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किऊल-झाझा तीसरी लाइन परियोजना को स्वीकृति, बिहार के सीएम सम्राट ने पीएम मोदी का जताया आभार

पटना, 26 मई (आईएएनएस)। भारतीय रेलवे ने हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर पर 962 करोड़ रुपए की लागत वाली किऊल-झाझा तीसरी लाइन परियोजना (54 किलोमीटर) को स्वीकृति दे दी है। इसका उद्देश्य क्षमता बढ़ाने, परिचालन क्षमता में सुधार और निर्बाध रेल परिवहन सुनिश्चित करने की दिशा में रेलवे की प्रतिबद्धता और मजबूत करना है।
किऊल-झाझा तीसरी लाइन परियोजना को स्वीकृति, बिहार के सीएम सम्राट ने पीएम मोदी का जताया आभार

पटना, 26 मई (आईएएनएस)। भारतीय रेलवे ने हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर पर 962 करोड़ रुपए की लागत वाली किऊल-झाझा तीसरी लाइन परियोजना (54 किलोमीटर) को स्वीकृति दे दी है। इसका उद्देश्‍य क्षमता बढ़ाने, परिचालन क्षमता में सुधार और निर्बाध रेल परिवहन सुनिश्चित करने की दिशा में रेलवे की प्रतिबद्धता और मजबूत करना है।

इसको लेकर बिहार के सीएम सम्राट चौधरी ने पीएम नरेंद्र मोदी का आभार जताया है।

सीएम सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, "बिहार के रेल यात्रियों को बड़ी सौगात। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि केंद्र सरकार ने किऊल-झाझा के मध्य तीसरी रेल लाइन के निर्माण कार्य को स्वीकृति दी है। यह परियोजना 961.71 करोड़ रुपए की लागत से पूरी होगी। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं रेल मंत्री अश्विनी वैष्ण का हृदय से आभार।"

उन्होंने आगे कहा कि यह महत्वपूर्ण परियोजना बिहार में रेल अवसंरचना को नई मजबूती प्रदान करेगी, यातायात सुगम होगा, उद्योग एवं व्यापार को गति मिलेगी तथा राज्य की आर्थिक प्रगति को नया आयाम मिलेगा। डबल इंजन सरकार में बिहार निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है।

बता दें कि यह परियोजना भारतीय रेलवे के अति व्यस्त यातायात वाले नेटवर्क का महत्वपूर्ण भाग है और इससे पूर्वी और उत्तरी भारत में यात्रियों के आवागमन और माल ढुलाई दोनों की स्थिति सुदृढ़ होने की उम्मीद है।

दावा किया गया है कि किऊल-झाझा तीसरी लाइन परियोजना से हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर पर परिवहन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और रेल सेवाओं की समयबद्धता तथा परिचालन की सामर्थ्य में सुधार होगा।

अतिरिक्त रेल लाइन से सवारी गाड़ियों और मालगाड़ियों की सुचारू रूप से आवाजाही सुनिश्चित होगी और इसके साथ ही क्षेत्र में औद्योगिक विकास और व्यापारिक संपर्क में सहायता मिलेगी।

प्रस्तावित 54 किलोमीटर लंबी तीसरी लाइन परियोजना से इस लाइन की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा, भीड़ कम होगी तथा सवारी गाड़ियों और मालगाड़ियों की सुगम आवाजाही सुनिश्चित होगी। इस परियोजना से पटना और कोलकाता के बीच संपर्क और मजबूत होगा। साथ ही, इससे उत्तरी और पूर्वी भारत के प्रमुख औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों के बीच माल ढुलाई भी सुगम होगी।

--आईएएनएस

एमएनपी/एएसएच

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