करणी माता मंदिर बीकानेर: जहां चूहों को माना जाता है पवित्र, राठौड़ राजवंश की कुलदेवी का है ऐतिहासिक संबंध
राजस्थान की धरती अपने वीर योद्धाओं, राजघरानों और लोकदेवताओं की अनूठी परंपराओं के लिए जानी जाती है। इसी परंपरा में मां करणी का नाम विशेष श्रद्धा के साथ लिया जाता है। बीकानेर के देशनोक में स्थित करणी माता का मंदिर आज राजस्थान के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यह मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ यहां बड़ी संख्या में रहने वाले चूहों के कारण भी देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। राजस्थान पर्यटन के अनुसार करणी माता को स्थानीय लोग देवी शक्ति का स्वरूप मानते हैं और उनका जीवन 14वीं शताब्दी से जुड़ा बताया जाता है।
चारण परिवार में जन्म की मान्यता
लोकमान्यताओं के अनुसार करणी माता का जन्म राजस्थान के सुआप गांव में एक चारण परिवार में हुआ था। उन्हें तपस्वी और आध्यात्मिक शक्ति से संपन्न महिला के रूप में देखा जाता है। समय के साथ उनकी ख्याति दूर-दूर तक फैलती गई और राजघरानों से लेकर आम श्रद्धालुओं तक बड़ी संख्या में लोग उनका आशीर्वाद लेने पहुंचने लगे।
करणी माता का संबंध बीकानेर और जोधपुर के राठौड़ राजवंशों के इतिहास से भी जोड़ा जाता है। राजस्थान पर्यटन के अनुसार उन्होंने बीकानेर और जोधपुर के राजाओं के अनुरोध पर दोनों महत्वपूर्ण दुर्गों की नींव रखने में भूमिका निभाई थी।
राव बीका और बीकानेर से जुड़ी मान्यता
राठौड़ शासक राव बीका द्वारा बीकानेर राज्य की स्थापना की कथा में भी करणी माता का विशेष स्थान माना जाता है। लोक परंपरा के अनुसार राव बीका को मां करणी का आशीर्वाद प्राप्त था। इसी कारण बीकानेर के राठौड़ शासकों ने उन्हें अपनी कुलदेवी के रूप में सम्मान दिया।
देशनोक स्थित करणी माता का मंदिर इसी ऐतिहासिक और धार्मिक परंपरा का प्रमुख केंद्र है। राजस्थान सरकार के अनुसार यह मंदिर बीकानेर से लगभग 33 किलोमीटर दूर स्थित है और करणी माता की स्मृति में यहां पेनोरमा भी विकसित किया गया है।
जोधपुर और मेहरानगढ़ से भी जुड़ा इतिहास
करणी माता का नाम जोधपुर के इतिहास से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि राव जोधा को कठिन परिस्थितियों में करणी माता का आशीर्वाद मिला था और बाद में उन्होंने जोधपुर की स्थापना की। राजस्थान पर्यटन की जानकारी के मुताबिक करणी माता ने मेहरानगढ़ और बीकानेर किले की नींव रखने में भी भूमिका निभाई थी। हालांकि इन घटनाओं से जुड़ी कई बातें लोकपरंपराओं और धार्मिक मान्यताओं का हिस्सा हैं।
चूहों वाला मंदिर क्यों कहलाता है?
देशनोक का करणी माता मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के कारण दुनिया भर में जाना जाता है। मंदिर परिसर में हजारों चूहे स्वतंत्र रूप से घूमते हैं। इन्हें स्थानीय श्रद्धालु 'काबा' कहते हैं और धार्मिक मान्यता के अनुसार इन्हें करणी माता से जुड़े पवित्र जीव माना जाता है। मंदिर में सफेद चूहे को देखना विशेष शुभ माना जाता है। राजस्थान पर्यटन भी मंदिर में बड़ी संख्या में चूहों की मौजूदगी को इसकी प्रमुख विशेषता बताता है।
आज देशनोक का करणी माता मंदिर आस्था, लोकविश्वास और राजस्थान के राजवंशीय इतिहास का अनोखा संगम बन चुका है। यहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मां करणी से जुड़ी कथाएं राजस्थान की लोक संस्कृति में आज भी जीवित हैं और राठौड़ राजवंश की ऐतिहासिक गाथाओं के साथ उनका नाम श्रद्धा से लिया जाता है।

