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केंद्र की नई पहल : डिजिटल कानूनी सहायता से अंडरट्रायल कैदियों को मिलेगा समय पर न्याय

केंद्र की नई पहल : डिजिटल कानूनी सहायता से अंडरट्रायल कैदियों को मिलेगा समय पर न्याय
केंद्र की नई पहल : डिजिटल कानूनी सहायता से अंडरट्रायल कैदियों को मिलेगा समय पर न्याय

मुंबई, 17 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्र सरकार अब डिजिटल कानूनी सहायता सेवाओं को देश के ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इस पहल को लेकर केंद्रीय कानून राज्यमंत्री अर्जुनराम मेघवाल, भारत के उप महाधिवक्ता प्रवीण फलदेसाई और महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोधा ने अपने विचार साझा किए।

केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि सरकार इस दिशा में लगातार प्रयास कर रही है और चाहती है कि इस क्षेत्र में काम कर रहे एनजीओ और ट्रस्ट भी इस अभियान से जुड़ें। संविधान की भावना यही है कि केवल वही व्यक्ति जेल में रहे, जिसे कानून के अनुसार जेल में रहना आवश्यक हो। किसी भी व्यक्ति को अनावश्यक रूप से जेल में नहीं रहना चाहिए।

उन्होंने बताया कि पहले की कानूनी व्यवस्था में कई बार अदालत द्वारा किसी कैदी की रिहाई का आदेश जारी होने के बाद भी वह आदेश जेल अधीक्षक तक पहुंचने में तीन से चार दिन लग जाते थे। इस वजह से कैदियों को बेवजह जेल में रहना पड़ता था। अब डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से इस तरह की देरी को खत्म करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

भारत के उप महाधिवक्ता प्रवीण फलदेसाई ने कहा कि 'दर्द से हमदर्द तक ट्रस्ट' लंबे समय से इस क्षेत्र में काम कर रहा है और वर्षों से सरकार के साथ मिलकर कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है। काम के दौरान यह महसूस हुआ कि मुफ्त कानूनी सहायता की व्यवस्था होने के बावजूद कई विचाराधीन कैदियों (अंडरट्रायल) और दोषियों तक इसका लाभ नहीं पहुंच पा रहा था।

उन्होंने कहा कि इस कमी को दूर करने की जरूरत थी और ट्रस्ट ने अपने प्रयासों से मौजूदा कानूनी सहायता व्यवस्था को मजबूत करने का काम किया है।

महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोधा ने कहा कि अर्जुन राम मेघवाल चाहते हैं कि डिजिटल कानूनी सहायता सेवाएं छोटे गांवों और तहसीलों तक भी पहुंचें। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, जो राज्य के कानून मंत्री भी हैं, इस दिशा में लगातार काम कर रहे हैं।

इस दौरान मंत्री मंगल प्रभात लोधा ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे द्वारा 18 जुलाई को नागपुर में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ 'राम रक्षा स्तोत्र' का पाठ किए जाने पर भी प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा, "यह अच्छी बात है। देर आए, दुरुस्त आए। यह खुशी की बात है कि उद्धव ठाकरे की भगवान राम में आस्था बढ़ी है और वे राम रक्षा स्तोत्र का पाठ कर रहे हैं।"

हालांकि उन्होंने कहा कि किसी एक विशेष घटना के आधार पर भगवान राम को बदनाम करना उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि संबंधित घटना की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है, आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है और सरकार बार-बार यह स्पष्ट कर चुकी है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

--आईएएनएस

वीकेयू/पीएम

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