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कलयुगी दुशासन ने खिंची भाभी की साड़ी, फिर भाई संग मिलकर किया वो दहल गए सब

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महाराष्ट्र के सोलापुर जिले से एक रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया है, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। टेंभुर्णी इलाके की एक महिला ने अपने ससुराल पक्ष के लोगों पर हैवानियत भरे अत्याचारों के गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का आरोप है कि उसे न केवल शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया, बल्कि जान से मारने की कोशिश भी की गई और उसके साथ अमानवीय दुर्व्यवहार हुआ।

पीड़िता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसके देवर निलेश और संतोष भोसले ने उसे घर के अंदर बंद कर लिया और कोयते (तेज हथियार) की नोंक पर डराया-धमकाया। जब उसने विरोध किया और उन्हें भाभी होने की दुहाई दी, तो दोनों ने उसे बुरी तरह अपमानित किया। महिला का आरोप है कि उसकी साड़ी खींचकर उसे निर्वस्त्र करने की कोशिश की गई और उसके शरीर पर अश्लील तरीके से हाथ फेरकर उसका शोषण किया गया।

हैरानी की बात ये है कि इस पूरी घटना में केवल देवर ही नहीं, दो देवरानियां भी शामिल थीं। महिला का कहना है कि दोनों ने मिलकर उसे लात-घूंसों से बेरहमी से पीटा। इतना ही नहीं, उसकी सास और ससुर ने यह सब होते हुए चुपचाप देखा और कोई मदद नहीं की।

जब महिला का पति सतीश घर आया, तो उसने न केवल मामले को नजरअंदाज किया, बल्कि बेहद अमानवीय टिप्पणी करते हुए कहा – "कम मारा, इसका पैर तो तोड़ना था।" यह सुनकर महिला पूरी तरह टूट गई और मानसिक रूप से बुरी तरह आहत हो गई।

हमले के बाद पीड़िता को इलाज के लिए चार अलग-अलग अस्पतालों में जाना पड़ा। उसकी हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। वह न केवल शारीरिक रूप से घायल है, बल्कि मानसिक रूप से भी गहरे सदमे में है।

पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल

पीड़िता ने पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि पुलिस ने उसकी शिकायत में घटनाओं को तोड़-मरोड़कर लिखा और आरोपियों को बचाने वाली धाराएं लगाई। उसने दावा किया कि मुख्य आरोपी निलेश एक वकील है और उसने पुलिस को 5 लाख रुपये की रिश्वत दी है, जिससे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हो पा रही।

महिला ने मांग की है कि मामले की जांच महिला अधिकारी से कराई जाए और आरोपियों पर हत्या की कोशिश, बलात्कार और गंभीर यौन उत्पीड़न जैसी धाराएं लगाई जाएं। न्याय न मिलने पर उसने आत्मदाह की चेतावनी भी दी है।

न्याय की उम्मीद में तड़प रही महिला

यह मामला न केवल घरेलू हिंसा की भयावहता को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि जब परिवार के ही सदस्य इंसानियत खो बैठें तो महिला कितनी असहाय हो जाती है। इस घटना ने कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़िता और समाज अब यह देख रहे हैं कि क्या सिस्टम दोषियों को सज़ा देगा या फिर एक और महिला न्याय के लिए दर-दर भटकेगी।

यह मामला केवल एक महिला की पीड़ा नहीं, बल्कि उस सामाजिक तंत्र पर सवाल है जो महिला सुरक्षा के नाम पर केवल बयानबाज़ी करता है।

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