'कश्मीर से तमिलनाडु तक मां भारती की आजादी का था लक्ष्य', उपराष्ट्रपति ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर दिया खास संदेश
नई दिल्ली, 15 अगस्त (आईएएनएस)। देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने देशवासियों से 'विकसित भारत 2047' के संकल्प को दोहराने की अपील की है। उन्होंने अपने लेख 'फ्रॉम द फ्रीडम दैट वाज वॉन टू द भारत वी बिल्ड' में देश की आजादी के लिए बलिदान देने वाले सभी ज्ञात और अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी।
'एक्स' पर उपराष्ट्रपति ने लिखा, "आजादी की लड़ाई लड़ने वाले, चाहे वे उत्तर में कश्मीर से हों या दक्षिण में तमिलनाडु से, पश्चिम में गुजरात से हों या पूर्व में असम से, सभी क्षेत्रों, पृष्ठभूमियों, उम्र और लिंग के लोग एक ही मकसद के साथ एकजुट हुए।"
अपने लेख में उन्होंने इस बात को विस्तार से कहा कि मां भारती की आजादी के लिए देश के कोने-कोने से, हर उम्र और हर पृष्ठभूमि के लोग एक ही लक्ष्य के लिए एकजुट हुए थे।
उपराष्ट्रपति ने लिखा कि 9 अगस्त को उन्हें अंडमान द्वीप समूह में 'हर घर तिरंगा' अभियान का शुभारंभ करने का सौभाग्य मिला। यह दिन 'भारत छोड़ो आंदोलन' की स्मृति से भी जुड़ा है।
उन्होंने लिखा, "1942 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 'भारत छोड़ो आंदोलन' शुरू किया था और देश को 'करो या मरो' का नारा दिया था। इस आह्वान के परिणामस्वरूप देशभर में आजादी की प्रबल इच्छा फैल गई थी।"
उन्होंने कहा कि आज हम आजादी की हवा में सांस ले पा रहे हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवैधानिक अधिकारों के साथ जी रहे हैं, यह उस पीढ़ी की देन है जिसने औपनिवेशिक ताकतों के खिलाफ मोर्चा लिया था। देशभर में लाखों स्वतंत्रता सेनानियों ने अटूट समर्पण और बलिदान के साथ लड़ाई लड़ी और कई लोगों ने मां भारती को मुक्त देखने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।
उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल की भी सराहना की। उन्होंने लिखा कि पीएम मोदी ने हमारे राष्ट्रीय आंदोलन के अनसुने नायकों को केंद्र में लाने का काम किया है।
उन्होंने कहा, "मैं देश की आजादी के लिए लड़ने वाले ज्ञात और अज्ञात सभी स्वतंत्रता सेनानियों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।"
लेख में उन्होंने उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक, देश की आजादी में सभी फ्रीडम फाइटर्स के योगदान का जिक्र किया। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उपराष्ट्रपति ने देशवासियों से अपने कर्तव्य को फिर से दोहराने का आह्वान किया।
उन्होंने लेख में लिखा, "इस महत्वपूर्ण अवसर पर आइए हम चिंतन करें और अपनी मातृभूमि के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से नया करें। आइए हम इस अमृत काल में एक विकसित भारत 2047 के निर्माण के लिए खुद को समर्पित करें और अपने राष्ट्र की प्रगति और समृद्धि के लिए मिलकर काम करें।"
उनके अनुसार, यह उन वीरों को सबसे उपयुक्त श्रद्धांजलि होगी जिन्होंने अटूट साहस के साथ लड़ाई लड़ी और अपनी जान की कुर्बानी देकर हमें आजादी दिलाई।
--आईएएनएस
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