Samachar Nama
×

जेएसएससी सीजीएल के जरिए हुई नियुक्तियां रद्द करने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

जेएसएससी सीजीएल के जरिए हुई नियुक्तियां रद्द करने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित
जेएसएससी सीजीएल के जरिए हुई नियुक्तियां रद्द करने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

रांची, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। झारखंड में जेएसएससी-सीजीएल के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायमूर्ति दीपक रौशन की बेंच में एक साथ हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार, जेपीएससी, जेएसएससी और प्रार्थियों की ओर से दलीलें पूरी की गईं।

सुनवाई के दौरान अदालत ने नियुक्ति रद्द किए जाने के सरकार के आदेश पर पहले से लगी अंतरिम रोक को बरकरार रखा। इसका मतलब है कि अंतिम फैसला आने तक संबंधित नियुक्तियों पर सरकार के रद्दीकरण आदेश का प्रभाव नहीं होगा। हाईकोर्ट ने इससे पहले भी कहा था कि नियमित नियुक्तियों को समाप्त करने से पहले प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन किया जाना जरूरी है और इसी आधार पर प्रभावित कर्मियों को अंतरिम राहत दी गई थी।

इस मामले में बुधवार को भी हाईकोर्ट में सुनवाई हुई थी, लेकिन बहस पूरी नहीं हो सकी थी। अदालत ने गुरुवार को सुनवाई जारी रखने का निर्देश दिया था। बुधवार की सुनवाई में भी नियुक्तियों की स्थिति को लेकर अदालत की ओर से दी गई अंतरिम राहत जारी रही थी। राज्य सरकार ने 18 अगस्त 2026 को विभिन्न भर्ती परीक्षाओं और उनके आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द कर दिया था।

इसके बाद इन परीक्षाओं से चयनित और नियुक्त अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया। जेपीएससी की सीडीपीओ परीक्षा तथा जेएसएससी-सीजीएल से हुई नियुक्तियों के अलावा अन्य भर्ती परीक्षाओं से संबंधित याचिकाएं भी अदालत के समक्ष हैं। हाईकोर्ट ने अगस्त में सीडीपीओ और जेएसएससी-सीजीएल से हुई नियुक्तियों को रद्द करने संबंधी सरकार के आदेश पर रोक लगाते हुए संबंधित कर्मियों को काम जारी रखने की राहत दी थी।

बाद की सुनवाई में अदालत ने मामले को व्यापक संदर्भ में देखा। 18 सितंबर को हाईकोर्ट ने नियुक्तियां रद्द करने के फैसले पर अंतरिम रोक जारी रखते हुए भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीश गौतम कुमार चौधरी को नियुक्त किया था। अदालत ने यह भी कहा था कि जांच के दौरान निष्पक्ष तरीके से चयनित अभ्यर्थियों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी आरके मल्लिक को भी इस प्रक्रिया में सहयोग के लिए नोडल अधिकारी बनाया गया था। इससे पहले अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा था कि सभी नियुक्तियों को एक ही नजर से नहीं देखा जा सकता। अदालत के समक्ष यह सवाल भी उठा कि यदि भर्ती प्रक्रिया में कुछ स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो क्या बिना अलग-अलग अभ्यर्थियों की भूमिका और स्थिति की जांच किए सभी नियुक्तियों को एक साथ रद्द किया जा सकता है। गुरुवार की सुनवाई में प्रार्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता एवं राज्य के पूर्व महाधिवक्ता राजीव रंजन, अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स, कुमार हर्ष, सोनल तिवारी, सुभाष रसिक सोरेन समेत अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा।

राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता रोहिताश्य रॉय ने दलीलें पेश कीं। जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल और उनके सहयोगी प्रिंस कुमार ने पक्ष रखा। हस्तक्षेप याचिका दायर करने वालों की ओर से अधिवक्ता टी. सिंहदेव ने अदालत के समक्ष अपनी दलीलें रखीं।

--आईएएनएस

एसएनसी/डीएससी

Share this story

Tags