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कमाल अमरोही: मात्र चार फिल्मों से रचा इतिहास, मीना कुमारी के साथ अमर प्रेम कहानी, विरासत आज भी जिंदा

नई दिल्ली, 10 फरवरी (आईएएनएस)। कमाल अमरोही, जिनका पूरा नाम सैयद अमीर हैदर कमाल नकवी था, वे हिंदी फिल्मों के उन चुनिंदा निर्देशकों में से थे, जिन्होंने मात्र चार फिल्में निर्देशित कीं, लेकिन हर फिल्म अपनी शैली, संवादों की गहराई और संगीत की वजह से क्लासिक बन गई। कमाल 11 फरवरी 1993 को मुंबई में 75 वर्ष की आयु में इस दुनिया से रुखसत हो गए थे।
कमाल अमरोही: मात्र चार फिल्मों से रचा इतिहास, मीना कुमारी के साथ अमर प्रेम कहानी, विरासत आज भी जिंदा

नई दिल्ली, 10 फरवरी (आईएएनएस)। कमाल अमरोही, जिनका पूरा नाम सैयद अमीर हैदर कमाल नकवी था, वे हिंदी फिल्मों के उन चुनिंदा निर्देशकों में से थे, जिन्होंने मात्र चार फिल्में निर्देशित कीं, लेकिन हर फिल्म अपनी शैली, संवादों की गहराई और संगीत की वजह से क्लासिक बन गई। कमाल 11 फरवरी 1993 को मुंबई में 75 वर्ष की आयु में इस दुनिया से रुखसत हो गए थे।

कमाल अमरोही का जन्म 17 जनवरी 1918 को उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में एक संपन्न जमींदार परिवार में हुआ था। बचपन से ही साहित्य, शायरी और कला के प्रति गहरा लगाव था। उन्होंने उर्दू और हिंदी में शायरी भी लिखी, लेकिन उनका मुख्य क्षेत्र फिल्म जगत बना। मुंबई आने के बाद उन्होंने सोहराब मोदी की मिनर्वा मूवीटोन में काम शुरू किया। 'जेलर' (1938), 'पुकार' (1939), 'शाहजहां' (1946) जैसी फिल्मों में उन्होंने पटकथा और संवाद लेखन में हाथ आजमाया। केएल सहगल ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और आगे बढ़ने में मदद की।

1949 में आई उनकी पहली निर्देशित फिल्म 'महल' ने उन्हें रातोंरात मशहूर कर दिया। मधुबाला और अशोक कुमार अभिनीत इस फिल्म में रहस्य, रोमांस और भूतिया तत्वों का अनोखा मिश्रण था। लता मंगेशकर की आवाज में 'आएगा आने वाला' गाना आज भी सुपरहिट है। इस फिल्म की सफलता ने कमाल अमरोही को बॉलीवुड में एक अलग मुकाम दिया।

1953 में उन्होंने अपनी पत्नी मीना कुमारी के साथ 'दायरा' बनाई, जो एक संवेदनशील प्रेम कहानी थी, लेकिन उनकी सबसे प्रसिद्ध और महान कृति 'पाकीजा' (1972) है। इस फिल्म की शुरुआत 1958 में हुई थी, लेकिन मीना कुमारी के साथ वैवाहिक मतभेद, स्वास्थ्य समस्याएं और निर्माण की जटिलताओं के कारण 14 साल बाद रिलीज हुई। कमाल अमरोही ने खुद पटकथा लिखी, संवाद दिए, गीत लिखे और निर्देशन किया। मीना कुमारी ने तवायफ साहिबा की भूमिका में अपनी अंतिम और सर्वश्रेष्ठ अदाकारी की। 'चलते चलते यूं ही कोई मिल गया था' और 'इन्हीं लोगों ने ले लीना दुपट्टा मेरा' जैसे गीत अमर हो गए। 'पाकीजा' को भारतीय सिनेमा की सबसे खूबसूरत ट्रेजेडी माना जाता है।

उनकी आखिरी पूरी फिल्म 'रजिया सुल्तान' (1983) थी, जिसमें हेमा मालिनी ने मुख्य भूमिका निभाई। यह ऐतिहासिक ड्रामा थी, लेकिन व्यावसायिक रूप से ज्यादा सफल नहीं हुई। इसके बाद वे 'मजनू' और 'आखिरी मुगल' जैसे प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे, लेकिन स्वास्थ्य बिगड़ने से वे अधूरी रह गईं।

कमाल अमरोही की जिंदगी भी फिल्म की तरह थी। उन्होंने तीन शादियां कीं, पहली बिलकिस बानो से, दूसरी महमूदी से (जिनसे तीन बच्चे हुए- शानदार, ताजदार और रुखसार), और तीसरी मीना कुमारी से 1952 में। मीना कुमारी से उनका रिश्ता प्यार से शुरू हुआ, लेकिन बाद में तलाक तक पहुंचा। मीना की मौत 1972 में हुई, और कमाल अमरोही की मौत के 21 साल बाद। उनकी इच्छा के मुताबिक उन्हें मुंबई के रहमताबाद कब्रिस्तान में मीना कुमारी के पास दफनाया गया।

कमाल अमरोही ने 1953 में कमाल पिक्चर्स और 1958 में कमालिस्तान स्टूडियो स्थापित किया, जो उनकी दूरदर्शिता दिखाता है। उनकी स्टाइल जिद्दी, परफेक्शनिस्ट और शाही अंदाज थी। उनकी फिल्मों में मुगलिया शान, शायराना अंदाज और भावुकता की गहराई थी। हिंदी सिनेमा में वे एक ऐसे निर्देशक थे जिन्होंने कम फिल्में बनाईं, लेकिन गुणवत्ता से इतिहास रच दिया।

11 फरवरी 1993 को जब वे गुजरे, तो सिनेमा जगत ने एक युग का अंत माना। उनकी विरासत आज भी 'महल', 'पाकीजा' और 'रजिया सुल्तान' में जिंदा है।

--आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी

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