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200 kmph की स्पीड से मर्सिडीज चला रहा था जज का बेटा: इंजीनियर की मौत के बाद डिलीट की रील्स, खुला बड़ा राज

200 kmph की स्पीड से मर्सिडीज चला रहा था जज का बेटा: इंजीनियर की मौत के बाद डिलीट की रील्स, खुला बड़ा राज

केरल के कोच्चि में मर्सिडीज कार की टक्कर से 55 वर्षीय इंजीनियर की मौत के मामले में नए खुलासे सामने आए हैं। आरोप है कि कार चला रहे 17 वर्षीय किशोर ने पुलिस से कहा था कि उसने पहली बार गाड़ी चलाई और यूट्यूब से ड्राइविंग सीखी। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक, किशोर के इंस्टाग्राम अकाउंट पर तेज रफ्तार में कार चलाने से जुड़ी रील्स पोस्ट किए जाने का दावा किया गया है।रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर 2,500 से अधिक फॉलोअर्स थे। कुछ वीडियो में मर्सिडीज को कथित तौर पर 200 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से चलाते हुए दिखाया गया था। हादसे के बाद अकाउंट से पोस्ट हटाए जाने और उसे प्राइवेट किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इन वीडियो और उनकी टाइमिंग की स्वतंत्र पुष्टि जांच के निष्कर्षों से ही हो सकेगी।मृतक के परिवार की रिश्तेदार जयलक्ष्मी थंकराज ने दावा किया कि हादसे से करीब 10 मिनट पहले भी आरोपी ने तेज रफ्तार में ड्राइविंग का वीडियो पोस्ट किया था।

104 kmph की रफ्तार से चल रही थी कार, स्कूटी सवार की मौत

यह हादसा शनिवार देर रात करीब 2:20 बजे हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय मर्सिडीज कार लगभग 104 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी। कार की टक्कर से स्कूटी सवार 55 वर्षीय जयबालकृष्णन की मौत हो गई।

बताया गया है कि आरोपी एक एडिशनल सेशन जज का 17 वर्षीय बेटा है और कार जज के नाम पर रजिस्टर्ड है। मामले ने इसलिए भी गंभीर रूप ले लिया है, क्योंकि मृतक के परिवार ने पुलिस की शुरुआती कार्रवाई और प्रभावशाली परिवार से जुड़े होने के कारण जांच पर सवाल उठाए हैं।

परिवार का आरोप—हादसे में शरीर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ

मृतक की रिश्तेदार जयलक्ष्मी थंकराज के मुताबिक, जयबालकृष्णन उनके अंकल थे। वह मैकेनिकल इंजीनियर थे और अपने शौक के चलते डोसा की दुकान चलाते थे। हादसे के समय वह दुकान बंद करके घर लौट रहे थे।

परिवार का कहना है कि टक्कर इतनी भीषण थी कि जयबालकृष्णन का शरीर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। जयलक्ष्मी ने सरकार और पुलिस से आरोपी का पासपोर्ट तथा अन्य जरूरी दस्तावेज जब्त करने की मांग की है। उनका आशंका है कि आरोपी प्रभावशाली परिवार से होने के कारण देश छोड़कर जा सकता है।

परिवार ने आरोपी के खिलाफ गंभीर कानूनी धाराएं लगाने और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की है। हालांकि, आरोपी के विदेश भागने की आशंका परिवार का दावा है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

पहली FIR में नाम नहीं होने का आरोप

जयलक्ष्मी ने पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि पहली FIR में आरोपी का नाम शामिल नहीं था। उनके मुताबिक, पुलिस ने बाद में उसका नाम दूसरी FIR में जोड़ने की बात कही थी।

परिवार का यह भी आरोप है कि हादसे के समय कार में आरोपी के अलावा तीन अन्य लोग मौजूद थे। परिवार के दावे के अनुसार, टक्कर के बाद बाकी लोग मौके से चले गए और बाद में एक फॉर्च्यूनर कार भी घटनास्थल पर पहुंची थी।

मृतक के परिजनों ने मामले में लीपापोती और सबूत मिटाने की आशंका भी जताई है। ये आरोप फिलहाल परिवार के दावे हैं। जांच में इनकी पुष्टि होना जरूरी है।

आरोपी को दो बार हिरासत में लिया गया, दोनों बार मिली जमानत

पुलिस ने शुरुआत में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) के तहत मामला दर्ज किया था। इसके बाद उसे थाने से जमानत मिल गई।

परिवार और अन्य लोगों की ओर से अधिक गंभीर धाराएं लगाने की मांग उठने के बाद पुलिस ने मामले में धारा 105 भी जोड़ी। इसके बाद किशोर को दोबारा हिरासत में लेकर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया गया। बोर्ड ने उसे फिर जमानत दे दी।

मृतक के परिवार ने आरोपी के पिता के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है, क्योंकि कार उनके नाम पर पंजीकृत बताई गई है। पुलिस ने इस संबंध में कानूनी राय मांगी है। कार का उनके नाम पर होना अपने आप में किसी आपराधिक जिम्मेदारी को साबित नहीं करता; इसके लिए जांच और लागू कानून के अनुसार साक्ष्य जरूरी होंगे।

गृह मंत्री ने मानी शुरुआती कार्रवाई में चूक

केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने सोमवार को पुलिस की शुरुआती कार्रवाई में चूक होने की बात स्वीकार की। विधानसभा में उन्होंने कहा कि शुरुआत में ही मामले के तथ्यों के अनुरूप उचित और गंभीर धाराएं लगाई जानी चाहिए थीं।

मंत्री के मुताबिक, पुलिस महानिदेशक (DGP) और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) ने मामले में हस्तक्षेप किया, जिसके बाद केस में संबंधित धारा जोड़ी गई। उन्होंने पुलिस को किशोर की जमानत रद्द कराने के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश देने की बात भी कही।

गृह मंत्री ने कहा कि मर्सिडीज कार जज के नाम पर पंजीकृत है और जांच में यदि पर्याप्त आधार सामने आता है, तो जज के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून के सामने सभी बराबर हैं और किसी व्यक्ति की आर्थिक या सामाजिक स्थिति के आधार पर अलग व्यवहार नहीं होना चाहिए।

जांच के सामने अब ये अहम सवाल

इस मामले में अब जांच एजेंसियों के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं—क्या आरोपी के सोशल मीडिया वीडियो वास्तविक हैं और कब पोस्ट किए गए थे? हादसे के वक्त कार में कौन-कौन मौजूद था? क्या शुरुआती पुलिस कार्रवाई में कोई गंभीर चूक हुई? और क्या उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर किसी अन्य व्यक्ति की जिम्मेदारी भी बनती है?

इन सवालों के जवाब जांच, डिजिटल साक्ष्यों और आधिकारिक बयानों से सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल, मृतक के परिवार ने निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है, जबकि पुलिस और संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी चर्चा के केंद्र में है।

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