कानपुर फर्जी मार्कशीट केस: एसआईटी गठित, एडीसीपी योगेश कुमार की कमान में 14 सदस्यीय टीम करेगी जांच
कानपुर, 21 फरवरी (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के कानपुर में फर्जी मार्कशीट और डिग्री कांड की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया गया है।
इस 14 सदस्यीय टीम की कमान एडीसीपी योगेश कुमार को सौंपी गई है। टीम जल्द ही छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) पहुंचकर गहन जांच करेगी और वहां के अधिकारियों तथा कर्मचारियों से पूछताछ करेगी।
यह मामला तब सामने आया, जब किदवई नगर पुलिस ने एक कोचिंग सेंटर 'शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन' पर छापेमारी की। वहां से चार लोगों को गिरफ्तार किया गया और 900 से ज्यादा फर्जी डिग्री, मार्कशीट, माइग्रेशन सर्टिफिकेट तथा अन्य दस्तावेज बरामद हुए। इनमें से सबसे ज्यादा 357 फर्जी मार्कशीट और डिग्री कानपुर विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के नाम से थीं।
आरोपियों के पास से सीएसजेएमयू के डिप्टी रजिस्ट्रार की नकली मोहर भी मिली। गिरोह नौ राज्यों में सक्रिय था और हाईस्कूल-इंटरमीडिएट के लिए 50 हजार, ग्रेजुएशन के लिए 50-75 हजार और बीटेक, एलएलबी और फार्मेसी डिग्री के लिए 1.5 से 2.5 लाख रुपए वसूलता था।
गिरोह के सदस्य यूनिवर्सिटी के कुछ कर्मचारियों से मिलीभगत कर ऑनलाइन रिकॉर्ड में फर्जी एंट्री डालते थे ताकि दस्तावेज सत्यापन में सही दिखें। पुलिस को पोस्टडेटेड चेक और करोड़ों की संपत्ति के सबूत भी मिले हैं। कई वकीलों के नाम भी सामने आए हैं जिन्होंने फर्जी एलएलबी डिग्री ली थी।
एक दिन पहले सीएसजेएमयू के रजिस्ट्रार और परीक्षा नियंत्रक ने बयान दिया था कि विश्वविद्यालय की ओर से कोई फर्जीवाड़ा नहीं हुआ है और पुलिस से कोई संपर्क भी नहीं हुआ। हालांकि, बरामद दस्तावेजों में विश्वविद्यालय की मोहर और रिकॉर्ड की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। जांच में कई अधिकारी और कर्मचारी रडार पर आ सकते हैं।
एसआईटी अब विश्वविद्यालय परिसर में जाकर दस्तावेजों की जांच, कर्मचारियों से पूछताछ और संभावित मिलीभगत की गहराई तक पहुंचने का काम करेगी। पुलिस का कहना है कि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है और मामले को सख्ती से आगे बढ़ाया जाएगा।
--आईएएनएस
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