्यक्रम या VVIP मूवमेंट के दौरान पुराने अनुभव के आधार पर यह न मानें कि कोई इलाका पहले की तरह ही ग्रीन जोन में है।
ड्रोन खरीदने पर कितना खर्च आता है?
ड्रोन की कीमत उसकी कैटेगरी और कैमरा फीचर्स के हिसाब से काफी अलग-अलग होती है। शुरुआती स्तर के कैमरा ड्रोन अपेक्षाकृत कम कीमत में मिल जाते हैं, जबकि वेडिंग शूट और प्रोफेशनल वीडियोग्राफी के लिए इस्तेमाल होने वाले मॉडल काफी महंगे हो सकते हैं।
DJI Mini सीरीज जैसे हल्के ड्रोन शुरुआती यूजर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के बीच लोकप्रिय हैं। वहीं ज्यादा कैमरा क्षमता, बेहतर स्टेबिलिटी और लंबे फ्लाइट टाइम वाले मॉडल प्रोफेशनल फोटोग्राफर्स और वीडियोग्राफर्स इस्तेमाल करते हैं।
ध्यान रखें कि ड्रोन की खरीद कीमत ही पूरा खर्च नहीं है। जरूरत के अनुसार रजिस्ट्रेशन, ट्रेनिंग, इंश्योरेंस और दूसरे अनुपालन खर्च भी अलग से हो सकते हैं।
इसलिए अगली बार शादी, खेत, रील या प्रॉपर्टी शूट के लिए ड्रोन उड़ाने से पहले सिर्फ बैटरी चार्ज और कैमरा सेटिंग ही न देखें—सबसे पहले यह जांचें कि उस जगह ड्रोन उड़ाने की अनुमति है या नहीं।
आज के समय में ड्रोन आम जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं। शादी समारोहों की वीडियोग्राफी से लेकर सोशल मीडिया रील्स, खेती, जमीन के सर्वे और रियल एस्टेट शूट तक, अलग-अलग कामों के लिए ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ड्रोन उड़ाने के लिए भी कई नियम बनाए गए हैं और इनका उल्लंघन करने पर कार्रवाई हो सकती है?
मान लीजिए पंजाब में किसी शादी समारोह के दौरान परिवार का कोई सदस्य करीब 50 हजार रुपये का कैमरा ड्रोन उड़ाकर शादी के खूबसूरत एरियल शॉट लेने की कोशिश करता है। सब कुछ ठीक चल रहा है, लेकिन उड़ते-उड़ते ड्रोन किसी एयरबेस या संवेदनशील इलाके के प्रतिबंधित क्षेत्र में पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में सिर्फ वीडियो बनाने की कोशिश करने वाला व्यक्ति ही नहीं, बल्कि ड्रोन की पूरी उड़ान जांच के दायरे में आ सकती है।
तेजी से बढ़ रहा है ड्रोन का इस्तेमाल
भारत में ड्रोन का इस्तेमाल पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से बढ़ा है। फरवरी 2026 तक देश में करीब 40,000 रजिस्टर्ड ड्रोन और लगभग इतने ही DGCA से प्रमाणित रिमोट पायलट होने की जानकारी सामने आई थी। इसके अलावा देश में करीब 244 अप्रूव्ड ड्रोन ट्रेनिंग स्कूल भी मौजूद हैं।
अब ड्रोन सिर्फ फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी तक सीमित नहीं हैं। किसान इनका इस्तेमाल खेतों में कीटनाशक और दूसरी कृषि सामग्री के छिड़काव के लिए कर रहे हैं। प्रॉपर्टी से जुड़े कारोबारी जमीन और इमारतों के एरियल वीडियो तैयार कर रहे हैं। वहीं कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स शानदार वीडियो और रील्स के लिए ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
समस्या यह है कि ड्रोन की संख्या और इस्तेमाल तो बढ़ रहा है, लेकिन इनके संचालन से जुड़े नियमों की जानकारी अभी भी बहुत से लोगों को नहीं है।
एयरस्पेस को तीन प्रमुख जोन में बांटा गया है
भारत में ड्रोन उड़ाने के लिए एयरस्पेस को अलग-अलग जोन में बांटा गया है। इसलिए किसी भी जगह ड्रोन उड़ाने से पहले यह पता करना जरूरी है कि वह क्षेत्र किस कैटेगरी में आता है।
ग्रीन जोन:
ग्रीन जोन में सामान्य परिस्थितियों में ड्रोन उड़ाने की अनुमति होती है। इसमें कई खुले और सामान्य क्षेत्र शामिल हो सकते हैं। हालांकि ड्रोन के वजन और कैटेगरी के अनुसार अलग-अलग नियम लागू होते हैं। नियमों के तहत निर्धारित सीमा के भीतर उड़ान के लिए अलग से अनुमति की जरूरत नहीं होती।
येलो जोन:
येलो जोन नियंत्रित एयरस्पेस होता है। एयरपोर्ट और कुछ अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास ऐसे क्षेत्र बनाए जा सकते हैं। यहां ड्रोन उड़ाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति लेना जरूरी हो सकता है।
रेड जोन:
रेड जोन सबसे ज्यादा प्रतिबंधित क्षेत्र होता है। इसमें सैन्य प्रतिष्ठान, अंतरराष्ट्रीय सीमा और हाई-सिक्योरिटी वाले कुछ महत्वपूर्ण स्थान शामिल हो सकते हैं। यहां बिना संबंधित सरकारी अनुमति के ड्रोन उड़ाने की इजाजत नहीं होती।
उड़ान से पहले Digital Sky मैप जरूर देखें
ड्रोन उड़ाने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी इलाके का जोन हमेशा एक जैसा नहीं रहता। चुनाव, बड़े खेल आयोजन, VVIP दौरे, राष्ट्रीय कार्यक्रम या किसी विशेष सुरक्षा स्थिति के दौरान किसी क्षेत्र में अस्थायी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
इसलिए जिस जगह ड्रोन उड़ाना है, वहां उड़ान भरने से ठीक पहले संबंधित एयरस्पेस जोन की जानकारी जांचना बेहद जरूरी है।
प्रतिबंधित इलाके में पहुंचा ड्रोन तो कैसे होती है निगरानी?
अगर कोई अनधिकृत ड्रोन प्रतिबंधित एयरस्पेस में प्रवेश करता है, तो सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी होता है कि ड्रोन वास्तव में कहां है और उसे कौन ऑपरेट कर रहा है।
काउंटर-ड्रोन तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी संदिग्ध ड्रोन को लेकर सिर्फ उसे देख लेना पर्याप्त नहीं होता। सुरक्षा एजेंसियों को उसकी लोकेशन, उड़ान की दिशा, ऊंचाई और संभावित ऑपरेटर जैसी जानकारी जुटानी होती है।
इसके लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी सेंसिंग, ड्रोन आइडेंटिफिकेशन और अन्य निगरानी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि हर ड्रोन में ऐसी पहचान प्रणाली समान रूप से उपलब्ध या लागू हो, यह जरूरी नहीं है।
सबसे चुनौतीपूर्ण सवाल ड्रोन की मंशा को समझना होता है। हो सकता है कोई व्यक्ति गलती से प्रतिबंधित क्षेत्र में ड्रोन ले गया हो, जबकि किसी दूसरे मामले में ड्रोन जानबूझकर किसी संवेदनशील स्थान की ओर भेजा गया हो। दोनों परिस्थितियों में जोखिम का आकलन अलग तरीके से किया जाता है।
इसी वजह से आधुनिक काउंटर-ड्रोन सिस्टम में ड्रोन को पहले डिटेक्ट किया जाता है, फिर ट्रैक और आइडेंटिफाई किया जाता है और उसके व्यवहार का आकलन करने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाती है।
नियम तोड़े तो हो सकती है कार्रवाई
ड्रोन उड़ाने के नियमों का उल्लंघन करना महंगा पड़ सकता है। मामले की प्रकृति और उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर जुर्माना, ड्रोन जब्त होने जैसी कार्रवाई हो सकती है। गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई के साथ जेल की सजा तक का प्रावधान हो सकता है।
इसलिए सिर्फ यह सोचकर ड्रोन न उड़ाएं कि आप खुले इलाके में हैं और कोई समस्या नहीं होगी। ड्रोन की कैटेगरी, वजन, उड़ान की ऊंचाई, स्थान और इस्तेमाल के उद्देश्य के आधार पर नियम बदल सकते हैं।
ड्रोन उड़ाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप ड्रोन उड़ाने की तैयारी कर रहे हैं तो सबसे पहले उसके वजन और कैटेगरी की जानकारी लें। लागू नियमों के अनुसार जरूरी होने पर ड्रोन का रजिस्ट्रेशन और UIN जैसी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करें।
कमर्शियल इस्तेमाल या संबंधित कैटेगरी में उड़ान भरने के लिए आवश्यक रिमोट पायलट ट्रेनिंग और प्रमाणन की जरूरत हो सकती है। हर उड़ान से पहले एयरस्पेस की स्थिति जांचना भी जरूरी है।
खास तौर पर चुनाव, त्योहार, बड़े कार्यक्रम या VVIP मूवमेंट के दौरान पुराने अनुभव के आधार पर यह न मानें कि कोई इलाका पहले की तरह ही ग्रीन जोन में है।
ड्रोन खरीदने पर कितना खर्च आता है?
ड्रोन की कीमत उसकी कैटेगरी और कैमरा फीचर्स के हिसाब से काफी अलग-अलग होती है। शुरुआती स्तर के कैमरा ड्रोन अपेक्षाकृत कम कीमत में मिल जाते हैं, जबकि वेडिंग शूट और प्रोफेशनल वीडियोग्राफी के लिए इस्तेमाल होने वाले मॉडल काफी महंगे हो सकते हैं।
DJI Mini सीरीज जैसे हल्के ड्रोन शुरुआती यूजर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के बीच लोकप्रिय हैं। वहीं ज्यादा कैमरा क्षमता, बेहतर स्टेबिलिटी और लंबे फ्लाइट टाइम वाले मॉडल प्रोफेशनल फोटोग्राफर्स और वीडियोग्राफर्स इस्तेमाल करते हैं।
ध्यान रखें कि ड्रोन की खरीद कीमत ही पूरा खर्च नहीं है। जरूरत के अनुसार रजिस्ट्रेशन, ट्रेनिंग, इंश्योरेंस और दूसरे अनुपालन खर्च भी अलग से हो सकते हैं।
इसलिए अगली बार शादी, खेत, रील या प्रॉपर्टी शूट के लिए ड्रोन उड़ाने से पहले सिर्फ बैटरी चार्ज और कैमरा सेटिंग ही न देखें—सबसे पहले यह जांचें कि उस जगह ड्रोन उड़ाने की अनुमति है या नहीं।
आज के समय में ड्रोन आम जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं। शादी समारोहों की वीडियोग्राफी से लेकर सोशल मीडिया रील्स, खेती, जमीन के सर्वे और रियल एस्टेट शूट तक, अलग-अलग कामों के लिए ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ड्रोन उड़ाने के लिए भी कई नियम बनाए गए हैं और इनका उल्लंघन करने पर कार्रवाई हो सकती है?
मान लीजिए पंजाब में किसी शादी समारोह के दौरान परिवार का कोई सदस्य करीब 50 हजार रुपये का कैमरा ड्रोन उड़ाकर शादी के खूबसूरत एरियल शॉट लेने की कोशिश करता है। सब कुछ ठीक चल रहा है, लेकिन उड़ते-उड़ते ड्रोन किसी एयरबेस या संवेदनशील इलाके के प्रतिबंधित क्षेत्र में पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में सिर्फ वीडियो बनाने की कोशिश करने वाला व्यक्ति ही नहीं, बल्कि ड्रोन की पूरी उड़ान जांच के दायरे में आ सकती है।
तेजी से बढ़ रहा है ड्रोन का इस्तेमाल
भारत में ड्रोन का इस्तेमाल पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से बढ़ा है। फरवरी 2026 तक देश में करीब 40,000 रजिस्टर्ड ड्रोन और लगभग इतने ही DGCA से प्रमाणित रिमोट पायलट होने की जानकारी सामने आई थी। इसके अलावा देश में करीब 244 अप्रूव्ड ड्रोन ट्रेनिंग स्कूल भी मौजूद हैं।
अब ड्रोन सिर्फ फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी तक सीमित नहीं हैं। किसान इनका इस्तेमाल खेतों में कीटनाशक और दूसरी कृषि सामग्री के छिड़काव के लिए कर रहे हैं। प्रॉपर्टी से जुड़े कारोबारी जमीन और इमारतों के एरियल वीडियो तैयार कर रहे हैं। वहीं कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स शानदार वीडियो और रील्स के लिए ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
समस्या यह है कि ड्रोन की संख्या और इस्तेमाल तो बढ़ रहा है, लेकिन इनके संचालन से जुड़े नियमों की जानकारी अभी भी बहुत से लोगों को नहीं है।
एयरस्पेस को तीन प्रमुख जोन में बांटा गया है
भारत में ड्रोन उड़ाने के लिए एयरस्पेस को अलग-अलग जोन में बांटा गया है। इसलिए किसी भी जगह ड्रोन उड़ाने से पहले यह पता करना जरूरी है कि वह क्षेत्र किस कैटेगरी में आता है।
ग्रीन जोन:
ग्रीन जोन में सामान्य परिस्थितियों में ड्रोन उड़ाने की अनुमति होती है। इसमें कई खुले और सामान्य क्षेत्र शामिल हो सकते हैं। हालांकि ड्रोन के वजन और कैटेगरी के अनुसार अलग-अलग नियम लागू होते हैं। नियमों के तहत निर्धारित सीमा के भीतर उड़ान के लिए अलग से अनुमति की जरूरत नहीं होती।
येलो जोन:
येलो जोन नियंत्रित एयरस्पेस होता है। एयरपोर्ट और कुछ अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास ऐसे क्षेत्र बनाए जा सकते हैं। यहां ड्रोन उड़ाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति लेना जरूरी हो सकता है।
रेड जोन:
रेड जोन सबसे ज्यादा प्रतिबंधित क्षेत्र होता है। इसमें सैन्य प्रतिष्ठान, अंतरराष्ट्रीय सीमा और हाई-सिक्योरिटी वाले कुछ महत्वपूर्ण स्थान शामिल हो सकते हैं। यहां बिना संबंधित सरकारी अनुमति के ड्रोन उड़ाने की इजाजत नहीं होती।
उड़ान से पहले Digital Sky मैप जरूर देखें
ड्रोन उड़ाने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी इलाके का जोन हमेशा एक जैसा नहीं रहता। चुनाव, बड़े खेल आयोजन, VVIP दौरे, राष्ट्रीय कार्यक्रम या किसी विशेष सुरक्षा स्थिति के दौरान किसी क्षेत्र में अस्थायी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
इसलिए जिस जगह ड्रोन उड़ाना है, वहां उड़ान भरने से ठीक पहले संबंधित एयरस्पेस जोन की जानकारी जांचना बेहद जरूरी है।
प्रतिबंधित इलाके में पहुंचा ड्रोन तो कैसे होती है निगरानी?
अगर कोई अनधिकृत ड्रोन प्रतिबंधित एयरस्पेस में प्रवेश करता है, तो सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी होता है कि ड्रोन वास्तव में कहां है और उसे कौन ऑपरेट कर रहा है।
काउंटर-ड्रोन तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी संदिग्ध ड्रोन को लेकर सिर्फ उसे देख लेना पर्याप्त नहीं होता। सुरक्षा एजेंसियों को उसकी लोकेशन, उड़ान की दिशा, ऊंचाई और संभावित ऑपरेटर जैसी जानकारी जुटानी होती है।
इसके लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी सेंसिंग, ड्रोन आइडेंटिफिकेशन और अन्य निगरानी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि हर ड्रोन में ऐसी पहचान प्रणाली समान रूप से उपलब्ध या लागू हो, यह जरूरी नहीं है।
सबसे चुनौतीपूर्ण सवाल ड्रोन की मंशा को समझना होता है। हो सकता है कोई व्यक्ति गलती से प्रतिबंधित क्षेत्र में ड्रोन ले गया हो, जबकि किसी दूसरे मामले में ड्रोन जानबूझकर किसी संवेदनशील स्थान की ओर भेजा गया हो। दोनों परिस्थितियों में जोखिम का आकलन अलग तरीके से किया जाता है।
इसी वजह से आधुनिक काउंटर-ड्रोन सिस्टम में ड्रोन को पहले डिटेक्ट किया जाता है, फिर ट्रैक और आइडेंटिफाई किया जाता है और उसके व्यवहार का आकलन करने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाती है।
नियम तोड़े तो हो सकती है कार्रवाई
ड्रोन उड़ाने के नियमों का उल्लंघन करना महंगा पड़ सकता है। मामले की प्रकृति और उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर जुर्माना, ड्रोन जब्त होने जैसी कार्रवाई हो सकती है। गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई के साथ जेल की सजा तक का प्रावधान हो सकता है।
इसलिए सिर्फ यह सोचकर ड्रोन न उड़ाएं कि आप खुले इलाके में हैं और कोई समस्या नहीं होगी। ड्रोन की कैटेगरी, वजन, उड़ान की ऊंचाई, स्थान और इस्तेमाल के उद्देश्य के आधार पर नियम बदल सकते हैं।
ड्रोन उड़ाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप ड्रोन उड़ाने की तैयारी कर रहे हैं तो सबसे पहले उसके वजन और कैटेगरी की जानकारी लें। लागू नियमों के अनुसार जरूरी होने पर ड्रोन का रजिस्ट्रेशन और UIN जैसी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करें।
कमर्शियल इस्तेमाल या संबंधित कैटेगरी में उड़ान भरने के लिए आवश्यक रिमोट पायलट ट्रेनिंग और प्रमाणन की जरूरत हो सकती है। हर उड़ान से पहले एयरस्पेस की स्थिति जांचना भी जरूरी है।
खास तौर पर चुनाव, त्योहार, बड़े कार्यक्रम या VVIP मूवमेंट के दौरान पुराने अनुभव के आधार पर यह न मानें कि कोई इलाका पहले की तरह ही ग्रीन जोन में है।
ड्रोन खरीदने पर कितना खर्च आता है?
ड्रोन की कीमत उसकी कैटेगरी और कैमरा फीचर्स के हिसाब से काफी अलग-अलग होती है। शुरुआती स्तर के कैमरा ड्रोन अपेक्षाकृत कम कीमत में मिल जाते हैं, जबकि वेडिंग शूट और प्रोफेशनल वीडियोग्राफी के लिए इस्तेमाल होने वाले मॉडल काफी महंगे हो सकते हैं।
DJI Mini सीरीज जैसे हल्के ड्रोन शुरुआती यूजर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के बीच लोकप्रिय हैं। वहीं ज्यादा कैमरा क्षमता, बेहतर स्टेबिलिटी और लंबे फ्लाइट टाइम वाले मॉडल प्रोफेशनल फोटोग्राफर्स और वीडियोग्राफर्स इस्तेमाल करते हैं।
ध्यान रखें कि ड्रोन की खरीद कीमत ही पूरा खर्च नहीं है। जरूरत के अनुसार रजिस्ट्रेशन, ट्रेनिंग, इंश्योरेंस और दूसरे अनुपालन खर्च भी अलग से हो सकते हैं।
इसलिए अगली बार शादी, खेत, रील या प्रॉपर्टी शूट के लिए ड्रोन उड़ाने से पहले सिर्फ बैटरी चार्ज और कैमरा सेटिंग ही न देखें—सबसे पहले यह जांचें कि उस जगह ड्रोन उड़ाने की अनुमति है या नहीं।

