कासना जेल में नाबालिग को वयस्क कैदी की तरह रखने का मामला, एनएचआरसी ने लिया स्वतः संज्ञान
ग्रेटर नोएडा, 19 जून (आईएएनएस)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने गौतमबुद्धनगर स्थित कासना जेल में एक नाबालिग बालक को वयस्क कैदी के रूप में दो महीने से अधिक समय तक अवैध रूप से रखने की खबरों पर स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने इस घटना को बेहद गंभीर मानते हुए उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पुलिस एवं जेल अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
जानकारी के मुताबिक, संबंधित बालक को जिले में मजदूरों द्वारा वेतन वृद्धि और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर किए गए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उसे नाबालिग होने के बावजूद कासना जेल में वयस्क कैदियों के बीच रखा गया। बताया जा रहा है कि करीब दो महीने से अधिक समय तक जेल में रखने के बाद उसे किशोर न्याय प्रणाली के तहत एक बाल सुधार गृह (जुवेनाइल होम) में स्थानांतरित किया गया।
एनएचआरसी ने इस मामले को बच्चों के अधिकारों और मानवाधिकारों के संभावित उल्लंघन से जुड़ा गंभीर विषय माना है। आयोग ने उत्तर प्रदेश के जेल प्रशासन एवं सुधार सेवाएं विभाग के महानिदेशक तथा पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
आयोग ने यह भी कहा कि यदि मीडिया रिपोर्टों में वर्णित तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह न केवल किशोर न्याय कानूनों के उल्लंघन का मामला होगा, बल्कि संबंधित बालक के मौलिक और मानवाधिकारों के हनन का भी गंभीर उदाहरण माना जाएगा। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एनएचआरसी के महानिदेशक (जांच) को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अधिकारियों की एक टीम गठित कर घटनास्थल का निरीक्षण कराएं और एक सप्ताह के भीतर स्वतंत्र जांच रिपोर्ट आयोग को सौंपें।
रिपोर्टों के अनुसार, अदालत द्वारा बालक को जमानत दिए जाने के बावजूद वह अभी तक बाल गृह में ही रह रहा है। इसका कारण उसके परिवार की आर्थिक स्थिति बताई जा रही है। परिवार जमानत के लिए आवश्यक जमानती और औपचारिकताएं पूरी करने में सक्षम नहीं है, जिसके चलते बालक को रिहाई नहीं मिल सकी है।
--आईएएनएस
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