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जेपीएससी-जेएसएससी के जरिए हुईं नियुक्तियां रद्द करने के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक बरकरार

जेपीएससी-जेएसएससी के जरिए हुईं नियुक्तियां रद्द करने के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक बरकरार
जेपीएससी-जेएसएससी के जरिए हुईं नियुक्तियां रद्द करने के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक बरकरार

रांची, 18 सितंबर (आईएएनएस)। झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी की सीडीपीओ परीक्षा और जेएसएससी-सीजीएल के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर पहले से लगी रोक बरकरार रखी। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में शुक्रवार को जेपीएससी की बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) परीक्षा और जेएसएससी-सीजीएल समेत विभिन्न भर्ती परीक्षाओं से हुई नियुक्तियों को रद्द करने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि अब तक सामने आए तथ्यों से ऐसा प्रतीत होता है कि सभी नियुक्तियां सही तरीके से नहीं हुई हैं, लेकिन यह भी तथ्य है कि सभी नियुक्तियों में गड़बड़ी नहीं हुई है। अदालत ने इस बात पर भी चिंता जताई कि जेपीएससी को परीक्षा आयोजित करने और नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करने में दो-तीन साल लग जाते हैं। ऐसे में एक साथ बड़ी संख्या में नियुक्तियां रद्द करने से उन अधिकारियों की नौकरी प्रभावित हो सकती है, जिनके खिलाफ व्यक्तिगत तौर पर कोई गड़बड़ी सामने नहीं आई है।

अदालत ने भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच की निगरानी के लिए हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश गौतम कुमार चौधरी को नियुक्त किया है। वहीं, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी आरके मलिक को नोडल अधिकारी बनाया गया है। शुक्रवार की सुनवाई में राज्य सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से अदालत में जवाब दाखिल किया गया।

राज्य सरकार की ओर से दाखिल शपथ पत्र में जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने के फैसले को सही ठहराते हुए कहा गया कि परीक्षा की पूरी प्रक्रिया कथित अनियमितताओं से प्रभावित हो गई थी। सरकार के अनुसार, ऐसी स्थिति में सही तरीके से सफल हुए अभ्यर्थियों और कथित तौर पर अनुचित तरीके से लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों के बीच स्पष्ट अंतर करना मुश्किल था। सरकार ने अपने जवाब में सुप्रीम कोर्ट के उन दिशा-निर्देशों का हवाला दिया है, जिनके अनुसार यदि किसी परीक्षा की पूरी प्रक्रिया दूषित हो जाए और सही तथा गलत तरीके से चयनित अभ्यर्थियों में अंतर करना संभव न हो तो पूरी परीक्षा रद्द की जा सकती है।

सरकार ने इसी आधार पर सीजीएल परीक्षा रद्द करने के फैसले का बचाव किया है। शपथ पत्र में कहा गया है कि सीजीएल परीक्षा से जुड़े गोपनीय कार्य आईसीएन टेक्नोलॉजी को दिए गए थे। इनमें प्रश्नपत्रों की छपाई और उन्हें परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने सहित अन्य कार्य शामिल थे। सरकार के अनुसार, परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में एजेंसी के सीईओ सोमांश प्रकाश समेत 28 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 265 लोगों को नोटिस जारी किया गया है। जांच में नेपाल के अलावा आसनसोल, कोलकाता, बिहार, झरिया और बोकारो में कथित तौर पर अभ्यर्थियों को प्रश्नों के उत्तर रटाए जाने की जानकारी मिलने का भी सरकार ने दावा किया है।

सरकार के अनुसार, नेपाल ले जाए गए 28 अभ्यर्थियों में से 10 सीजीएल परीक्षा में सफल हुए हैं। मामले की जांच अभी जारी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन, इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स, कुमार हर्ष, सोनल तिवारी और सुभाष रसिक सोरेन समेत अन्य ने पक्ष रखा। राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता रोहिताश्य रॉय तथा जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पीपरवाल और प्रिंस कुमार ने बहस की।

--आईएएनएस

एसएनसी/एसके

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