चीनी की बढ़ती कीमतों पर खड़गे का केंद्र पर हमला, बोले- त्योहारों से पहले सरकार की नीतियों ने घोली मिठास में कड़वाहट
देश में बढ़ती चीनी की कीमतों और घटते स्टॉक को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए चीनी संकट को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए और कहा कि त्योहारों से पहले मोदी सरकार की नीतियों की कड़वाहट चीनी की मिठास में घुल गई है।
खड़गे ने अपने पोस्ट में कहा कि भारत दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है, इसके बावजूद देश में चीनी का स्टॉक करीब 9 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी कि सरकार को चीनी का आयात करने का फैसला लेना पड़ा।
कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार से सवाल करते हुए कहा कि यह कैसा आत्मनिर्भर भारत है, जहां एक तरफ विदेश से चीनी मंगाने की नौबत आ रही है और दूसरी तरफ गन्ने का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर एथेनॉल उत्पादन के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि अगर देश में पर्याप्त चीनी उत्पादन हो रहा था तो फिर 10 लाख टन रॉ शुगर को बिना ड्यूटी आयात करने की जरूरत क्यों पड़ी। खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण आम लोगों पर महंगाई का बोझ बढ़ रहा है।
दरअसल, देश के कई शहरों में चीनी की कीमतें बढ़कर करीब 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि पिछले तीन महीनों में चीनी के दामों में लगभग 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान कीमत करीब 19 रुपये प्रति किलो तक बढ़ने का दावा किया गया है।
बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर के ड्यूटी फ्री आयात को मंजूरी दी है। सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाकर कीमतों पर नियंत्रण करना है।
चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे उत्पादन, स्टॉक, निर्यात नीति और एथेनॉल ब्लेंडिंग जैसे कई कारणों पर चर्चा हो रही है। सरकार की ओर से लगातार एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसका उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना बताया जाता है।
वहीं विपक्ष का कहना है कि सरकार को पहले घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता और आम उपभोक्ताओं के हितों पर ध्यान देना चाहिए। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए हैं।
फिलहाल चीनी की बढ़ती कीमतें और आयात का फैसला राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और सार्वजनिक मंचों पर और गरमा सकता है।

