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कावेरी विवाद: सर्वदलीय बैठक में एकजुट हुए सभी दल, कानूनी सलाह के बाद ही तमिलनाडु को पानी छोड़ने पर होगा अंतिम फैसला

कावेरी विवाद: सर्वदलीय बैठक में एकजुट हुए सभी दल, कानूनी सलाह के बाद ही तमिलनाडु को पानी छोड़ने पर होगा अंतिम फैसला
कावेरी विवाद: सर्वदलीय बैठक में एकजुट हुए सभी दल, कानूनी सलाह के बाद ही तमिलनाडु को पानी छोड़ने पर होगा अंतिम फैसला

बेंगलुरु, 2 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने रविवार को कहा कि तमिलनाडु को कावेरी नदी का पानी छोड़ने के संबंध में राज्य सरकार कोई भी अंतिम निर्णय कानूनी विशेषज्ञों, वरिष्ठ नेताओं और सभी संबंधित पक्षों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही लेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों में सरकार का सर्वोच्च लक्ष्य कर्नाटक और राज्य के किसानों के हितों की रक्षा करना है।

कावेरी जल विवाद और सूखे जैसी स्थिति के बीच तमिलनाडु को पानी छोड़े जाने के मुद्दे पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे "ऐतिहासिक बैठक" बताया।

उन्होंने कहा कि बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, बी.एस. येदियुरप्पा, एच.डी. कुमारस्वामी और बसवराज बोम्मई सहित सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया। केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे, राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य, लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों तथा पूर्व सिंचाई मंत्रियों ने भी बैठक में भाग लिया और राज्य के हितों की रक्षा के लिए सरकार को अपना पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया।

शिवकुमार ने कहा कि बैठक में आए सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और उसके बाद ही सरकार अंतिम फैसला करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कावेरी का मुद्दा उनके लिए केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत भी है क्योंकि उनका जन्म और पालन-पोषण कावेरी बेसिन क्षेत्र में हुआ है और वह एक किसान परिवार से आते हैं।

उन्होंने कहा, "मैं कावेरी जलग्रहण क्षेत्र में पैदा हुआ हूं। मैं किसान का बेटा हूं और स्वयं खेती कर चुका हूं। मेरी सरकार कर्नाटक, यहां के लोगों और किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस संबंध में किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए।"

उन्होंने कहा कि कावेरी विवाद में अब तक सत्ता में रही सभी सरकारों ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राज्य के हितों की रक्षा की है।

उन्होंने कहा कि दिवंगत एस. बंगारप्पा, दिवंगत धरम सिंह, सिद्धारमैया से लेकर भाजपा और जेडी(एस) सरकारों तक सभी ने कर्नाटक के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष राज्य में सामान्य से केवल 30 से 35 प्रतिशत वर्षा हुई है, जिससे कई क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। उन्होंने किसानों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि सरकार परिस्थितियों की लगातार समीक्षा कर रही है।

शिवकुमार ने बताया कि हाल ही में कावेरी वाटर रेगुलेशन कमेटी (सीडब्ल्यूआरसी) और कावेरी वाटर मैनेजमेंट अथॉरिटी (सीडब्ल्यूएमए) ने कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया है।

उन्होंने कहा, "यह आदेश ऐसे समय आया है जब राज्य गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। तमिलनाडु ने उस समय 9 टीएमसी पानी की मांग की थी, जब हमारे जलाशय पूरी तरह भरे नहीं थे और वर्षा भी पर्याप्त नहीं हुई थी।" हालांकि, मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में वर्षा की स्थिति में सुधार आया है।

उन्होंने कहा, "राज्य के लोगों की प्रार्थनाओं के बाद अब बारिश शुरू हुई है और स्थिति में कुछ सुधार देखने को मिला है।"

उन्होंने जलाशयों में वर्तमान जलप्रवाह की जानकारी देते हुए कहा कि कबीनी बांध में 24,000 क्यूसेक, कृष्णराज सागर (केआरएस) में 22,000 क्यूसेक, हरंगी में 10,430 क्यूसेक और हेमावती में 12,000 क्यूसेक पानी की आमद हो रही है। इस प्रकार कुल जलप्रवाह 67,378 क्यूसेक तक पहुंच गया है।

इसके बावजूद उन्होंने कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता पेयजल के लिए पर्याप्त जल भंडारण सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा, "हमें कम से कम 40 टीएमसी पानी सुरक्षित रखना होगा। इसमें 36 टीएमसी पेयजल आवश्यकताओं के लिए अनिवार्य है, जबकि शेष 4 टीएमसी भी सुरक्षित रखना जरूरी है।"

मुख्यमंत्री ने बताया कि सर्वदलीय बैठक में वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं, केंद्रीय मंत्रियों, कानूनी विशेषज्ञों और राज्य के महाधिवक्ता ने अपने सुझाव दिए। दिल्ली में मौजूद कर्नाटक की कानूनी टीम भी वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुई।

उन्होंने कहा कि सरकार कानून के दायरे में रहकर ही हर निर्णय लेगी और राज्य के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा, "यह अभी जल वर्ष का पहला चरण है। अगले वर्ष जनवरी तक परिस्थितियां कई बार बदल सकती हैं। सीडब्ल्यूआरसी और सीडब्ल्यूएमए की बैठक हर 15 दिन में होती है और नए निर्देश जारी हो सकते हैं। इसलिए हमें बेहद जिम्मेदारी और सतर्कता के साथ आगे बढ़ना होगा।"

शिवकुमार ने बताया कि इस वर्ष कर्नाटक ने पिछले वर्षों की तुलना में तमिलनाडु को काफी कम पानी छोड़ा है क्योंकि वर्षा सामान्य से बहुत कम हुई।

उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष जून महीने में राज्य ने 19.19 टीएमसी पानी छोड़ा था, जबकि इस वर्ष केवल 2.9 टीएमसी पानी छोड़ा गया। इसी तरह जुलाई 2025 में 31 टीएमसी पानी छोड़ा गया था, जबकि इस वर्ष यह मात्रा लगभग 3.6 टीएमसी रही। उन्होंने कहा कि रविवार तक किसी भी जलाशय से विशेष रूप से तमिलनाडु के लिए पानी नहीं छोड़ा गया था। बाद में केवल कबीनी बांध की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पानी छोड़ा गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बैठक में शामिल सभी राजनीतिक दलों ने भरोसा दिलाया है कि कानूनी सलाह और वरिष्ठ नेताओं से विचार-विमर्श के बाद सरकार जो भी फैसला लेगी, उसमें वे उसके साथ खड़े रहेंगे।

कावेरी मुद्दे पर 13 अगस्त को विभिन्न संगठनों द्वारा बुलाए गए कर्नाटक बंद को लेकर शिवकुमार ने लोगों से संयम बरतने की अपील की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तमिलनाडु भी पेयजल आवश्यकताओं को प्राथमिकता दे रहा है और संकट की स्थिति में जल बंटवारे (डिस्ट्रेस शेयरिंग फॉर्मूला) को लेकर कानूनी प्रक्रिया के तहत चर्चा जारी है।

डीएमके की ओर से कथित तौर पर सुप्रीम कोर्ट में दायर निजी याचिका पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि निजी याचिकाओं पर सामान्यतः सुनवाई नहीं होती और कर्नाटक सरकार कानूनी प्रक्रिया के तहत उचित जवाब देगी।

राज्य में तत्काल सूखा घोषित करने की विपक्ष की मांग पर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन किए बिना ऐसा निर्णय नहीं लिया जा सकता।

उन्होंने कहा, "अगस्त के अंत तक रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। हमें केंद्र की तय तकनीकी गाइडलाइन का पालन करना होगा। मनमाने तरीके से किसी तालुका को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया जा सकता। विपक्ष के नेता आर. अशोक की तत्काल सूखा घोषित करने की मांग राजनीतिक है।"

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार सीडब्ल्यूएमए के हालिया निर्देशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की संभावना पर भी विचार कर रही है।

उन्होंने कहा, "हमारी कानूनी टीम सभी पहलुओं की जांच कर रही है। सभी स्तरों पर चर्चा के बाद सरकार उचित निर्णय लेगी।"

--आईएएनएस

डीएससी

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