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फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो किश्तवाड़ कांड की सुनवाई, मिले फांसी की सजा: रणबीर पठानिया

फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो किश्तवाड़ कांड की सुनवाई, मिले फांसी की सजा: रणबीर पठानिया
फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो किश्तवाड़ कांड की सुनवाई, मिले फांसी की सजा: रणबीर पठानिया

जम्मू, 29 अगस्त (आईएएनएस)। किश्तवाड़ मामले में महबूबा मुफ्ती की ओर से सीबीआई जांच की मांग पर भाजपा विधायक रणबीर सिंह पठानिया ने कहा कि पीड़ित परिवार के साथ पूरी संवेदना है। आरोपी शिक्षक ने गुरु-शिष्य के रिश्ते को बदनाम किया है। भाजपा नेता ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों से मामले का खुलासा किया है, अब जल्द चालान कर फास्ट ट्रैक कोर्ट में ऐसी सजा होनी चाहिए जो देश-दुनिया के लिए मिसाल बने।

भाजपा विधायक रणबीर सिंह पठानिया ने किश्तवाड़ मामले में महबूबा मुफ्ती की सीबीआई जांच की मांग को लेकर कहा, "पीड़ित परिवार के साथ पूरी संवेदना है। इस घटना के बारे में जिस किसी ने भी सुना है, उसकी रूह कांप गई। इस घटना ने हैरान कर दिया कि कोई इंसान जो पेशे से शिक्षक हो, उसने गुरु-शिष्य के संबंध को बदनाम किया ही, समाज और क्षेत्र को भी बदनाम किया। इस घटना में कई लोगों की संलिप्तता पाई गई। इसका खुलासा हो चुका है। अब जो प्रक्रिया है, जल्द से जल्द चालान करके फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाना है।"

उन्होंने आगे कहा कि स्थानीय पुलिस ने बड़ी मेहनत और कोशिशों के साथ, वैज्ञानिक साक्ष्य का इस्तेमाल करके खुलासा किया है। जल्द से जल्द इसका चलान हो और फास्ट ट्रैक कोर्ट में रिकॉर्ड समय में सजा दी जाए। इस केस में सजा सिर्फ जम्मू-कश्मीर ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए रोल मॉडल हो। देश-दुनिया को एक संदेश देना बहुत जरूरी है कि जम्मू-कश्मीर की बेटियां और महिलाएं सुरक्षित हैं। मैं फिर से कहूंगा कि सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। संभव हो तो फांसी की सजा मिलनी चाहिए।

समय रैना और शेरोन वर्मा के विवाद पर उन्होंने कहा, "सस्ती टीआरपी के लिए कई बार कमीडियन सीमा लांघ जाते हैं। एक ताजा उदाहरण है लक्ष्मण की, जो पिछले 30-40 साल से प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति समेत तमाम लोगों पर तीखा-टिप्पणी करते थे। कई लोगों को ऐसी आदत थी, कि उनकी कॉपी के बिना नाश्ता नहीं कर पाते थे। इन लोगों को उनसे सबक लेनी चाहिए।"

भाजपा नेता ने आगे कहा कि एक सीमा जरूर होनी चाहिए। आज के समय में अगर आपको कोई भी बात कहनी है तो पूरी जिम्मेदारी के साथ कहें। कानूनी एक्शन भी ऐसे मामलों में होनी चाहिए। तथ्य पर बात करें, घुमाफिरा कर बात नहीं करनी चाहिए।

--आईएएनएस

केके/डीकेपी

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