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केरल में राज्यपाल आवास के भोजन विवाद पर राजीव चंद्रशेखर का कांग्रेस पर निशाना, बोले- मूर्खता की हद पार कर चुकी है ये पार्टी

केरल में राज्यपाल आवास के भोजन विवाद पर राजीव चंद्रशेखर का कांग्रेस पर निशाना, बोले- मूर्खता की हद पार कर चुकी है ये पार्टी
केरल में राज्यपाल आवास के भोजन विवाद पर राजीव चंद्रशेखर का कांग्रेस पर निशाना, बोले- मूर्खता की हद पार कर चुकी है ये पार्टी

तिरुवनंतपुरम, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। केरल के राज्यपाल आवास (लोक भवन) में भोजन व्यवस्था को लेकर चल रहे विवाद के बीच भाजपा नेता राजीव चंद्रशेखर ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि यह तय करना पूरी तरह राज्यपाल का अधिकार है कि उनके निवास पर उनके लिए किस प्रकार का भोजन तैयार और परोसा जाएगा।

राजीव चंद्रशेखर ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "क्या अब कांग्रेस पार्टी यह भी कहेगी कि किसी मुस्लिम मलयाली के घर जाकर उनसे पोर्क मांगा जाए? किसी घर में रहने वाले व्यक्ति का यह अधिकार होता है कि वहां उसकी संस्कृति और उसकी पसंद के अनुसार भोजन परोसा जाए। इस मामले में लोक भवन में रहने वाले केरल के राज्यपाल यह तय करने के हकदार हैं कि उनके लिए किस प्रकार का भोजन परोसा जाएगा।"

उन्होंने आगे लिखा कि कांग्रेस पार्टी ने पूरी तरह अपना विवेक खो दिया है और मूर्खता की हद पार कर चुकी है। वीडी सतीशन की सरकार के 150 दिन पूरे हो चुके हैं और लोग पूछ रहे हैं, 'हमें क्या मिला?' पांच गारंटियों का क्या हुआ? 'पुथु युग केरलम' का क्या हुआ? इन मुद्दों पर वे एक शब्द भी चर्चा नहीं करना चाहते।

उन्होंने आगे लिखा कि वे केरल के युवाओं की परेशानियों पर बात नहीं करना चाहते। वे उन परिवारों की समस्याओं पर चर्चा नहीं करना चाहते, जो दवाओं की कमी से जूझ रहे हैं, लेकिन वे नए राज्यपाल की खान-पान की आदतों पर बहस करना चाहते हैं। यह भी राहुल गांधी की भ्रामक राजनीति का हिस्सा है। उन्होंने इस राजनीतिक दल को ऐसे लोगों के समूह में बदल दिया है, जो बिना मतलब की बातें करते रहते हैं।

यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब ऐसी खबरें सामने आईं कि केरल के नए राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने राजभवन परिसर में मांसाहारी भोजन पकाने और परोसने पर रोक लगाने का निर्देश दिया है।

हालांकि, बाद में लोक भवन प्रशासन ने स्पष्टीकरण जारी कर कहा कि मांसाहारी भोजन पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। प्रशासन के अनुसार, प्रतिबंध केवल उस रसोई तक सीमित है जहां राज्यपाल के लिए भोजन तैयार किया जाता है, क्योंकि वह सख्त शाकाहारी हैं।

लोक भवन ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों और अन्य लोगों को अपनी पसंद का भोजन लाने और खाने की पूरी स्वतंत्रता है।

इसके बावजूद इस मुद्दे पर राजनीतिक विवाद बढ़ गया। कांग्रेस और माकपा नेताओं ने राज्यपाल के कथित निर्देशों की आलोचना करते हुए इसे व्यक्तिगत भोजन संबंधी पसंद को दूसरों पर थोपने का प्रयास बताया।

कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा था कि केरल की खाद्य संस्कृति विविधतापूर्ण है और लोगों को अपनी पसंद का भोजन चुनने का अधिकार है। वहीं माकपा राज्य सचिव एमवी गोविंदन ने आरोप लगाया कि भोजन को सांप्रदायिक मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रही है।

राज्यपाल आवास की ओर से जारी स्पष्टीकरण के बाद भी यह मामला राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी

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