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कर्नाटक प्रशासन की बड़ी लापरवाही, बिना वैलिड इंश्योरेंस के सड़कों पर दौड़ रही सरकारी गाड़ी

बेंगलुरु, 17 जनवरी (आईएएनएस)। सरकारी दफ्तरों में लापरवाही कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब यह लापरवाही सीधे कानून और जनता की सुरक्षा से जुड़ी हो, तो मामला गंभीर हो जाता है। ऐसा ही एक मामला विजयपुर के नेशनल हाईवे डिपार्टमेंट से सामने आया है, जहां विभाग की एक सरकारी गाड़ी बिना वैलिड इंश्योरेंस के सड़कों पर दौड़ रही है।
कर्नाटक प्रशासन की बड़ी लापरवाही, बिना वैलिड इंश्योरेंस के सड़कों पर दौड़ रही सरकारी गाड़ी

बेंगलुरु, 17 जनवरी (आईएएनएस)। सरकारी दफ्तरों में लापरवाही कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब यह लापरवाही सीधे कानून और जनता की सुरक्षा से जुड़ी हो, तो मामला गंभीर हो जाता है। ऐसा ही एक मामला विजयपुर के नेशनल हाईवे डिपार्टमेंट से सामने आया है, जहां विभाग की एक सरकारी गाड़ी बिना वैलिड इंश्योरेंस के सड़कों पर दौड़ रही है।

जानकारी के मुताबिक नेशनल हाईवे डिपार्टमेंट विजयपुर की सरकारी गाड़ी (जिसका नंबर केए 02 जी 1904 है) का इंश्योरेंस 5 जून 2025 को ही खत्म हो चुका है। इसके बावजूद यह गाड़ी रोजमर्रा के कामों में इस्तेमाल की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत किसी भी गाड़ी का इंश्योरेंस होना अनिवार्य है, चाहे वह निजी हो या सरकारी। फिर भी जिम्मेदार अधिकारी समय पर इंश्योरेंस पॉलिसी रिन्यू कराना भूल गए या यूं कहें कि उन्होंने इसकी परवाह ही नहीं की।

बिना इंश्योरेंस के गाड़ी चलाना न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि बेहद जोखिम भरा भी है। अगर ऐसी गाड़ी से कोई हादसा हो जाता है, किसी को चोट लगती है या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार पर आ जाती है। ऐसे मामलों में लाखों के मुआवजे के दावे सामने आ सकते हैं और आखिरकार इसका बोझ आम जनता यानी टैक्स देने वालों को उठाना पड़ता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी गाड़ियों के मामले में ऐसी लापरवाही और भी गंभीर हो जाती है, क्योंकि सरकार खुद कानून बनाने वाली संस्था है। अगर वही नियमों का पालन नहीं करेगी, तो आम जनता से कानून मानने की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

इस मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं और एक्टिविस्टों में भी नाराजगी है। उन्होंने मांग की है कि संबंधित गाड़ी का इंश्योरेंस तुरंत प्रभाव से रिन्यू किया जाए और इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही सभी सरकारी विभागों की गाड़ियों का एक व्यापक ऑडिट करने की मांग भी उठी है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी वाहन बिना वैध कागजात के सड़कों पर न चले।

--आईएएनएस

पीआईएम/वीसी

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