कभी बॉलीवुड की टॉप सिंगरों में थीं सुमार, फिर एक फैसले ने बदल दी अनुराधा पौडवाल के करियर की दिशा
नई दिल्ली, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। हिंदी सिनेमा में कुछ आवाजें ऐसी हैं, जिन्हें सुनते ही पुराने गानों की यादें ताजा हो जाती हैं। अनुराधा पौडवाल भी ऐसी ही गायिकाओं में से एक हैं। 80 और 90 के दशक में उनकी आवाज का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोलता था। उनके गाने हर तरफ सुनाई देते थे, तो कई लोग तो उनकी तुलना दिग्गज गायिका लता मंगेशकर से भी करते थे। 'आशिकी', 'दिल है कि मानता नहीं' और 'बेटा' जैसी फिल्मों के गानों ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। हालांकि जब उनका करियर बुलंदियों पर था, तभी उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया, जिसने उनकी जिंदगी और करियर की दिशा बदल दी।
अनुराधा पौडवाल का जन्म 27 अक्टूबर 1954 को हुआ था। उनका बचपन मुंबई में बीता। बचपन से ही फिल्मों और संगीत के प्रति उनका लगाव था। उन्होंने साल 1973 में आई अमिताभ बच्चन और जया बच्चन की फिल्म 'अभिमान' से अपने करियर की शुरुआत की।
इसके बाद अनुराधा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने धीरे-धीरे फिल्मी दुनिया में अपनी जगह बनानी शुरू कर दी। फिल्म 'आप बीती' में उन्हें एकल गीत गाने का मौका मिला। आगे चलकर उन्होंने कई संगीतकारों के साथ काम किया और अपनी आवाज से लोगों का दिल जीत लिया।
अनुराधा पौडवाल के करियर में बड़ा बदलाव फिल्म 'हीरो' के गानों की सफलता के बाद आया। संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के साथ उनकी जोड़ी खूब जमी। इसके बाद उन्होंने 'मेरी जंग', 'राम लखन' और 'तेजाब' जैसी फिल्मों में भी कई यादगार गाने गाए। 90 के दशक में नदीम-श्रवण के संगीत से सजी फिल्म 'आशिकी' ने उनकी लोकप्रियता को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। इस फिल्म के गाने 'नजर के सामने', 'धीरे-धीरे से मेरी जिंदगी में आना' और 'जाने जिगर जानेमन' आज भी संगीत प्रेमियों के पसंदीदा गानों में शामिल हैं।
उस दौर में अनुराधा पौडवाल हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित पार्श्वगायिकाओं में गिनी जाती थीं। उनकी आवाज में एक अलग मिठास थी, जो रोमांटिक गानों से लेकर भावुक गीतों तक में खूब जंचती थी। ऐसे समय में उन्होंने अचानक फिल्मी गानों से दूरी बनाने का फैसला किया। आमतौर पर कोई भी कलाकार अपने करियर के शिखर पर पहुंचने के बाद और आगे बढ़ना चाहता है लेकिन अनुराधा ने अलग रास्ता चुना।
फिल्मी गानों से दूरी बनाने के बाद अनुराधा पौडवाल ने भक्ति संगीत पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया। उनके गाए भजनों और देवी गीतों को लोगों ने खूब पसंद किया। नवरात्रि हो, दिवाली हो या छठ पूजा, उनके भक्ति गीत आज भी कई घरों और पूजा स्थलों पर सुनाई देते हैं।
संगीत की दुनिया में उनके योगदान के लिए अनुराधा पौडवाल को कई बड़े पुरस्कार मिल चुके हैं। उन्हें चार फिल्मफेयर पुरस्कार और एक राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। साल 2017 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से भी नवाजा।
--आईएएनएस
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