कर्नाटक : आर अशोका ने राज्य सरकार पर किसानों की जमीन छीनने का लगाया आरोप
बेंगलुरु, 14 जून (आईएएनएस)। कर्नाटक विधानसभा में नेता विपक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता आर अशोका ने राज्य सरकार पर किसानों की उपजाऊ जमीन छीनने और बड़े प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।
आर. अशोका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि सरकार एक ओर 'ग्रीन ओवर ग्रीड' यानी लालच पर हरियाली को प्राथमिकता देने की बात करती है, लेकिन दूसरी ओर 755 छोटे किसान परिवारों से 498 एकड़ से अधिक उपजाऊ कृषि भूमि लेकर रियल एस्टेट परियोजनाओं को बढ़ावा दे रही है।
आर. अशोका ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से हस्तक्षेप करने की अपील करते हुए कहा कि उन्होंने इस संबंध में उन्हें पत्र लिखा है। उन्होंने राहुल गांधी से अपनी ही पार्टी की राज्य सरकार को जवाबदेह ठहराने और किसानों के हितों की रक्षा करने का आग्रह किया। भाजपा नेता ने कहा कि कमजोर और छोटे किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है।
इसके साथ ही आर. अशोका ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा समिति को संबोधित पत्र भी सार्वजनिक किया, जिसमें बेंगलुरु से जुड़े 39,437 करोड़ रुपए के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) टेंडर पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने समिति से अनुरोध किया कि वह जनहित और अपनी अंतरात्मा को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करे।
पत्र में कहा गया है कि यह केवल एक टेंडर का मामला नहीं है, बल्कि बेंगलुरु के भविष्य, उसकी वित्तीय स्थिरता और लाखों नागरिकों के हितों से जुड़ा विषय है। अशोका ने दावा किया कि राज्य के वित्त विभाग ने भी इस परियोजना की लागत, वार्षिक लागत वृद्धि, 30 वर्ष की लंबी रियायती अवधि और संभावित एकाधिकार जैसी चिंताओं को लेकर आपत्तियां दर्ज की हैं।
उन्होंने कहा कि यदि परियोजना में प्रस्तावित पांच प्रतिशत वार्षिक लागत वृद्धि जारी रहती है तो अगले तीन दशकों में इसकी लागत कई गुना बढ़ सकती है, जिसका बोझ अंततः करदाताओं पर पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि बेंगलुरु के नागरिक पहले से ही विभिन्न करों और शुल्कों का भार उठा रहे हैं, ऐसे में सार्वजनिक धन से जुड़ा हर निर्णय पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ लिया जाना चाहिए।
आर. अशोका ने समिति के सदस्यों से किसी भी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव से मुक्त होकर काम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि समिति की रिपोर्ट केवल सरकार के लिए एक दस्तावेज नहीं होगी, बल्कि वह बेंगलुरु के भविष्य को प्रभावित करने वाले निर्णयों की आधारशिला साबित हो सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि समिति निष्पक्षता, ईमानदारी और साहस के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाएगी और शहर के दीर्घकालिक हितों को प्राथमिकता देगी।
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