कर्नाटक के एमएलसी बीएस शिवन्ना ने पीएम मोदी से 'एक देश, एक शिक्षा प्रणाली' लागू करने की अपील की
बेंगलुरु, 28 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक विधान परिषद के सदस्य बीएस शिवन्ना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपील की है कि देशभर में एक समान शिक्षा प्रणाली लागू करें। उन्होंने कहा कि राज्य बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई जैसे अलग-अलग शिक्षा पाठ्यक्रमों की जगह 'एक देश, एक शिक्षा प्रणाली' अपनाई जानी चाहिए।
एमएलसी शिवन्ना ने पत्र में लिखा, "पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने एक ही फैसले से बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया था, जिससे गरीब और कामकाजी वर्ग को बहुत बड़ी मदद मिली थी। उसी तर्ज पर मौजूदा केंद्र सरकार को शिक्षा का पूरी तरह से राष्ट्रीयकरण करने और सभी निजी शिक्षण संस्थानों को सरकारी नियंत्रण में लाने के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखानी चाहिए। जिस तरह पूरे देश में आधार कार्ड और "एक देश, एक राशन कार्ड" को सफलतापूर्वक लागू किया गया है, उसी तरह एक समान शिक्षा प्रणाली लागू करना समय की मांग है। राज्य बोर्ड, सीबीएसई, आईसीएसई और केंद्रीय विद्यालयों जैसे कई तरह के पाठ्यक्रम वाली मौजूदा प्रणाली को खत्म कर दिया जाना चाहिए और इसकी जगह पूरे देश में एक समान शैक्षिक ढांचा लागू किया जाना चाहिए।
शिवन्ना ने कहा, "क्षेत्रीय भाषाओं को उचित महत्व देते हुए सरकार को एक ऐसी नीति बनानी चाहिए जो एलकेजी, यूकेजी और कक्षा 1 से लेकर एसएसएलसी (माध्यमिक विद्यालय छोड़ने का प्रमाण-पत्र) शिक्षा तक हर स्तर पर मुफ्त, समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करे। शिक्षा का राष्ट्रीयकरण हमारे संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि चाहे बच्चा किसी आईएएस या आईपीएस अधिकारी, मंत्री या सांसद का हो, या फिर किसी किसान, दिहाड़ी मजदूर, पंचर बनाने वाले या मोची के बच्चे को एक जैसी गुणवत्ता वाली मुफ्त और समान शिक्षा मिले।
शिवन्ना ने किसानों, खेतिहर मजदूरों, दिहाड़ी मजदूरों और कमजोर वर्गों के परिवारों के बच्चों द्वारा लिए गए शिक्षा ऋण और उस पर जमा हुए ब्याज को पूरी तरह माफ करने की भी मांग की। उन्होंने 'सेंट्रल सेक्टर इंटरेस्ट सब्सिडी' (सीएसआईएस) योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने और इसके बारे में देशभर में जागरूकता फैलाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कई योग्य छात्र और उनके माता-पिता इस योजना के तहत मिलने वाले फायदों के बारे में नहीं जानते हैं।
शिवन्ना ने पत्र में लिखा, भारत सरकार को उन किसानों, खेतिहर मजदूरों, दिहाड़ी मजदूरों और कमजोर परिवारों के बच्चों द्वारा उच्च शिक्षा के लिए लिए गए सभी एजुकेशन लोन और उन पर जमा हुए ब्याज को तुरंत और पूरी तरह माफ कर देना चाहिए, जो हमारे देश की रीढ़ हैं। अभी खेती से पर्याप्त आमदनी न होने और बार-बार फसल बर्बाद होने के कारण ये परिवार भारी आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। बैंकों से लोन वसूली के नोटिस इन युवा ग्रेजुएट और उनके माता-पिता को बहुत ज्यादा मानसिक तनाव दे रहे हैं।
इसके अलावा, केंद्र सरकार की सेंट्रल सेक्टर इंटरेस्ट सब्सिडी (सीएसआईएस) स्कीम के तहत, जिन परिवारों की सालाना आय 4.5 लाख रुपये से कम है, उनके छात्र बिना किसी गिरवी रखी संपत्ति (कोलेटरल सिक्योरिटी) या तीसरे पक्ष की गारंटी के 7.5 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त एजुकेशन लोन ले सकते हैं। पहले, यह फायदा सिर्फ एनएएसी और एनबीए से मान्यता प्राप्त संस्थानों तक ही सीमित था।
हालांकि, डॉ. राम मनोहर लोहिया थिंकर्स फोरम द्वारा दायर जनहित याचिका के बाद, हाईकोर्ट ने एक आदेश जारी किया। इसके बाद केंद्र सरकार ने भरोसा दिलाया कि इस योजना का लाभ बिना किसी भेदभाव के सभी छात्रों को दिया जाएगा। दुर्भाग्य से 90 फीसदी से ज़्यादा माता-पिता और छात्र इस सुविधा और हाईकोर्ट के फैसले के बारे में नहीं जानते हैं। इसलिए, हाईकोर्ट के इस आदेश और सीएसआईएस योजना के बारे में पूरे देश में जागरूकता फैलाने की जरूरत है, ताकि हर योग्य छात्र लोन और ब्याज पर सब्सिडी का फायदा उठा सके।
--आईएएनएस
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