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खड़गे के विवादित बयान पर गुरु प्रकाश पासवान बोले, कांग्रेस की भाषा लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ

खड़गे के विवादित बयान पर गुरु प्रकाश पासवान बोले, कांग्रेस की भाषा लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ
खड़गे के विवादित बयान पर गुरु प्रकाश पासवान बोले, कांग्रेस की भाषा लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ

नई दिल्ली, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के विवादित बयान पर भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष के बयान को निम्न स्तर की राजनीति करार देते हुए पार्टी से तुरंत माफी मांगने की अपील की।

गुरु प्रकाश पासवान ने कहा, "ये निम्न स्तर की राजनीति है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा इस प्रकार के शब्दों का प्रयोग, वह भी एक बार नहीं बल्कि तीन बार, बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। एक बिहारवासी होने के नाते हम सभी स्तब्ध हैं। बिहार लोकतंत्र की जननी और एक पावन धरती है और वहां इस तरह के शब्दों का प्रयोग किया गया, लेकिन यह पहली बार नहीं है।"

उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी कांग्रेस पार्टी के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए भी अपमानजनक शब्दों का उपयोग किया गया था। मर्यादा की सीमाओं का उल्लंघन किया गया था। राजनीति में विरोध स्वाभाविक है, लेकिन इस प्रकार की भाषा का प्रयोग निंदनीय है। राजनीतिक क्षेत्र में कार्य करने वाला प्रत्येक कार्यकर्ता इससे शर्मसार है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि एक पिछड़ी जाति का व्यक्ति इस देश का प्रधानमंत्री बन गया है, शायद यही बात उन्हें स्वीकार नहीं हो रही है। शब्द भले ही खड़गे जी के हों, लेकिन यह विचारधारा प्रियंका गांधी और राहुल गांधी की प्रतीत होती है। कांग्रेस पार्टी को तुरंत माफी मांगनी चाहिए और इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।

प्रधानमंत्री के माता-पिता को लेकर इस प्रकार की टिप्पणी के खिलाफ कार्रवाई को लेकर गुरु प्रकाश पासवान ने कहा कि जनता सब कुछ देखती है। आप कुछ भी कह दें और फिर आगे बढ़ जाएं, ऐसा नहीं होता। कांग्रेस पार्टी का चाल, चरित्र और चेहरा आज सबके सामने है। आंदोलनों में जिस प्रकार की भाषा का उपयोग किया जा रहा है, वह बेहद चिंताजनक है। बाबा साहेब आंबेडकर कहा करते थे कि अराजकता का व्याकरण लोकतंत्र के लिए घातक होता है। कांग्रेस के लोग उसी अराजकता को बढ़ावा दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि चाहे राहुल गांधी हों, उनकी नई सहयोगी नेहा बोरा हों, प्रशांत भूषण हों, संजय राउत हों या अब मल्लिकार्जुन खड़गे, आपसे ऐसी अपेक्षा नहीं थी। दशकों से राजनीति में सक्रिय रहने के बावजूद यदि आप एक अति पिछड़ी जाति के व्यक्ति के लिए इस तरह के संदर्भ और शब्दों का प्रयोग करते हैं तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि उन्होंने बार-बार वही शब्द कहा। आखिर इसका अर्थ क्या है? क्या वे लोगों को डराना चाहते हैं? कांग्रेस पार्टी आखिर चाहती क्या है? जैसा नेता करता है, वैसा ही कार्यकर्ता सीखता है। यदि नेता इस प्रकार की भाषा का प्रयोग करेगा, तो सोचिए कार्यकर्ताओं को कितना प्रोत्साहन मिलेगा। यह दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है।

फारूक अब्दुल्ला के बयान पर उन्होंने कहा कि विचित्र बात है। यह हमारी समझ से परे है। अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद जम्मू-कश्मीर में विकास की नई धारा बह रही है। संस्थागत विकास हो रहा है, आतंकवादी घटनाओं में उल्लेखनीय गिरावट आई है लेकिन इसके बावजूद यदि आपको यह दिखाई नहीं देता तो यह आश्चर्य की बात है। आप राजनीति में हैं, पार्टी की राजनीति कीजिए। घरेलू राजनीति के मुद्दों पर बात कीजिए, लेकिन इस प्रकार की असंवेदनशीलता का उदाहरण प्रस्तुत करना और इस तरह के नाम लेना उचित नहीं है।

--आईएएनएस

केके/वीसी

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