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जेपीएससी परीक्षा की गड़बड़ियों की सीबीआई हो, आयोग के तीनों सदस्य बर्खास्त हों: आदित्य साहू

जेपीएससी परीक्षा की गड़बड़ियों की सीबीआई हो, आयोग के तीनों सदस्य बर्खास्त हों: आदित्य साहू
जेपीएससी परीक्षा की गड़बड़ियों की सीबीआई हो, आयोग के तीनों सदस्य बर्खास्त हों: आदित्य साहू

रांची, 30 जुलाई (आईएएनएस)। झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने जेपीएससी में कथित अनियमितताओं के मामले में राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए आयोग के तीनों मौजूदा सदस्यों को तत्काल बर्खास्त कर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और उन्हें गिरफ्तार करने की मांग की है।

उन्होंने पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग भी दोहराई। गुरुवार को जारी बयान में साहू ने कहा कि जेपीएससी में गड़बड़ियां उजागर होने के बाद तत्कालीन अध्यक्ष एल ख्यांग्ते ने इस्तीफा दे दिया है, लेकिन आयोग के तीनों सदस्य अब भी अपने पद पर बने हुए हैं। उनका कहना था कि जब तक ये सदस्य पद पर बने रहेंगे, तब तक पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की मंशा शुरू से ही भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराने की नहीं रही है। सरकार छात्रों और युवाओं को न्याय दिलाने के बजाय इन मामलों पर पर्दा डालने का प्रयास कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि तत्कालीन अध्यक्ष के इस्तीफे के बाद उनके खिलाफ अब तक प्राथमिकी क्यों दर्ज नहीं की गई और उनकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई।

साहू ने कहा कि तत्कालीन अध्यक्ष के साथ-साथ आयोग के तीनों सदस्यों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से इन सभी को पद से हटाकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने और गिरफ्तारी सुनिश्चित करने की मांग की।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि झारखंड में जेपीएससी, जेएसएससी और उत्पाद सिपाही भर्ती समेत पिछले छह वर्षों में सामने आए सभी कथित भर्ती घोटालों की सीबीआई से जांच कराई जानी चाहिए। उनका आरोप था कि सीआईडी जांच केवल आंखों में धूल झोंकने का प्रयास है और इससे मामले की सच्चाई सामने नहीं आएगी।

उन्होंने कहा कि भाजपा भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ सड़क से संसद तक संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने बताया कि बुधवार को संसद भवन के मकर द्वार पर झारखंड के भाजपा सांसदों ने इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किया था, जबकि शुक्रवार को संसद परिसर में एक घंटे का मौन उपवास भी प्रस्तावित है।

--आईएएनएस

एसएनसी/एएसएच

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