कौन से दबे राज छिपा रहे हैं शिक्षा मंत्री, आखिर किस दबाव में उन्हें नहीं हटा पा रही सरकार: अखिलेश यादव
नई दिल्ली, 22 जुलाई (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसदों ने बुधवार को लोकसभा में काले कपड़े पहनकर सरकार का विरोध किया और कहा कि सरकार छात्रों की बात नहीं सुन रही है, जिस तरह से छात्रों के साथ किया जा रहा है वह देश के लिए सही नहीं है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पत्रकारों से बात करते हुए सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह सोचना चाहिए कि सरकार अपने मंत्री को क्यों नहीं हटा पा रही है। सरकार पर किसी तरह का दबाव हो सकता है और सवाल किया कि क्या मंत्री के पास सरकार से जुड़े कुछ ऐसे रहस्य हैं, जिनकी वजह से उन्हें हटाया नहीं जा रहा। अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार डरी हुई है।
सपा सांसद डिंपल यादव ने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि छात्रों ने साहस दिखाकर अपनी आवाज उठाई, लेकिन जिस तरह पुलिस ने उनके साथ कार्रवाई की, वह चिंताजनक है। भाजपा के ‘राम राज्य’ के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध करना नागरिकों का अधिकार है। छात्रों और प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस और सुरक्षा बलों का व्यवहार उचित नहीं था।
डिंपल यादव ने कहा कि लोकतंत्र की खूबसूरती इसी में है कि लोग अपनी बात रखने और विरोध करने के लिए स्वतंत्र हों। छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और बल प्रयोग जैसी कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। जो लोग राम राज्य की बात करते हैं, उन्हें जवाब देना चाहिए कि क्या छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार उसी व्यवस्था का हिस्सा है।
सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि विपक्ष छात्रों के साथ खड़ा है और सरकार को उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन खत्म किया जा सकता है, लेकिन जब तक छात्रों की मांगों का समाधान नहीं होगा, विपक्ष अलग-अलग मंचों पर उनकी आवाज उठाता रहेगा। उन्होंने 20 जुलाई को छात्रों पर हुई कार्रवाई को ‘काला दिन’ बताया और कहा कि हजारों छात्र प्रभावित हुए।
धर्मेंद्र यादव ने लोकतंत्र में जनता के भरोसे को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। उन्होंने किसान आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि लंबे विरोध प्रदर्शन के बाद सरकार को कृषि कानून वापस लेने पड़े थे।
वहीं, कांग्रेस के प्रदर्शन पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) सांसद महुआ माझी ने कहा कि अगर उद्देश्य सही है तो लोकतांत्रिक विरोध के तरीके को गलत नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल पर सवाल उठाए। महुआ माझी ने कहा कि छात्रों की समस्याओं को बातचीत के जरिए पहले ही सुलझाया जा सकता था।
--आईएएनएस
एसएके/पीएम

